एसिटिक अम्ल के गुणधर्म
• रंग और अवस्था:- यह एक रंगहीन द्रव है। शुद्ध और जल-रहित एसिटिक अम्ल (ग्लेशियल एसिटिक अम्ल) 16.6°C से कम तापमान पर बर्फ जैसे क्रिस्टल में जम जाता है।इसलिए इसे ग्लेशियल एसिटिक अम्ल भी कहते हैं। • गंध औ…
भौतिक गुण
• रंग और अवस्था:- यह एक रंगहीन द्रव है। शुद्ध और जल-रहित एसिटिक अम्ल (ग्लेशियल एसिटिक अम्ल) 16.6°C से कम तापमान पर बर्फ जैसे क्रिस्टल में जम जाता है।इसलिए इसे ग्लेशियल एसिटिक अम्ल भी कहते हैं।
• गंध और स्वाद:- इसकी गंध तीखी और सिरके जैसी होती है, तथा इसका स्वाद खट्टा होता है।
• विलयता:- यह पानी, अल्कोहल और ईथर में पूरी तरह घुल जाता है।
• क्वथनांक और गलनांक:- इसका क्वथनांक 118.1°C और गलनांक लगभग 16.7°C होता है।
रासायनिक गुण
1. क्षारकों के साथ अभिक्रिया
एसिटिक अम्ल एक दुर्बल मोनोबेसिक अम्ल है तथा जलीय विलयन में आयनित होकर ऐसीटेट आयन तथा हाइड्रोजन के धनायन बनाता है। इसके अम्लीय गुण के कारण यह क्षारकों के साथ अभिक्रिया करके लवण बनाता है।
CH₃COOH + NaOH → CH₃COONa + H₂O
CH₃COOH + NaHCO₃ → CH₃COONa + H₂O + CO₂ ↑
CH₃COOH + NH₃ → CH₃COONH₄
अमोनियम ऐसीटेट (CH₃COONH₄) को गर्म करने पर ऐसीटामाइड प्राप्त होता है।
CH₃COONH₄ ────> CH₃CONH₂+ H₂O
2. एस्टरीकरण
जिस प्रकार अम्ल तथा क्षार की अभिक्रिया से लवण तथा जल बनते हैं उसी प्रकार अम्ल तथा ऐल्कोहॉल की अभिक्रिया से एस्टर तथा जल बनते हैं। इस अभिक्रिया को एस्टरीकरण कहते हैं। कार्बोक्सिलिक अम्लों की एस्टरीकरण क्रिया प्रायः सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल की उपस्थिति में करायी जाती है। यह निर्जलीकारक तथा उत्प्रेरक दोनों का कार्य करता है।
CH₃COOH + C₂H₅OH ────> CH₃COOC₂H₅ + H₂O
3. हैलोजनीकरण
लाल फॉस्फोरस की उपस्थिति में ऐसीटिक अम्ल में क्लोरीन या ब्रोमीन प्रवाहित करने पर मेथिल मूलक के हाइड्रोजन परमाणु एक-एक करके क्लोरीन अथवा ब्रोमीन परमाणुओं से विस्थापित हो जाते हैं।
CH₃COOH + Cl₂ → CH₂ClCOOH + HCl
CH₂ClCOOH + Cl₂ → CHCl₂COOH + HCl
CHCl₂COOH + Cl₂ → CCl₃COOH + HCl
इस अभिक्रिया को हेल-वोल्हार्ड-जेलिन्सकी (HVZ) अभिक्रिया कहते हैं।
4. PCl₅ से अभिक्रिया
CH₃COOH + PCl₅ → CH₃COCl + POCl₃ + HCl
5. निर्जलीकरण
ऐसीटिक अम्ल को अकेले अथवा निर्जलीकारकों जैसे फॉस्फोरस पेंटा-ऑक्साइड की उपस्थिति में गर्म करने पर इसके दो अणुओं में से जल का एक अणु पृथक हो जाता है तथा ऐसीटिक ऐनहाइड्राइड प्राप्त होता है। 2CH₃COOH → (CH₃CO)₂O + H₂O
6. अपचयन
लीथियम ऐलुमिनियम हाइड्राइड (LiAlH₄)द्वारा अपचयित होकर यह एथेनॉल बनाता है।
CH₃COOH → CH₃CH₂OH + H₂O
7. श्मिट अभिक्रिया
कार्बोक्सिलिक अम्ल हाइड्रोजोइक अम्ल (N₃H) से सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल की उपस्थिति में अभिक्रिया करके प्राथमिक ऐमीन बनाते हैं। इस अभिक्रिया को श्मिट अभिक्रिया कहते हैं। ऐसीटिक अम्ल हाइड्रोजोइक अम्ल से सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल (H₂SO₄) की उपस्थिति में अभिक्रिया करके मेथिल ऐमीन (CH₃NH₂ ) बनाता है।
CH₃COOH + N₃H → CH₃NH₂ + CO + N₂
एथेनॉइक अम्ल के मुख्य उपयोग
1. प्रयोगशाला में एक महत्वपूर्ण अभिकर्मक के रूप में।
2. अनेक कार्बनिक यौगिकों, रेजिन और गोंद के लिए विलायक के रूप में।
3. भोजन में सिरके (Vinegar) के रूप में, अचार, चटनी और सॉस को खराब होने से बचाने (परिरक्षक/Preservative) के लिए।
4. रसायनों के निर्माण में:-
* ऐसीटोन, ऐसीटिक ऐनहाइड्राइड और विभिन्न प्रकार के एस्टर बनाने में।
* इन एस्टरों का उपयोग इत्र और कृत्रिम सुगंध बनाने में होता है।
5. प्लास्टिक और रंजक उद्योग में:-
* सेल्युलोज ऐसीटेट नामक प्लास्टिक बनाने में, जिसका उपयोग फोटोग्राफिक फिल्म और कृत्रिम रेशे (Rayon) बनाने में होता है।
* विभिन्न प्रकार के रंगों और रंजकों के निर्माण में।
6. दवाओं के निर्माण में :-
* एस्पिरिन जैसी महत्वपूर्ण औषधियाँ और पेनकिलर बनाने में।
7. कपड़ा और रबर उद्योग में:-
* रबर के लेटेक्स को स्कंदित करने यानी रबर को जमाने में।
* कपड़ों की छपाई और रंगाई में।
