तुलसीदास के पदों के प्रश्नोत्तर
प्रिय छात्र-छात्राओं यहाँ सभी प्रश्नों के उत्तर अत्यंत सरल भाषा में प्रस्तुत किए गए हैं। मुझे पूरी उम्मीद है कि आपको आसानी से समझ में आ जाएँगे। तो आइए, हम सब मिलकर चंद्रमा के समान अपने काव्य से संसार …


प्रिय छात्र-छात्राओं यहाँ सभी प्रश्नों के उत्तर अत्यंत सरल भाषा में प्रस्तुत किए गए हैं। मुझे पूरी उम्मीद है कि आपको आसानी से समझ में आ जाएँगे। तो आइए, हम सब मिलकर चंद्रमा के समान अपने काव्य से संसार को शीतलता प्रदान करने वाले महाकवि तुलसीदास जी के पदों के प्रश्नोत्तर का अभ्यास करें ...
I. निम्नलिखित प्रश्नों में सही विकल्प का चयन कीजिए -
1. तुलसीदास का जन्म स्थान है - (क) चित्रकूट
2. तुलसीदास को अन्य किस नाम से पुकारा जाता था - (क) रामबोला
3. तुलसीदास द्वारा रचित ग्रंथों में से कौन-सी रचना उनकी नहीं है - (घ) रामचंद्रिका
4. धनुष-भंग शीर्षक रामचरितमानस के किस कांड से संकलित है - (क) बालकांड से
5. खेलत मनसिज मीन जुग जनु विधु मंडल डोल में अलंकार है - (ग) उत्प्रेक्षा
6. वन पथ पर कविता किस छंद में लिखी गयी है - (ख) सवैया
7. तुलसीदास का पालन-पोषण किया था - (ख) नरहरिदास ने
II. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए -
1. राम को देखकर सीता की माता को क्या संदेह हुआ ?
उत्तर: राम को देखकर सीता की माता को यह संदेह हुआ कि जो मुनि विश्वामित्र अत्यंत कठोर शिव धनुष को तोड़ने के लिए इस सुकुमार और किशोर अवस्था वाले राम को आज्ञा दे रहे हैं, वह सर्वथा अनुचित है। उन्हें लगा कि जिस धनुष को रावण जैसे बड़े-बड़े योद्धा हिला तक नहीं सके, उसे यह कोमल बालक कैसे तोड़ पाएगा।
2. धनुष-भंग के प्रसंग में सीता की माता राम की सुकुमारता पर चिंता व्यक्त करते हुए अपनी सखियों क्या कहती हैं ? स्पास्ट कीजिए ?
उत्तर: धनुष-भंग के प्रसंग में सीता की माता राम की सुकुमारता पर चिंता व्यक्त करते हुए अपनी सखियों से कहती हैं कि ये मुनि विश्वामित्र भी कैसे हैं, जो इतने कोमल बालक को शिव का कठोर धनुष तोड़ने के लिए कह रहे हैं और कोई भी जाकर उन्हें समझाता क्यों नहीं है। वे तर्क देती हैं कि क्या कभी हंस का बच्चा मंदराचल पर्वत उठा सकता है।
3. राम ने धनुष उठाने के पूर्व मन ही मन किसे प्रणाम किया ?
उत्तर: राम ने धनुष उठाने के पूर्व मन ही मन अपने गुरु विश्वामित्र को प्रणाम किया।
4. राम द्वारा धनुष-भंग किए जाने के पूर्व लक्ष्मण पृथ्वी को डगमगाने से बचाने हेतु किस-किस को सावधान करते हैं ?
उत्तर: राम द्वारा धनुष-भंग किए जाने के पूर्व लक्ष्मण शेषनाग, कच्छप, वाराह और दिग्गज अर्थात् दिशाओं के रक्षक हाथियों को सावधान करते हैं कि वे पृथ्वी को मजबूती से पकड़ कर रखें ताकि राम के धनुष तोड़ते समय पृथ्वी डगमगाए नहीं।
5. राम को देखकर नगरवासी नर-नारियाँ सीता से क्या पूछती हैं ?
उत्तर: राम को देखकर नगरवासी नर-नारियाँ अर्थात् ग्रामीण स्त्रियाँ सीता जी से अत्यंत प्रेमपूर्वक पूछती हैं कि सांवले और सलोने रूप वाले ये सुकुमार आपके क्या लगते हैं।
प्रश्न: 6. वन-पथ पर कविता का सारांश लिखिए।
उत्तर: गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित सवैया 'वन-पथ पर' कवितावली के अयोध्या कांड से उद्धृत श्रीराम, सीता और लक्ष्मण के वनवास प्रस्थान का एक अत्यंत मार्मिक, मनोवैज्ञानिक और सजीव चित्रण है। यह कविता राजमहलों के वैभव में पली-बढ़ी सुकोमल सीता की वन-मार्ग पर होने वाली शारीरिक थकान, श्रीराम के मौन प्रेम और ग्रामीण स्त्रियों की सहज संवेदना को बड़ी ही सूक्ष्मता से प्रस्तुत करती है।
अयोध्या नगरी से वन की ओर निकलते ही सीता जी ने अभी कुछ ही कदम रखे थे कि उनके माथे पर पसीने की बूँदें छलक आईं और उनके कोमल होंठ सूख गए। अत्यधिक थकावट के कारण वह श्रीराम से व्याकुल होकर पूछती हैं कि अभी और कितनी दूर चलना है और पर्णकुटी (पत्तों की झोपड़ी) कहाँ बनानी है। अपनी पत्नी की यह दयनीय और थकी हुई स्थिति देखकर श्रीराम का हृदय द्रवित हो उठता है और उनकी आँखों में आँसू आ जाते हैं। सीता जी को कुछ देर विश्राम देने के उद्देश्य से, श्रीराम एक स्थान पर बैठ जाते हैं और अपने पैरों से कांटे निकालने लगते हैं ताकि इसी बहाने सीता जी को अधिक समय तक आराम मिल सके। अपने प्रियतम के इस अगाध प्रेम और गहरी फिक्र को देखकर सीता जी का मन पुलकित हो उठता है।
वन-मार्ग पर आगे बढ़ते हुए जब यह रूपवान त्रिमूर्ति ग्रामीण अंचलों से गुजरती है, तो वहाँ की स्त्रियां उनके अलौकिक सौंदर्य को देखकर मुग्ध हो जाती हैं। परंतु उनके वनवासी वेश और नंगे पैरों को देखकर ग्रामीणों का हृदय करुणा से भर उठता है। वे स्त्रियां अत्यंत क्षोभ के साथ आपस में चर्चा करती हैं कि रानी कैकेयी का हृदय वज्र से भी अधिक कठोर है और राजा दशरथ भी विवेकहीन हैं, जिन्होंने ऐसे सुंदर और सुकोमल लोगों को इस भयंकर जंगल में भटकने के लिए भेज दिया है, जो वास्तव में आँखों में बसाने योग्य हैं।
इसी बीच, ग्रामीण स्त्रियां अपनी स्वाभाविक जिज्ञासा और विनोद-भाव से सीता जी से पूछती हैं कि साँवले और सलोने रूप वाले वे आकर्षक पुरुष उनके क्या लगते हैं। मर्यादा और लज्जा की प्रतिमूर्ति सीता जी इस प्रश्न का उत्तर शब्दों में नहीं देतीं। वे अपनी तिरछी नज़रों, एक मधुर मुस्कान और सुंदर भाव-भंगिमा के माध्यम से बिना कुछ बोले ही ग्रामीण स्त्रियों को यह समझा देती हैं कि वे सांवले पुरुष उनके पति हैं। तुलसीदास जी ने इस अंतिम प्रसंग में सीता जी की बुद्धिमत्ता, नारी-सुलभ लज्जा और दांपत्य प्रेम की जिस मूक अभिव्यक्ति का वर्णन किया है, वह इस कविता को साहित्य का एक उत्कृष्ट अंश बना देता है।
प्रश्न: 7. तुलसीदास का साहित्यिक-परिचय देते हुए उनकी भाषा-शैली पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर: गोस्वामी तुलसीदास हिंदी साहित्य के भक्तिकाल की सगुण काव्यधारा की रामभक्ति शाखा के सर्वश्रेष्ठ कवि हैं। उन्होंने अपने काव्यों में अवधी और ब्रज दोनों भाषाओं का अत्यंत सुंदर प्रयोग किया है। रामचरितमानस में साहित्यिक अवधी तथा विनय पत्रिका में ब्रज भाषा का प्रयोग हुआ है। उनकी शैली में प्रबंध और मुक्तक दोनों का समन्वय देखने को मिलता है। उन्होंने दोहा, चौपाई, सवैया, कवित्त आदि छंदों का सफलतापूर्वक प्रयोग किया है। (तुलसीदास का जीवन परिचय देखे ...☝️)
प्रश्न: 8. तुलसीदास का संक्षिप्त जीवन-परिचय देते हुए उनकी किन्ही दो रचनाओं का नाम लिखिए।
उत्तर: गोस्वामी तुलसीदास जी का जन्म सन 1532 ईस्वी में उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के राजापुर गांव में हुआ था। इनके पिता का नाम आत्माराम दुबे और माता का नाम हुलसी था। बचपन में ही माता-पिता का साया उठ जाने के कारण इनका प्रारंभिक जीवन अत्यंत संघर्षमय रहा। इनके गुरु का नाम स्वामी नरहरिदास था। इनकी पत्नी का नाम रत्नावली था। सन 1623 ईस्वी में काशी में इनका निधन हो गया। इनकी दो प्रमुख रचनाएं रामचरितमानस और विनय पत्रिका हैं। (तुलसीदास का जीवन परिचय देखे ...☝️)
प्रश्न: 9. वन गमन पथ में जल हेतु लक्ष्मण के चले जाने पर राम ने क्या किया ?
उत्तर: वन गमन पथ में जब लक्ष्मण जल लेने गए, तब सीता जी की अत्यधिक थकान देखकर राम ने एक पेड़ की छाया में विश्राम किया और बहुत देर तक बैठकर पैरों से कांटे निकालते रहे ताकि उन्हें अधिक देर तक आराम मिल सके।
पद्यांश:
III. दिये गए पद्यांशों पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए -
(क) नृपन्ह केरि आसा निसि नासी। बचन लखट अवलीन प्रकासी।।
मानी महिप कुमुद सकुचाने। कपटी भूप उलूक लुकने।।
...........तोरहु रामु गनेश गोसाईं।।
(i)उपर्युक्त पद्यांश का संदर्भ लिखिए।
उत्तर: प्रस्तुत पद्यांश गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित श्रीरामचरितमानस के बालकांड से अवतरित है, जो हमारी पाठ्यपुस्तक में धनुष-भंग शीर्षक से संकलित है।
(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: श्री राम रूपी सूर्य को देखकर स्वयंवर में आए अभिमानी राजाओं की सीता से विवाह करने की आशा रूपी रात्रि नष्ट हो गई।जो राजा अब तक बड़ी-बड़ी डींगें हांक रहे थे, उनके वचन रूपी तारों के समूह का चमकना बंद हो गया और वे शांत हो गए।घमंडी राजा रूपी कुमुदनी के फूल हार के डर से मुरझा गए।जो छली और कपटी राजा थे, वे उल्लू की तरह श्री राम के तेज के सामने महफिल में छिपने लगे।
(iii) पद्यांश का काव्यगत सौन्दर्य स्पास्ट कीजिए।
उत्तर: इस पद्यांश में भाषा अवधी है। यहाँ श्रीराम की सुंदरता और उनकी चाल का मनोहारी चित्रण हुआ है। इसमें अनुप्रास, उपमा और रूपक अलंकार का सुंदर प्रयोग हुआ है। छंद दोहा और चौपाई है।
पद्यांश ख
सखि सब कौतुकु देखनिहारे..........
बोली चतुर सखी मृदु बानी। तेजवंत लघु गनिअ न रानी।।
कहँ कुंभज कहँ सिंधु अपारा। सोषेउ सुजसु सकल संसारा।।
..............उदय तासु त्रिभुवन तम भागा।।
प्रश्न: (i) उपर्युक्त पद्यांश का संदर्भ लिखिए।
उत्तर: प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक हिंदी के काव्य खंड में संकलित और गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित रामचरितमानस के बालकांड से अवतरित धनुष भंग शीर्षक से लिया गया है।
प्रश्न: (ii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: रानी की चिंता को दूर करते हुए चतुर सखी अत्यंत कोमल और मीठी वाणी में कहती है-
हे रानी! महान और शक्तिशाली पुरुषों को उनके आकार या कम उम्र के कारण कभी छोटा या कमज़ोर नहीं समझना चाहिए।
अपनी बात को और स्पष्ट करने के लिए सखी एक सटीक उदाहरण देते हुए आगे कहती है-
कहाँ घड़े से जन्म लेने वाले छोटे से आकार के मुनि अगस्त्य और कहाँ असीमित जल वाला वह विशाल और अथाह समुद्र! दोनों के आकार में कोई तुलना ही नहीं थी, फिर भी अगस्त्य मुनि ने अपने तेज और प्रभाव से उस विशाल समुद्र को एक ही बार में पी लिया था। उनके इस अद्भुत पराक्रम और यश को आज भी संपूर्ण संसार भली-भांति जानता है।
प्रश्न: (iii) सीताजी की माता अपनी सखियों से क्या कह रहीं हैं ?
उत्तर: सीता जी की माता अपनी सखियों से कह रही हैं कि सभी लोग केवल तमाशा देख रहे हैं, कोई भी विश्वामित्र को यह नहीं समझा रहा कि इतने कठोर शिव धनुष को तोड़ने का प्रयास इन सुकोमल बालकों के लिए उचित नहीं है।
IV. भाषा के रंग:
प्रश्न: 1. (क) उदित उदयगिरि मंच पर रघुबर बालपतंग। बिकसे संत सरोज सब हरषे लोचन भृंग।। पंक्ति में प्रयुक्त अलंकार का नामोल्लेख करते हुए स्पष्टीकरण दीजिए।
उत्तर: इस पंक्ति में रूपक अलंकार है। यहाँ उदयगिरि पर मंच का, रघुबर पर बाल सूर्य का, संतों पर कमल का और लोचनों पर भौंरों का अभेद आरोप किया गया है, इसलिए यह रूपक अलंकार का अत्यंत सुंदर उदाहरण है।
प्रश्न: 1. (ख) सुनि सुन्दर बैन सुधारस-साने, सयानी है जानकीं जानी भली। तिरछे करि नैन, दै सैन, तिन्हैं समुझाइ कछू मुसकाइ चली। पंक्ति में प्रयुक्त अलंकार का नामोल्लेख करते हुए स्पष्टीकरण दीजिए।
उत्तर: इस पंक्ति में अनुप्रास अलंकार है क्योंकि स और ज वर्णों की एक से अधिक बार आवृत्ति हुई है।
प्रश्न: 2. निम्नलिखित पदों का समास-विग्रह कीजिए तथा समास का नाम लिखिए। बालपतंग, राजकुँवर, त्रिभुवन, गजराज, पर्णकुटी, रामलखन।
उत्तर:
बालपतंग का समास विग्रह बाल रूपी पतंग यानी सूर्य होगा, यह कर्मधारय समास है।
राजकुँवर का समास विग्रह राजा का कुंवर होगा, यह तत्पुरुष समास है।
त्रिभुवन का समास विग्रह तीन भुवनों का समूह होगा, यह द्विगु समास है।
गजराज का समास विग्रह गजों का राजा होगा, यह तत्पुरुष समास है।
पर्णकुटी का समास विग्रह पर्ण यानी पत्तों से बनी कुटी होगा, यह तत्पुरुष समास है।
रामलखन का समास विग्रह राम और लखन होगा, यह द्वंद्व समास है।
प्रश्न: 3. धनुष-भंग एवं वन-पथ पर कविता में प्रयुक्त हुए निम्नलिखित सम्मोच्चरित भिन्नार्थक शब्दों का अर्थ लिखिए। विधि विधु, हरि हर, रव रवि, तून तन
उत्तर:
विधि का अर्थ विधाता या ब्रह्मा है और विधु का अर्थ चंद्रमा है।
हरि का अर्थ विष्णु है और हर का अर्थ महादेव या शिव है।
रव का अर्थ ध्वनि या शोर है और रवि का अर्थ सूर्य है।
तून का अर्थ तरकश है जिसमें बाण रखे जाते हैं और तन का अर्थ शरीर है।
प्रश्न: 4. जड़ता, गुरुता, गरुआई, मुसकाइ - इन शब्दों में प्रत्यय की पहचान कीजिए तथा उस प्रत्यय से बनने वाले दो अन्य शब्दों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
जड़ता शब्द में ता प्रत्यय है। इससे बनने वाले अन्य शब्द- सुंदरता और मूर्खता हैं।
गुरुता शब्द में भी ता प्रत्यय है। इससे बनने वाले अन्य शब्द- लघुता और महानता हैं।
गरुआई शब्द में आई प्रत्यय है। इससे बनने वाले अन्य शब्द- भलाई और चतुराई हैं।
मुसकाइ शब्द में आइ प्रत्यय है। इससे बनने वाले अन्य शब्द- लिखाई और पढ़ाई हैं।
v - अनुभूति और अभिव्यक्ति:
प्रश्न: 1. कैकेयी द्वारा राम के वनवास की घोर लोक-निंदा हुई। आपकी दृष्टि में कैकेयी का यह कृत्य कहाँ तक उचित था ? विचार कीजिए।
उत्तर: मेरी दृष्टि में कैकेयी का यह कृत्य सर्वथा अनुचित था। राम उनके अपने पुत्र भरत के भी अत्यंत प्रिय थे और संपूर्ण प्रजा भी राम को ही राजा के रूप में देखना चाहती थी। केवल अपने निजी स्वार्थ और मंथरा के बहकावे में आकर परिवार और राज्य को संकट में डालना एक माता और रानी के रूप में उनका पूर्णतया गलत निर्णय था। इसी कारण उन्हें घोर लोक निंदा का सामना करना पड़ा।
प्रश्न: 2. राम ने गुरुओं एवं मुनियों (श्रेष्ठजन) के प्रति जो शिष्टाचार व आदरभाव प्रकट किया उसका आजकल के बच्चों में समावेश कितना आवश्यक है ? विचार प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर: राम ने गुरुओं और मुनियों के प्रति जिस प्रकार का विनम्र आदरभाव और आज्ञाकारिता दिखाई, वह आज के समय में भी अत्यंत प्रासंगिक है। आज के बच्चों में इस शिष्टाचार का समावेश होना बहुत ही आवश्यक है क्योंकि इससे उनमें बड़ों का सम्मान करने, अनुशासन में रहने और उच्च नैतिक मूल्यों को अपनाने की भावना विकसित होती है। यह समाज में सकारात्मकता और एक आदर्श चरित्र के निर्माण के लिए अति आवश्यक है।