तृतीय: पाठ: प्रश्नोत्तर
I. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संस्कृत में लिखिए : 1. प्रश्न: वाराणसी कस्याः नद्याः कूले स्थिता अस्ति ? अथवा वाराणसी नगरी कुत्र स्थिता अस्ति ? उत्तर: वाराणसी विमलसलिलतरङ्गायाः गङ्गायाः कूले स्थि…


I. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संस्कृत में लिखिए :
1. प्रश्न: वाराणसी कस्याः नद्याः कूले स्थिता अस्ति ? अथवा वाराणसी नगरी कुत्र स्थिता अस्ति ?
उत्तर: वाराणसी विमलसलिलतरङ्गायाः गङ्गायाः कूले स्थिता अस्ति।
2. प्रश्न: वाराणस्याः घट्टानां शोभां विलोक्य के बहु प्रशंसन्ति ?
उत्तर: अगणिताः पर्यटकाः सुदूरेभ्यः देशेभ्यः अत्रागत्य वाराणस्याः घट्टानां शोभां विलोक्य इमां बहु प्रशंसन्ति।
3. प्रश्न: वाराणस्यां नगर्यां कति विश्वविद्यालयाः सन्ति ?
उत्तर: वाराणस्यां नगर्यां त्रयः विश्वविद्यालयाः सन्ति।
4. प्रश्न: का नगरी भारतीयसंस्कृतेः संस्कृतभाषायाः च केन्द्रस्थलम् अस्ति ?
उत्तर: वाराणसी नगरी भारतीयसंस्कृतेः संस्कृतभाषायाः च केन्द्रस्थलम् अस्ति।
5. प्रश्न: मुगलयुवराजः दाराशिकोहः कुत्र गत्वा भारतीयदर्शनशास्त्राणाम् अध्ययनम् अकरोत् ?
उत्तर: मुगलयुवराजः दाराशिकोहः वाराणसीं गत्वा भारतीयदर्शनशास्त्राणाम् अध्ययनम् अकरोत्।
6. प्रश्न: कः मुगलयुवराजः उपनिषदाम् अनुवादः पारसीभाषायां कारितः ?
उत्तर: दाराशिकोहः इति मुगलयुवराजः उपनिषदाम् अनुवादं पारसीभाषायां कारितवान्।
7. प्रश्न: वाराणसी केषां संगमस्थली अस्ति ?
उत्तर: वाराणसी विविधधर्माणां संगमस्थली अस्ति।
8. प्रश्न: कुत्रत्याः कौशेयशाटिकाः देशे देशे सर्वत्र स्पृह्यन्ते ?
उत्तर: वाराणस्याः कौशेयशाटिकाः देशे देशे सर्वत्र स्पृह्यन्ते।
9. प्रश्न: वाराणसी नगरी किमर्थं प्रसिद्धा ?
उत्तर: वाराणसी नगरी विद्यायाः, दर्शनस्य, साहित्यस्य, धर्मस्य, कलानां शिल्पानां च कृते प्रसिद्धा अस्ति।
10. प्रश्न: मरणं मङ्गलं कुत्र भवति ?
उत्तर: वाराणस्यां मरणं मङ्गलं भवति।
II. अनुवादात्मक प्रश्न :
निम्नलिखित संस्कृत गद्यांशों का हिन्दी भाषा में सन्दर्भ सहित अनुवाद कीजिए -
सन्दर्भ: प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक के वाराणसी नामक पाठ से अवतरित हैं।
क. वाराणसी सुविख्याता से लेकर.... इमां बहु प्रशंसन्ति तक।
अनुवाद: वाराणसी एक बहुत प्रसिद्ध और प्राचीन नगरी है। यह स्वच्छ जल की लहरों वाली गंगा नदी के किनारे स्थित है। इसके घाटों की घुमावदार कतार सफेद चांदनी में बहुत ही सुंदर लगती है। अनगिनत यात्री बहुत दूर-दूर के देशों से रोज यहाँ आते हैं, और इसके घाटों की सुंदरता को देखकर इसकी बहुत प्रशंसा करते हैं।
ख. वाराणस्यां प्राचीनकालादेव से लेकर..... विद्यां गृह्णन्ति तक।
अनुवाद: वाराणसी में पुराने समय से ही घर-घर में विद्या का अलौकिक प्रकाश चमक रहा है। आज भी यहाँ संस्कृत वाणी की धारा लगातार बहती है, और लोगों के ज्ञान को बढ़ाती है। केवल भारतीय ही नहीं बल्कि विदेशी लोग भी देववाणी संस्कृत का अध्ययन करने के लिए यहाँ आते हैं, और मुफ्त में विद्या ग्रहण करते हैं।
ग. अत्र अनेके आचार्याः से लेकर..... अध्ययनं प्रचलति तक।
अनुवाद: यहाँ बहुत से श्रेष्ठ आचार्य और विद्वान वैदिक साहित्य को पढ़ने और पढ़ाने में आज भी लगे हुए हैं। यहाँ हिन्दू विश्वविद्यालय, संस्कृत विश्वविद्यालय और काशी विद्यापीठ, ये तीन विश्वविद्यालय हैं, जिनमें नए और पुराने ज्ञान-विज्ञान के विषयों की पढ़ाई चलती है।
घ. एषा नगरी से लेकर..... पारसीभाषायां कारितः तक।
अनुवाद: यह नगरी भारतीय संस्कृति और संस्कृत भाषा का मुख्य केंद्र है। यहीं से ही संस्कृत साहित्य और संस्कृति का प्रकाश सब जगह फैला है। मुगलों के युवराज दाराशिकोह ने यहाँ आकर भारतीय दर्शन और शास्त्रों का अध्ययन किया था। वह उनके ज्ञान से इतना अधिक प्रभावित हुआ कि उसने उपनिषदों का अनुवाद फारसी भाषा में करवाया।
ङ. इयं नगरी से लेकर..... सर्वत्र स्पृह्यन्ते तक।
अनुवाद: यह नगरी अनेक धर्मों के मिलन का स्थान है। महात्मा बुद्ध, तीर्थंकर पार्श्वनाथ, शंकराचार्य, कबीर, गोस्वामी तुलसीदास और अन्य बहुत से महात्माओं ने यहाँ आकर अपने विचारों का प्रचार किया। केवल दर्शन, साहित्य और धर्म के क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि कला के क्षेत्र में भी यह नगरी अनेक कलाओं और शिल्पों के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। यहाँ की रेशमी साड़ियाँ हर देश में सब जगह बहुत पसंद की जाती हैं।
च. मङ्गलं मरणम् से लेकर..... केन मीयते तक।
अनुवाद: जहाँ मरना भी कल्याणकारी माना जाता है, जहाँ शरीर पर भस्म लगाना ही आभूषण है, और जहाँ की लंगोट भी रेशमी वस्त्र के समान कीमती है, उस काशी की तुलना भला किससे की जा सकती है अर्थात काशी अतुलनीय है।
III. भाषा के रंग :
1. निम्नलिखित शब्दों में विग्रह सहित समास को स्पष्ट कीजिए -
विमलसलिलतरङ्गायाः : विमलानि सलिलानि येषु ते तरङ्गाः, तेषां समाहारः यस्याः सा, तस्याः। इसमें बहुव्रीहि समास है।
गीर्वाणवाण्याः : गीर्वाणानां वाणी, तस्याः। इसमें षष्ठी तत्पुरुष समास है।
ज्ञानविज्ञानविषयाणाम् : ज्ञानं च विज्ञानं च तयोः विषयाः, तेषाम्। इसमें द्वन्द्व तथा षष्ठी तत्पुरुष समास का योग है।
कौशेयशाटिकाः : कौशेयाः च ताः शाटिकाः। इसमें कर्मधारय समास है।
2. मङ्गलं मरणं यत्र श्लोक को कण्ठस्थ करने का अभ्यास छात्र स्वयं करें।
IV. अनुभूति और अभिव्यक्ति :
i. वाराणसी पाठ के आधार पर उसके महत्त्व को प्रतिपादित करने वाले तथ्यों को रेखांकित कीजिए।
उत्तर: पाठ के आधार पर वाराणसी का महत्त्व इन बातों से सिद्ध होता है कि यह भारतीय संस्कृति और संस्कृत भाषा का सबसे प्रमुख केंद्र है। प्राचीन काल से ही यह शिक्षा और विद्या का धाम रहा है जहाँ विश्वभर से लोग ज्ञान प्राप्त करने आते हैं। यह विविध धर्मों और विचारों की संगमस्थली है। शिक्षा और अध्यात्म के अतिरिक्त यह नगरी अपनी विशिष्ट कलाओं, रेशमी वस्त्रों और पत्थर की मूर्तियों के लिए भी संपूर्ण विश्व में विख्यात है। यहाँ मृत्यु को भी कल्याणकारी माना जाता है जो इसके गहरे आध्यात्मिक महत्त्व को दर्शाता है।
ii. प्रस्तुत पाठ के आधार पर वाराणसी में संस्कृत भाषा के लिए किये जाने वाले कार्यों की एक सूची तैयार कीजिए।
उत्तर: पाठ के अनुसार वाराणसी में संस्कृत भाषा के संरक्षण और प्रसार के लिए निरंतर कार्य हो रहे हैं। यहाँ घर-घर में विद्या का प्रकाश फैला है और आज भी संस्कृत की अविरल धारा बहकर लोगों का ज्ञानवर्द्धन कर रही है। अनेक मूर्धन्य विद्वान और आचार्य आज भी वैदिक वाङ्मय के पठन और पाठन में पूरे समर्पण के साथ लगे हुए हैं। केवल स्वदेशी ही नहीं अपितु विदेशी विद्यार्थी भी यहाँ आकर देववाणी संस्कृत का निःशुल्क अध्ययन करते हैं। संस्कृत के उच्च अध्ययन के लिए यहाँ संस्कृत विश्वविद्यालय भी स्थापित है।