'चींटी' और 'चंद्रलोक में प्रथम बार' के अभ्यास प्रश्न
सुमित्रानंदन पंत जी के पाठ से संबंधित सभी प्रश्नों के उत्तर क्रमानुसार नीचे प्रस्तुत हैं। प्रथम खंड बहुविकल्पीय प्रश्न प्रश्न १: पंत ने चींटी को किसका प्रतीक माना है ? क. श्रमशील मनुष्य का ख. सर्व…



अभ्यास प्रश्न:
सुमित्रानंदन पंत जी के पाठ से संबंधित सभी प्रश्नों के उत्तर क्रमानुसार नीचे प्रस्तुत हैं।
प्रथम खंड बहुविकल्पीय प्रश्न
प्रश्न १: पंत ने चींटी को किसका प्रतीक माना है ?
क. श्रमशील मनुष्य का
ख. सर्वहारा वर्ग का
ग. पशु का
घ. इनमें से कोई नहीं
उत्तर: (क) श्रमशील मनुष्य का।
प्रश्न २: चींटी कविता पंत के किस काव्य संग्रह से ली गई है ?
क. युगवाणी
ख. गुंजन
ग. पल्लव
घ. युगांत
उत्तर: (क) युगवाणी।
प्रश्न ३: सुमित्रानंदन पंत का जन्म स्थान है?
क. कौसानी अल्मोड़ा
ख. फर्रुखाबाद
ग. ग्वालियर
घ. दिल्ली
उत्तर: (क) कौसानी अल्मोड़ा।
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प्रश्न ४: पंत को ज्ञानपीठ सम्मान प्राप्त हुआ?
क. पल्लव के लिए
ख. युगांत के लिए
ग. युगपथ के लिए
घ. चिदंबरा के लिए
उत्तर: (घ) चिदंबरा के लिए।
प्रश्न ५: चंद्रलोक में प्रथम बार कविता के रचनाकार हैं?
क. निराला
ख. प्रसाद
ग. सुमित्रानंदन पंत
घ. महादेवी वर्मा
उत्तर: (ग) सुमित्रानंदन पंत।
द्वितीय खंड: निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए
प्रश्न १: चंद्रलोक में प्रथम बार कविता में कवि की उन संभावनाओं का वर्णन कीजिए जो मानव के चाँद पर पहुँचने पर साकार सी प्रतीत होती हैं?
उत्तर: मानव के चाँद पर पहुँचने से कवि को यह संभावना प्रतीत होती है कि अब मनुष्य अन्य ग्रहों और उपग्रहों पर भी विजय प्राप्त कर लेगा। ब्रह्मांड के सारे रहस्य खुल जाएंगे और पृथ्वी के लोगों का अन्य ग्रहों के निवासियों से संपर्क स्थापित हो सकेगा।
प्रश्न २: चंद्रलोक में प्रथम बार मानव के उतरने पर कवि क्या मंगल कामना करता है? पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए?
उत्तर: कवि यह मंगल कामना करता है कि चंद्रमा पर मानव का पहुँचना विश्व शांति और मानवता के विकास का साधन बने। परमाणु ऊर्जा का उपयोग विनाश के लिए न होकर मानव कल्याण और धरती पर सुख शांति के लिए हो।
प्रश्न ३: हृदय सिंधु में उठता, स्वर्गिक ज्वार देख चंद्रानन का भाव स्पष्ट कीजिए?
उत्तर: इसका भाव यह है कि जिस प्रकार चंद्रमा को देखकर समुद्र में ज्वार आता है, उसी प्रकार चंद्रमा रूपी मुख या चंद्रमा पर मानव की विजय को देखकर मानव के हृदय रूपी समुद्र में आनंद और उत्साह का स्वर्गीय ज्वार उठने लगा है।
प्रश्न ४: सुमित्रानंदन पंत का जीवन परिचय देते हुए उनकी साहित्यिक उपलब्धियों का उल्लेख कीजिए?
उत्तर: सुमित्रानंदन पंत का जन्म उन्नीस सौ ईस्वी में अल्मोड़ा के कौसानी ग्राम में हुआ था। प्रकृति के सुरम्य वातावरण में पलने के कारण इनकी कविताओं में प्रकृति का सुकुमार चित्रण मिलता है। इन्होंने अपनी साहित्यिक यात्रा में छायावाद, प्रगतिवाद और अरविंद दर्शन से प्रभावित रचनाएं कीं। पल्लव, गुंजन, युगवाणी, ग्राम्या और चिदंबरा इनकी प्रमुख साहित्यिक उपलब्धियां हैं।
प्रश्न ५: सुमित्रानंदन पंत की रचनाओं का उल्लेख करते हुए उनके काव्य सौंदर्य पर प्रकाश डालिए?
उत्तर: पंत जी की प्रमुख रचनाएं पल्लव, ग्रंथि, गुंजन, युगांत, युगवाणी, स्वर्णधूलि और लोकायतन हैं। इनके काव्य सौंदर्य में प्रकृति का मानवीकरण, कोमलकांत पदावली, चित्रात्मक भाषा और अनुप्रास, उपमा तथा रूपक अलंकारों का सहज प्रयोग देखने को मिलता है।
प्रश्न ६: चींटी कविता पंत के किस काव्य संग्रह से लिया गया है ?
उत्तर: चींटी कविता सुमित्रानंदन पंत के युगवाणी काव्य संग्रह से ली गई है।
प्रश्न ७: पंत द्वारा रचित चींटी कविता का सारांश लिखिए?
उत्तर: इस कविता में कवि ने चींटी जैसे लघु प्राणी की निरंतर कार्यशीलता, अनुशासन और श्रमशीलता का वर्णन किया है। चींटियां एक पंक्ति में अनुशासित होकर चलती हैं, अपने बच्चों और गायों की देखभाल करती हैं, निर्भय होकर शत्रुओं से लड़ती हैं और अपना घर आँगन साफ रखती हैं जो उनके अथक परिश्रम का प्रतीक है।
प्रश्न ८: पंत चींटी के माध्यम से मनुष्य को किस प्रकार प्रेरणा दे रहे हैं? स्पष्ट कीजिए?
उत्तर: कवि चींटी के माध्यम से मनुष्य को निरंतर कर्मशील रहने, अनुशासन में जीने, समाज के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने और कठिनाइयों से न घबराने की प्रेरणा दे रहे हैं।
प्रश्न ९: वह जीवन की चिनगी अक्षय इस पंक्ति में कवि चींटी के किस गुण की ओर संकेत कर रहे हैं? चींटी के इस गुण से हमें क्या प्रेरणा लेनी चाहिए?
उत्तर: इस पंक्ति में कवि चींटी की कभी न नष्ट होने वाली जीवन शक्ति और अटूट ऊर्जा की ओर संकेत कर रहे हैं। हमें इससे यह प्रेरणा लेनी चाहिए कि यदि हमारे भीतर कार्य करने की दृढ़ इच्छाशक्ति है, तो हम कोई भी बड़ा कार्य निरंतरता के साथ पूरा कर सकते हैं।
तृतीय खंड: दिये गए पद्यांशों पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए
पद्यांश (क)
चींटी को देखा ?
वह सरल, विरल, काली रेखा
तम के तागे सी जो हिल डुल
चलती लघुपद पल पल मिल जुल
वह है पिपीलिका पाँति !
देखो ना, किस भाँति
काम करती वह सतत !
कन कन करके चुनती अविरत !
गाय चराती,
धूप खिलाती,
बच्चों की निगरानी करती,
लड़ती, अरि से तनिक न डरती,
दल के दल सेना सँवारती,
घर आँगन, जनपथ बुहारती !
प्रश्न १: उपर्युक्त पद्यांश का संदर्भ लिखिए?
उत्तर: प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक हिंदी के काव्य खंड में संकलित और सुमित्रानंदन पंत द्वारा रचित चींटी शीर्षक कविता से अवतरित है।
प्रश्न २: कवि ने चींटी जैसे लघु प्राणी की कर्मठता का वर्णन किस प्रकार से किया है?
उत्तर: कवि ने बताया है कि चींटी निरंतर काम करती है और एक एक कण लगातार चुनती रहती है। वह अपने सभी सामाजिक कार्य अत्यंत निष्ठा से करती है।
प्रश्न ३: रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए?
उत्तर: कवि चींटियों के सामाजिक और व्यवस्थित जीवन का वर्णन करते हुए कहते हैं कि चींटियां भी मनुष्यों की तरह एक सुसंगठित समाज में रहती हैं। वे भी अपने पशुओं जैसे कुछ विशेष कीटों, जिन्हें चींटियों की गाय कहा जाता है को चराती हैं, उन्हें धूप दिखाती हैं, और अपने छोटे बच्चों की बहुत सावधानी से देखभाल करती हैं।
चींटी भले ही आकार में बहुत छोटी होती है, लेकिन स्वभाव से अत्यंत निडर और वीर होती है। यदि कोई शत्रु उनके रास्ते में आ जाए या उन पर हमला करे, तो वह उससे बिल्कुल नहीं डरती और डटकर मुकाबला करती है। अपनी सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए वे अपनी सेनाओं को झुंड-के-झुंड व्यवस्थित करती हैं। इसके साथ ही, वे साफ-सफाई का भी पूरा ध्यान रखती हैं और अपने निवास स्थान तथा चलने के रास्तों को पूरी तरह साफ करती हुई आगे बढ़ती हैं।
पद्यांश (ख)
युग युग का पौराणिक स्वप्न
हुआ मानव का संभव,
समारंभ शुभ नये चंद्रयुग का
भू को दे गौरव !
फहराए ग्रह उपग्रह में
धरती का श्यामल अंचल,
सुख संपद संपन्न जगत् में
बरसे जीवन मंगल !
अमरीका सोवियत बनें
नव दिक् रचना के वाहन
जीवन पद्धतियों के भेद
समन्वित हों, विस्तृत मन !
प्रश्न १: उपर्युक्त पद्यांश का संदर्भ लिखिए?
उत्तर: प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक हिंदी के काव्य खंड में संकलित और सुमित्रानंदन पंत द्वारा रचित चंद्रलोक में प्रथम बार शीर्षक कविता से लिया गया है।
प्रश्न २: पद्यांश में प्रयुक्त अलंकार एवं रस का उल्लेख कीजिए?
उत्तर: इस पद्यांश में अनुप्रास अलंकार का प्रयोग हुआ है और वीर तथा शांत रस की प्रधानता है।
प्रश्न ३: रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए?
उत्तर: कवि सुमित्रानंदन पंत अंतरिक्ष युग के आरंभ पर एक वैश्विक और ब्रह्मांडीय स्वप्न देखते हैं। वे चाहते हैं कि मनुष्य की पहुँच केवल धरती तक सीमित न रहे, बल्कि पृथ्वी की जीवनदायिनी हरियाली, प्रेम और शांति का प्रतीक उसका श्यामल आंचल अब अन्य ग्रहों और उपग्रहों तक भी फहराए। अर्थात्, मनुष्य ब्रह्मांड में जहाँ भी जाए, वहां पृथ्वी जैसी जीवन-संभावनाएं और शांति लेकर जाए। यह सारा संसार भौतिक सुख और समृद्धि से परिपूर्ण हो जाए और संपूर्ण मानव जाति के जीवन में केवल मंगल और कल्याण की वर्षा हो।
कवि तत्कालीन शीत युद्ध के संदर्भ में विश्व की दो प्रमुख महाशक्तियों, अमेरिका और सोवियत संघ का आह्वान करते हैं। वे कामना करते हैं कि ये दोनों देश अपने विनाशकारी वर्चस्व के संघर्ष को त्यागकर एक नई और सकारात्मक दुनिया के निर्माण के संवाहक बनें। पूंजीवाद और साम्यवाद जैसी इनकी विरोधी विचारधाराओं और जीवन पद्धतियों का आपस में रचनात्मक समन्वय हो जाए। संपूर्ण मानव जाति का हृदय और सोच इतनी विशाल हो जाए कि सारी संकीर्ण दूरियां मिट जाएं और पूरी पृथ्वी एक परिवार की तरह रहे।
पद्यांश (ग)
अणु युग बने धरा जीवन हित
स्वर्ग सृजन का साधन,
मानवता ही विश्व सत्य
भू राष्ट्र करें आत्मार्पण !
धरा चंद्र की प्रीति परस्पर
जगत प्रसिद्ध, पुरातन,
हृदय सिंधु में उठता
स्वर्गिक ज्वार देख चंद्रानन !
प्रश्न १: उपर्युक्त पद्यांश का संदर्भ लिखिए।
उत्तर: प्रस्तुत पद्यांश सुमित्रानंदन पंत द्वारा रचित चंद्रलोक में प्रथम बार नामक कविता से लिया गया है।
प्रश्न २: हृदय सिंधु में उठता, स्वर्गिक ज्वार देख चंद्रानन में कौन सा अलंकार है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: इसमें रूपक अलंकार है क्योंकि हृदय को सिंधु अर्थात समुद्र का और चंद्रानन अर्थात चंद्रमा रूपी मुख का रूप दिया गया है, जिससे उपमेय और उपमान में अभेद दर्शाया गया है।
प्रश्न ३: रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: कवि सुमित्रानंदन पंत कामना करते हैं कि विज्ञान की चरम उपलब्धि यानी यह परमाणु युग पृथ्वी पर मानव जीवन के विनाश का कारण न बने, बल्कि मानव कल्याण का साधन बने। परमाणु ऊर्जा का उपयोग संहारक हथियारों के निर्माण के लिए नहीं, बल्कि इस धरती को स्वर्ग के समान सुंदर, सुखमय और समृद्ध बनाने के लिए किया जाना चाहिए। कवि कहते हैं कि इस संसार का सबसे बड़ा और शाश्वत सत्य केवल मानवता ही है। विश्व के सभी देशों को अपनी संकीर्ण सीमाओं, स्वार्थों और राष्ट्रीय अहंकार को त्यागकर इस महान मानवता के प्रति स्वयं को समर्पित कर देना चाहिए। संपूर्ण विश्व को एक परिवार की भावना से जुड़ जाना चाहिए।
चतुर्थ खंड: भाषा के रंग
प्रश्न १: तम के तागे सी जो हिल डुल, चलती लघुपद पल पल मिल जुल पंक्ति में कौन सा अलंकार है ?
उत्तर: इन पंक्तियों में उपमा अलंकार और अनुप्रास अलंकार का प्रयोग हुआ है। सी वाचक शब्द के कारण यहाँ उपमा अलंकार है।
प्रश्न २: निम्नलिखित पदों में से प्रत्ययों को अलग करके लिखिए सामाजिक, छोटापन, पौराणिक, मानवता, ऐतिहासिक
उत्तर: सामाजिक में इक प्रत्यय है, छोटापन में पन प्रत्यय है, पौराणिक में इक प्रत्यय है, मानवता में ता प्रत्यय है और ऐतिहासिक में इक प्रत्यय है।
प्रश्न ३: निम्नलिखित पंक्तियों में प्रयुक्त रस छंद और अलंकार की पहचान कीजिए अणु युग बने धरा जीवन हित स्वर्ग सृजन का साधन, मानवता ही विश्व सत्य भू राष्ट्र करें आत्मार्पण।
उत्तर: इन पंक्तियों में शांत रस है, यह मुक्तक छंद की रचना है और इसमें अनुप्रास तथा रूपक अलंकार का प्रयोग हुआ है।
प्रश्न ४: उपसर्गों की पहचान कीजिए सुनागरिक, समारंभ, उपग्रह, अक्षय, दुर्जय
उत्तर: सुनागरिक में सु उपसर्ग है, समारंभ में सम् उपसर्ग है, उपग्रह में उप उपसर्ग है, अक्षय में अ उपसर्ग है और दुर्जय में दुर् उपसर्ग है।
पंचम खंड: अनुभूति एवं अभिव्यक्ति
प्रश्न १: चींटी को श्रमजीवी, सामाजिक एवं सुनागरिक कहकर कवि किन मानवीय गुणों की ओर संकेत कर रहे हैं? जीवन में इन गुणों की भूमिका को आप कहाँ तक आवश्यक मानते हैं? विचार कीजिए?
उत्तर: कवि चींटी के माध्यम से मनुष्य के निरंतर परिश्रम करने, समाज के साथ मिलकर चलने और एक जिम्मेदार नागरिक की तरह कर्तव्यों का पालन करने जैसे मानवीय गुणों की ओर संकेत कर रहे हैं। जीवन में सफलता और शांति के लिए ये गुण अत्यंत आवश्यक हैं क्योंकि बिना श्रम के विकास संभव नहीं है और बिना सामाजिकता के सभ्य समाज का निर्माण नहीं हो सकता।
प्रश्न २: मनुष्य जब चाँद पर निवास करेगा, तब मानव को जीवन में किन किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है?
उत्तर: चाँद पर निवास करने में मानव को ऑक्सीजन की कमी, गुरुत्वाकर्षण का अभाव, तापमान में भारी उतार चढ़ाव, भोजन व पानी की व्यवस्था तथा हानिकारक विकिरणों से बचाव जैसी गंभीर प्राकृतिक एवं जैविक कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।