जवानी
प्रस्तुत काव्यांश माखनलाल चतुर्वेदी द्वारा रचित कविता जवानी से अवतरित है। इसमें कवि ने देश के युवाओं का आह्वान किया है और उन्हें अपनी सोई हुई शक्ति को जगाकर मातृभूमि के लिए सर्वोच्च बलिदान देने के लिए…


प्रस्तुत काव्यांश माखनलाल चतुर्वेदी द्वारा रचित कविता जवानी से अवतरित है। इसमें कवि ने देश के युवाओं का आह्वान किया है और उन्हें अपनी सोई हुई शक्ति को जगाकर मातृभूमि के लिए सर्वोच्च बलिदान देने के लिए प्रेरित किया है।

जवानी के अदम्य उत्साह का आह्वान :
प्राण अंतर में लिए, पागल जवानी!
शब्दार्थ: अंतर ~ हृदय या भीतर,
प्राण ~ जीवन शक्ति
व्याख्या: हे जवानी, तुम्हारे हृदय में असीम जीवन शक्ति और अदम्य उत्साह भरा हुआ है।
कौन कहता है कि तू
शब्दार्थ: तू ~ तुम
व्याख्या: ऐसा कौन अज्ञानी व्यक्ति है जो तुम्हारे विषय में यह निराधार बात कहता है।
विधवा हुई, खो आज पानी ?
शब्दार्थ: विधवा हुई ~ तेजहीन या उत्साहहीन होना,
पानी ~ तेज या स्वाभिमान
व्याख्या: कि तुम्हारा स्वाभिमान और तेज नष्ट हो गया है और तुम उत्साहहीन हो चुकी हो।
चल रहीं घड़ियाँ,
शब्दार्थ: घड़ियाँ ~ समय या पल
व्याख्या: समय निरंतर अपनी गति से आगे बढ़ रहा है और एक पल के लिए भी नहीं रुकता है।
चले नभ के सितारे,
शब्दार्थ: नभ ~ आकाश, सितारे ~ तारे
व्याख्या: आकाश में चमकने वाले तारे भी अपनी कक्षा में निरंतर गतिमान हैं।
चल रहीं नदियाँ,
शब्दार्थ: नदियाँ ~ सरिताएँ
व्याख्या: नदियाँ भी बिना रुके निरंतर अपने मार्ग पर आगे की ओर बह रही हैं।
चले हिम-खंड प्यारे;
शब्दार्थ: हिम-खंड ~ बर्फ के टुकड़े
व्याख्या: पहाड़ों पर बर्फ के सुंदर टुकड़े भी पिघलकर निरंतर आगे की ओर खिसक रहे हैं।
चल रही है साँस,
शब्दार्थ: साँस ~ प्राणवायु
व्याख्या: हे युवा, जब तक तुम्हारे भीतर प्राणवायु चल रही है, तब तक गतिशीलता ही जीवन है।
फिर तू ठहर जाए?
शब्दार्थ: ठहर जाए ~ रुक जाए
व्याख्या: फिर यह कैसे संभव है कि तुम अपने मार्ग में रुक जाओ और हार मान लो।
दो सदी पीछे कि
शब्दार्थ: सदी ~ सौ वर्षों का समय
व्याख्या: यदि तुम आज रुक गए, तो हमारा देश विकास और स्वतंत्रता के मार्ग पर दो सौ साल पीछे चला जाएगा।
तेरी लहर जाए ?
शब्दार्थ: लहर ~ उमंग या प्रवाह
व्याख्या: क्या तुम ऐसा चाहते हो कि तुम्हारी प्रगति की उमंग और उत्साह हमेशा के लिए पीछे छूट जाए।

बलिदान और क्रांति का आह्वान :
पहन ले नर-मुंड-माला,
शब्दार्थ: नर-मुंड-माला ~ मनुष्यों के सिरों की माला
व्याख्या: हे युवाओं, समय आ गया है कि तुम शिव के समान भयंकर रूप धारण करके नरमुंडों की माला पहन लो।
उठ, स्वमुंड सुमेरु कर ले;
शब्दार्थ: स्वमुंड ~ अपना सिर,
सुमेरु ~ माला का मुख्य और सबसे बड़ा मनका
व्याख्या: तुम उठो और अपने ही सिर का बलिदान देकर उसे इस माला का सबसे प्रमुख मनका बना दो।
भूमि-सा तू पहन बाना आज धानी
शब्दार्थ: बाना ~ वस्त्र,
धानी ~ हल्का हरा रंग
व्याख्या: आज तुम अपनी मातृभूमि की तरह हरे रंग के वस्त्र धारण कर लो जो क्रांति और नवजीवन का प्रतीक है।
प्राण तेरे साथ हैं, उठ री जवानी!
शब्दार्थ: प्राण ~ जीवन
व्याख्या: हे जवानी, संपूर्ण राष्ट्र की जीवन शक्ति तुम्हारे साथ है, इसलिए अब उठ खड़ी हो।
द्वार बलि का खोल
शब्दार्थ: द्वार ~ दरवाजा,
बलि ~ बलिदान
व्याख्या: तुम अपने त्याग से देश के लिए बलिदान का दरवाजा खोल दो।
चल, भूडोल कर दें,
शब्दार्थ: भूडोल ~ भूकंप या महान उथल-पुथल
व्याख्या: आगे बढ़ो और अपने पराक्रम से धरती पर एक महान क्रांति रूपी भूकंप ला दो।
एक हिमगिरि एक सिर
शब्दार्थ: हिमगिरि ~ हिमालय पर्वत
व्याख्या: तुम्हारे हर एक सिर का महत्व और उसकी शक्ति विशाल हिमालय पर्वत के समान है।
का मोल कर दें,
शब्दार्थ: मोल ~ कीमत
व्याख्या: तुम्हें अपने हर एक बलिदान की कीमत हिमालय जैसी महान और अमूल्य साबित करनी है।
मसल कर, अपने
शब्दार्थ: मसल कर ~ कुचल कर
व्याख्या: तुम अपने रास्ते में आने वाली हर बाधा और हर शत्रु को पूरी तरह से कुचल दो।
इरादों-सी, उठा कर,
शब्दार्थ: इरादों-सी ~ दृढ़ संकल्प के समान
व्याख्या: अपने मजबूत और अटल संकल्पों को ऊंचा उठाकर आगे बढ़ो।
दो हथेली हैं कि
शब्दार्थ: हथेली ~ हाथ का भीतरी भाग
व्याख्या: तुम्हारे पास ऐसी दो शक्तिशाली हथेलियां हैं।
पृथ्वी गोल कर दें ?
शब्दार्थ: गोल कर दें ~ व्यवस्था को बदल दें
व्याख्या: जो चाहें तो पूरी पृथ्वी की पुरानी व्यवस्था को ही पलट कर रख सकती हैं।
रक्त है ? या है नसों में क्षुद्र पानी!
शब्दार्थ: रक्त ~ खून,
क्षुद्र ~ तुच्छ या मामूली
व्याख्या: तुम्हें यह सिद्ध करना है कि तुम्हारी नसों में सच्चा खून बह रहा है या केवल कोई महत्वहीन पानी है।
जाँच कर, तू सीस दे-देकर जवानी ?
शब्दार्थ: जाँच कर ~ परीक्षा ले,
सीस ~ सिर
व्याख्या: हे जवानी, तुम अपने सिर का बलिदान देकर अपनी इस महान शक्ति की परीक्षा लो।

प्रकृति से प्रेरणा और परोपकार का संदेश :
वह कली के गर्भ से फल
शब्दार्थ: गर्भ ~ भीतर का भाग
व्याख्या: जब एक कली विकसित होती है, तो उसके भीतर से फल जन्म लेता है।
रूप में, अरमान आया!
शब्दार्थ: अरमान ~ इच्छा या संकल्प
व्याख्या: वह फल उस पेड़ की सच्ची इच्छा और पूर्णता का स्वरूप बनकर आता है।
देख तो मीठा इरादा, किस
शब्दार्थ: मीठा इरादा ~ सुंदर संकल्प
व्याख्या: प्रकृति के इस सुंदर और परोपकारी संकल्प को ध्यान से देखो।
तरह, सिर तान आया!
शब्दार्थ: सिर तान ~ गर्व से सिर उठाकर
व्याख्या: कि वह फल किस प्रकार गर्व के साथ सिर ऊंचा किए हुए प्रकट हुआ है।
डालियों ने भूमि रुख लटका
शब्दार्थ: भूमि रुख ~ धरती की ओर
व्याख्या: पेड़ों की डालियों ने धरती की ओर झुककर।
दिए फल, देख आली!
शब्दार्थ: आली ~ सखी या मित्र
व्याख्या: अपने फल संसार को अर्पित कर दिए हैं, हे मित्र इसे ध्यान से देखो।
मस्तकों को दे रही
शब्दार्थ: मस्तकों ~ सिरों
व्याख्या: ये वृक्ष अपनी डालियां झुकाकर हमारे सिरों को।
संकेत कैसे, वृक्ष-डाली!
शब्दार्थ: संकेत ~ इशारा
व्याख्या: बलिदान करने का कैसा महान और मूक इशारा कर रहे हैं।
फल दिए ? या सिर दिए ? तरु की कहानी
शब्दार्थ: तरु ~ पेड़
व्याख्या: इन पेड़ों ने केवल फल नहीं दिए हैं, बल्कि मानो मानवता के लिए अपना सिर ही काटकर दे दिया है।
गूँथकर युग में, बताती चल जवानी।
शब्दार्थ: गूँथकर ~ पिरोकर, युग ~ काल
व्याख्या: हे जवानी, तुम वृक्षों के इस बलिदान की कहानी को आने वाले समय के लिए एक आदर्श बना दो।

कायरता का तिरस्कार और स्वाभिमान की ललकार :
श्वान के सिर हो
शब्दार्थ: श्वान ~ कुत्ता
व्याख्या: यदि किसी कुत्ते के शरीर पर सिर सलामत भी रहे, तो उसका क्या मूल्य है।
चरण तो चाटता है!
शब्दार्थ: चरण ~ पैर
व्याख्या: क्योंकि वह तो हमेशा दूसरों के पैरों को ही चाटता रहता है और गुलामी करता है।
भौंक ले - क्या सिंह
शब्दार्थ: सिंह ~ शेर
व्याख्या: वह कुत्ता चाहे जितना भी जोर से भौंक ले, क्या कभी किसी शेर को।
को वह डाँटता है ?
शब्दार्थ: डाँटता ~ डराता
व्याख्या: अपनी आवाज से डरा सकता है या उसे चुनौती दे सकता है।
रोटियाँ खायीं कि
शब्दार्थ: रोटियाँ ~ भोजन या गुलामी का अन्न
व्याख्या: जिसने दूसरों के टुकड़ों पर पलकर अपनी भूख मिटाई हो।
साहस खो चुका है,
शब्दार्थ: साहस ~ हिम्मत
व्याख्या: वह अपनी सारी हिम्मत और वीरता पूरी तरह से खो देता है।
प्राणि हो, पर प्राण से
शब्दार्थ: प्राणि ~ जीव
व्याख्या: वह दिखने में एक जीवित प्राणी जरूर है, लेकिन उसकी आत्मा।
वह जा चुका है।
शब्दार्थ: जा चुका है ~ मृत हो गया है
व्याख्या: मर चुकी है और उसमें सच्चा जीवन शेष नहीं है।
तुम न खेलो ग्राम-सिंहों में भवानी!
शब्दार्थ: ग्राम-सिंहों ~ कुत्तों में, भवानी ~ दुर्गा रूपी शक्ति
व्याख्या: हे दुर्गा रूपी शक्ति, तुम इन कायर कुत्तों के बीच रहकर अपना समय व्यर्थ मत करो।
विश्व की अभिमान मस्तानी जवानी!
शब्दार्थ: अभिमान ~ गर्व, मस्तानी ~ मतवाली
व्याख्या: तुम तो पूरे संसार का गर्व हो और एक मतवाली अदम्य शक्ति हो।
ये न मग हैं, तव
शब्दार्थ: मग ~ रास्ते, तव ~ तुम्हारे
व्याख्या: तुम्हारे सामने जो यह मार्ग दिखाई दे रहा है, वह साधारण रास्ता नहीं है।
चरण की रेखियाँ हैं,
शब्दार्थ: रेखियाँ ~ रेखाएं या निशान
व्याख्या: बल्कि यह तुम्हारे पैरों द्वारा बनाए गए शौर्य के महान निशान हैं।
बलि दिशा की अमर
शब्दार्थ: बलि दिशा ~ बलिदान का मार्ग, अमर ~ जो कभी न मरे
व्याख्या: यह बलिदान के उस मार्ग की ऐसी अमर निशानी है।
देखा-देखियाँ हैं।
शब्दार्थ: देखा-देखियाँ ~ अनुकरण या देखा-देखी
व्याख्या: जिसका अनुकरण आने वाली पीढ़ियां गर्व के साथ करेंगी।
विश्व पर, पद से लिखे
शब्दार्थ: विश्व ~ संसार, पद ~ पैर
व्याख्या: तुमने अपने कदमों से इस पूरे संसार के इतिहास पर।
कृति लेख हैं ये,
शब्दार्थ: कृति लेख ~ यश की कहानी
व्याख्या: अपने यश और कीर्ति की महान कहानी लिख दी है।
धरा तीर्थों की दिशा
शब्दार्थ: धरा ~ पृथ्वी, तीर्थों ~ पवित्र स्थानों
व्याख्या: तुमने इस धरती को पवित्र तीर्थ स्थानों के समान बना दिया है।
की मेख हैं ये।
शब्दार्थ: मेख ~ कील या आधार
व्याख्या: और तुम्हारे ये कदम उन तीर्थों की दिशा तय करने वाले मुख्य आधार हैं।
प्राण रेखा खींच दे, उठ बोल रानी,
शब्दार्थ: प्राण रेखा ~ जीवन की सीमा
व्याख्या: हे रानी रूपी जवानी, तुम उठो और अपने बलिदान से एक नई जीवन रेखा खींच दो।
री मरण के मोल की चढ़ती जवानी।
शब्दार्थ: मरण के मोल ~ मृत्यु की कीमत, चढ़ती ~ बढ़ती हुई
व्याख्या: तुम्हारी बढ़ती हुई युवावस्था ही मृत्यु का सच्चा मूल्य चुकाने में सक्षम है।

प्रलय और नव-निर्माण की शक्ति :
टूटता-जुड़ता समय
शब्दार्थ: टूटता-जुड़ता ~ नष्ट होता और बनता हुआ
व्याख्या: समय हमेशा बदलाव के चक्र से गुजरता है, जिसमें कुछ नष्ट होता है और कुछ नया बनता है।
भूगोल आया,
शब्दार्थ: भूगोल ~ पृथ्वी का स्वरूप
व्याख्या: और इसी बदलाव के साथ पृथ्वी का नया स्वरूप सामने आता है।
गोद में मणियाँ समेट
शब्दार्थ: मणियाँ ~ कीमती रत्न
व्याख्या: यह पृथ्वी अपनी गोद में अनगिनत कीमती रत्नों को समेटे हुए है।
खगोल आया,
शब्दार्थ: खगोल ~ अंतरिक्ष या ब्रह्मांड
व्याख्या: और विशाल ब्रह्मांड भी इसके रहस्यों के साथ जुड़ा हुआ है।
क्या जले बारूद ?
शब्दार्थ: बारूद ~ विस्फोटक सामग्री
व्याख्या: यदि भीतर की आग ठंडी हो जाए, तो क्या कोई बारूद जल सकता है।
हिम के प्राण पाए!
शब्दार्थ: हिम ~ बर्फ
व्याख्या: जिसने बर्फ जैसी ठंडी और निष्क्रिय आत्मा पा ली हो, वह क्रांति नहीं कर सकता।
क्या मिला ? जो प्रलय
शब्दार्थ: प्रलय ~ विनाश या महाक्रांति
व्याख्या: उस जीवन का कोई अर्थ नहीं है, यदि उसमें कोई महाक्रांति।
के सपने न आए।
शब्दार्थ: सपने ~ स्वप्न या विचार
व्याख्या: लाने के विचार या बड़े बदलाव के सपने न पनपते हों।
धरा ? यह तरबूज
शब्दार्थ: धरा ~ पृथ्वी, तरबूज ~ एक फल
व्याख्या: यह पृथ्वी तो तुम्हारे लिए एक सामान्य तरबूज के समान है।
है, दो फाँक कर दे,
शब्दार्थ: फाँक ~ हिस्से या टुकड़े
व्याख्या: जिसे तुम चाहो तो अपनी शक्ति से दो टुकड़ों में चीर सकते हो।
चढ़ा दे स्वातंत्र्य-प्रभु पर अमर पानी!
शब्दार्थ: स्वातंत्र्य-प्रभु ~ स्वतंत्रता रूपी ईश्वर,
अमर पानी ~ सच्चा रक्त या बलिदान
व्याख्या: तुम स्वतंत्रता रूपी देवता के चरणों में अपने खून रूपी पवित्र जल को अर्पित कर दो।
विश्व माने-तू जवानी है, जवानी!
शब्दार्थ: विश्व माने ~ संसार स्वीकार करे
व्याख्या: जिससे यह पूरा संसार तुम्हारी शक्ति को देखे और मान ले कि तुम ही सच्ची जवानी हो।

जवानी की सार्थकता और दृढ़ संकल्प :
लाल चेहरा है नहीं
शब्दार्थ: लाल चेहरा ~ तेज या ओज से भरा मुख
व्याख्या: यदि तुम्हारे चेहरे पर वीरता का लाल तेज नहीं है।
फिर लाल किसके ?
शब्दार्थ: लाल ~ पुत्र
व्याख्या: तो तुम किस भारत माता के सच्चे सपूत कहलाने के योग्य हो।
लाल खून नहीं ?
शब्दार्थ: लाल खून ~ जोश और गर्मी से भरा रक्त
व्याख्या: यदि तुम्हारी रगों में जोश और उबाल से भरा लाल खून नहीं दौड़ रहा है।
अरे, कंकाल किसके ?
शब्दार्थ: कंकाल ~ हड्डियों का ढांचा
व्याख्या: तो तुम्हारा यह शरीर केवल एक हड्डियों का मृत ढांचा ही माना जाएगा।
प्रेरणा सोयी कि
शब्दार्थ: प्रेरणा ~ उत्साह या कुछ करने की भावना
व्याख्या: यदि तुम्हारे भीतर कुछ महान करने की भावना ही सो गई है।
आटा-दाल किसके ?
शब्दार्थ: आटा-दाल ~ साधारण भोजन या जीविका
व्याख्या: तो सिर्फ अपना पेट भरने और जीवित रहने का क्या मूल्य रह जाता है।
सिर न चढ़ पाया
शब्दार्थ: सिर न चढ़ पाया ~ बलिदान न हो सका
व्याख्या: यदि तुम्हारा सिर देश की वेदी पर बलिदान होने के लिए आगे नहीं आ सका।
कि छापा-माल किसके ?
शब्दार्थ: छापा-माल ~ दिखावटी श्रृंगार या तिलक
व्याख्या: तो तुम्हारे माथे पर लगा हुआ यह तिलक और दिखावटी श्रृंगार किस काम का है।
वेद की वाणी कि हो आकाशवाणी,
शब्दार्थ: वेद की वाणी ~ पवित्र ज्ञान, आकाशवाणी ~ दैवीय संदेश
व्याख्या: चाहे वह पवित्र वेदों का ज्ञान हो या देवताओं द्वारा दिया गया कोई संदेश हो।
धूल है जो जग नहीं पायी जवानी।
शब्दार्थ: धूल है ~ मिट्टी के समान व्यर्थ है
व्याख्या: वह सब कुछ मिट्टी के समान बेकार है, यदि वह सोई हुई जवानी को जगा न सके।
विश्व है असि का ?
शब्दार्थ: असि ~ तलवार या शक्ति
व्याख्या: क्या यह संसार केवल तलवार या शारीरिक शक्ति के बल पर चलता है।
नहीं संकल्प का है;
शब्दार्थ: संकल्प ~ दृढ़ निश्चय
व्याख्या: नहीं, यह संसार वास्तव में मनुष्यों के मजबूत और दृढ़ निश्चय से चलता है।
हर प्रलय का कोण,
शब्दार्थ: प्रलय ~ विनाश, कोण ~ दिशा या नजरिया
व्याख्या: दुनिया में आने वाले हर विनाश और बदलाव की दिशा।
काया-कल्प का है,
शब्दार्थ: काया-कल्प ~ पूरी तरह से स्वरूप बदल देना
व्याख्या: अंततः समाज के नव-निर्माण और उसे नया रूप देने का कारण बनती है।
फूल गिरते, शूल
शब्दार्थ: शूल ~ कांटे
व्याख्या: सुंदर फूल तो मुरझा कर गिर जाते हैं, लेकिन कठोर कांटे।
शिर ऊँचा लिए हैं;
शब्दार्थ: शिर ~ सिर
व्याख्या: हमेशा अपना सिर गर्व से ऊंचा किए हुए शाखाओं पर डटे रहते हैं।
रसों के अभिमान
शब्दार्थ: रसों ~ आनंद या कोमलता, अभिमान ~ गर्व
व्याख्या: वे कांटे फूलों के रस और कोमलता के घमंड को।
को नीरस किए हैं !
शब्दार्थ: नीरस ~ रसहीन या फीका
व्याख्या: अपनी कठोरता और संघर्ष से पूरी तरह फीका कर देते हैं।
खून हो जाए न तेरा देख, पानी!
शब्दार्थ: खून ~ रक्त, पानी ~ तेजहीन जल
व्याख्या: हे जवानी, सावधान रहना कि कहीं तुम्हारा यह खौलता हुआ खून ठंडा होकर पानी न बन जाए।
मरण का त्योहार, जीवन की जवानी।
शब्दार्थ: मरण का त्योहार ~ बलिदान का उत्सव
व्याख्या: क्योंकि जवानी का सच्चा अर्थ ही देश के लिए मृत्यु को एक उत्सव के रूप में मनाना है।
काव्य सौंदर्य :
* रस: वीर रस
* छंद: मुक्तक और प्रवाहमयी तुकांत शैली
* अलंकार: अनुप्रास, रूपक, और मानवीकरण अलंकार का सुंदर प्रयोग
* गुण: ओज गुण
* भाषा: सरल और प्रवाहपूर्ण खड़ी बोली हिंदी
केंद्रीय संदेश :
युवाओं को अपनी असीम शक्ति और उत्साह को पहचान कर मातृभूमि के लिए सर्वस्व न्योछावर करने के लिए सदैव तत्पर रहना चाहिए। सच्चा जीवन वही है जो देश और समाज के नव-निर्माण तथा कल्याण के काम आए।