आखिरी घड़ी
सुमित और राहुल पक्के दोस्त थे। दोनों हर बात एक-दूसरे से साझा करते थे, लेकिन पिछले कुछ दिनों से सुमित ने राहुल को नजर अंदाज करने लगा। एक दिन राहुल उसे समझा रहा था उसकी गलत आदतो और संगतो का हवाला देकर.…



सुमित और राहुल पक्के दोस्त थे। दोनों हर बात एक-दूसरे से साझा करते थे, लेकिन पिछले कुछ दिनों से सुमित ने राहुल को नजर अंदाज करने लगा।
एक दिन राहुल उसे समझा रहा था
उसकी गलत आदतो और संगतो का हवाला देकर...
तो सुमित ने झुंझला कर कहा -
"मुझे तुम्हारी नसीहत की कोई ज़रूरत नहीं है! मैं खुद अपने फैसले लेने के काबिल हूँ। मैं अपना अच्छा-बुरा समझता हूँ।"
राहुल चुपचाप रह जाता और वक्त बीतता गया।
राष्ट्र सेवा सदन इंटर कॉलेज के PTI चंद्रकांत सर के निर्देशन में हो रहे वार्षिक खेल समारोह में भी
सुमित की एक बड़ी गलती के कारण पूरी टीम प्रतियोगिता से बाहर होने की कगार पर आ गई,
पर ईर्ष्या और गुस्से में सुमित ने राहुल को ही दोषी ठहरा दिया
और सरेआम कहा -
"आज से हमारी दोस्ती खत्म!"
मुझे तुम्हारी कोई जरूरत नहीं... दफा हो जाओ।
राहुल की आँखों में आँसू आ गए, पर वह कुछ नहीं बोला।
फिर भी...
उसी शाम राहुल ने सुमित को मिलने के लिए बुलाया और व्हाट्सएप पर एक मैसेज भेजा।
...सुमित ने अहंकार में आकर संदेश देखा ही नहीं और मिलने से साफ़ मना कर दिया।
अगले दिन सुबह खबर आई कि राहुल शहर छोड़कर हमेशा के लिए जा रहा है ? क्योंकि उसके पिता का ट्रांसफर हो गया था।
ये खबर सुनते ही सुमित, राहुल के घर की ओर दौड़ चला...
जब उसके घर पहुँचा,
...तो वहाँ ताला लगा था।
उसे ताले मे ही एक कागज का टुकड़ा दिखा। सुमित ने काँपते हाथों से उसे खोला
जिसमें लिखा था-
"सुमित, शायद मैं तुझे कभी समझा न पाया,
पर मैंने कभी तेरा बुरा नहीं चाहा। समय और सच्चे दोस्त दोबारा नहीं मिलते।
'अपना ख्याल रखना! ...दोस्त"
खत पढ़ते ही सुमित के पैरों तले ज़मीन खिसक गई...
क्योंकि जिस दोस्त के साथ को वह रोज़ का शोर समझता, उसके प्रति जलन और द्वेष भाव रखता था।
आज उसकी खामोशी ने उसे भीतर से झकझोर दिया...
उस एक कागज के टुकड़े ने सुमित के अहंकार और नासमझी को हमेशा के लिए तोड़ दिया था...
उसी दिन सुमित ने अपनी हर गलती को सुधारकर एक बेहतर, संवेदनशील और सफल इंसान बनने की कसम खाई।
संदेश:
समय और सच्चे रिश्ते जीवन की सबसे अनमोल अमानत हैं। इनकी कद्र कीजिए, इससे पहले कि जिंदगी इन्हें सिर्फ यादों में बदल दे। इसलिए माफ़ी माँगने और माफ़ करने में, कभी देर नहीं करनी चाहिए, क्योंकि कल का कोई भरोसा नहीं।