तृतीयः पाठः वाराणसी
संस्कृत पंक्ति: वाराणसी सुविख्याता प्राचीना नगरी। शब्दार्थ: सुविख्याता = बहुत प्रसिद्ध; प्राचीना = पुरानी; नगरी = शहर या नगर। अनुवाद: वाराणसी एक बहुत प्रसिद्ध और प्राचीन नगरी है। संस्कृत पंक्ति: इयं …


संस्कृत पंक्ति: वाराणसी सुविख्याता प्राचीना नगरी।
शब्दार्थ: सुविख्याता = बहुत प्रसिद्ध; प्राचीना = पुरानी; नगरी = शहर या नगर।
अनुवाद: वाराणसी एक बहुत प्रसिद्ध और प्राचीन नगरी है।
संस्कृत पंक्ति: इयं विमलसलिलतरङ्गायाः गङ्गायाः कूले स्थिता।
शब्दार्थ: इयं = यह; विमलसलिलतरङ्गायाः = स्वच्छ जल की लहरों वाली; कूले = किनारे पर; स्थिता = स्थित है।
अनुवाद: यह स्वच्छ जल की लहरों वाली गंगा नदी के किनारे स्थित है।
संस्कृत पंक्ति: अस्याः घट्टानां वलयाकृतिः पंक्तिः धवलायां चन्द्रिकायां बहु राजते।
शब्दार्थ: अस्याः = इसके; घट्टानां = घाटों की; वलयाकृतिः = घुमावदार आकार वाली; पंक्तिः = कतार; धवलायां = सफेद या उजली; चन्द्रिकायां = चांदनी में; बहु = बहुत; राजते = सुंदर लगती है।
अनुवाद: इसके घाटों की घुमावदार कतार सफेद चांदनी में बहुत ही सुंदर लगती है।
संस्कृत पंक्ति: अगणिताः पर्यटकाः सुदूरेभ्यः देशेभ्यः नित्यम् अत्र आयान्ति, अस्याः घट्टानाञ्च शोभां विलोक्य इमां बहु प्रशंसन्ति।
शब्दार्थ: अगणिताः = अनगिनत; पर्यटकाः = घूमने वाले यात्री; सुदूरेभ्यः = बहुत दूर; देशेभ्यः = देशों से; नित्यम् = रोज; अत्र = यहाँ; आयान्ति = आते हैं; घट्टानाञ्च = और घाटों की; शोभां = सुंदरता को; विलोक्य = देखकर; इमां = इसकी; बहु = बहुत; प्रशंसन्ति = प्रशंसा करते हैं।
अनुवाद: अनगिनत यात्री बहुत दूर-दूर के देशों से रोज यहाँ आते हैं, और इसके घाटों की सुंदरता को देखकर इसकी बहुत प्रशंसा करते हैं।
संस्कृत पंक्ति: वाराणस्यां प्राचीनकालादेव गेहे गेहे विद्यायाः दिव्यं ज्योतिः द्योतते।
शब्दार्थ: वाराणस्यां = वाराणसी में; प्राचीनकालादेव = पुराने समय से ही; गेहे गेहे = घर-घर में; विद्यायाः = विद्या की; दिव्यं = अलौकिक; ज्योतिः = प्रकाश; द्योतते = चमक रहा है।
अनुवाद: वाराणसी में पुराने समय से ही घर-घर में विद्या का अलौकिक प्रकाश चमक रहा है।
संस्कृत पंक्ति: अधुनाऽपि अत्र संस्कृतवाग्धारा सततं प्रवहति, जनानां ज्ञानञ्च वर्द्धयति।
शब्दार्थ: अधुनाऽपि = आज भी; अत्र = यहाँ; संस्कृतवाग्धारा = संस्कृत वाणी की धारा; सततं = लगातार; प्रवहति = बहती है; जनानां = लोगों के; ज्ञानञ्च = और ज्ञान को; वर्द्धयति = बढ़ाती है।
अनुवाद: आज भी यहाँ संस्कृत वाणी की धारा लगातार बहती है, और लोगों के ज्ञान को बढ़ाती है।
संस्कृत पंक्ति: अत्र अनेके आचार्याः मूर्धन्याः विद्वांसः वैदिकवाङ्मयस्य अध्ययने अध्यापने च इदानीं निरताः।
शब्दार्थ: अत्र = यहाँ; अनेके = बहुत से; आचार्याः = आचार्य; मूर्धन्याः = उच्च कोटि के; विद्वांसः = विद्वान; वैदिकवाङ्मयस्य = वैदिक साहित्य के; अध्ययने = पढ़ने में; अध्यापने च = और पढ़ाने में; इदानीं = इस समय भी; निरताः = लगे हुए हैं।
अनुवाद: यहाँ बहुत से श्रेष्ठ आचार्य और विद्वान वैदिक साहित्य को पढ़ने और पढ़ाने में आज भी लगे हुए हैं।
संस्कृत पंक्ति: न केवलं भारतीयाः अपितु वैदेशिकाः गीर्वाणवाण्याः अध्ययनाय अत्र आगच्छन्ति, निःशुल्कं च विद्यां गृह्णन्ति।
शब्दार्थ: अपितु = बल्कि; वैदेशिकाः = विदेशी लोग; गीर्वाणवाण्याः = देववाणी संस्कृत के; अध्ययनाय = पढ़ने के लिए; आगच्छन्ति = आते हैं; निःशुल्कं = बिना फीस के या मुफ्त; गृह्णन्ति = ग्रहण करते हैं।
अनुवाद: केवल भारतीय ही नहीं बल्कि विदेशी लोग भी देववाणी संस्कृत का अध्ययन करने के लिए यहाँ आते हैं, और मुफ्त में विद्या ग्रहण करते हैं।
संस्कृत पंक्ति: अत्र हिन्दूविश्वविद्यालयः, संस्कृतविश्वविद्यालयः, काशीविद्यापीठम् इत्येते त्रयः विश्वविद्यालयाः सन्ति, येषु नवीनानां प्राचीनानाञ्च ज्ञानविज्ञानविषयाणाम् अध्ययनं प्रचलति।
शब्दार्थ: इत्येते = ये; त्रयः = तीन; सन्ति = हैं; येषु = जिनमें; नवीनानां = नए; प्राचीनानाञ्च = और पुराने; प्रचलति = चलता है।
अनुवाद: यहाँ हिन्दू विश्वविद्यालय, संस्कृत विश्वविद्यालय और काशी विद्यापीठ, ये तीन विश्वविद्यालय हैं, जिनमें नए और पुराने ज्ञान-विज्ञान के विषयों की पढ़ाई चलती है।
संस्कृत पंक्ति: एषा नगरी भारतीयसंस्कृतेः संस्कृतभाषायाश्च केन्द्रस्थलम् अस्ति।
शब्दार्थ: एषा = यह; भारतीयसंस्कृतेः = भारतीय संस्कृति का; संस्कृतभाषायाश्च = और संस्कृत भाषा का; केन्द्रस्थलम् = मुख्य स्थान; अस्ति = है।
अनुवाद: यह नगरी भारतीय संस्कृति और संस्कृत भाषा का मुख्य केंद्र है।
संस्कृत पंक्ति: इत एव संस्कृतवाङ्मयस्य संस्कृतेश्च आलोकः सर्वत्र प्रसृतः।
शब्दार्थ: इत एव = यहीं से ही; संस्कृतवाङ्मयस्य = संस्कृत साहित्य का; संस्कृतेश्च = और संस्कृति का; आलोकः = प्रकाश; सर्वत्र = सब जगह; प्रसृतः = फैला है।
अनुवाद: यहीं से ही संस्कृत साहित्य और संस्कृति का प्रकाश सब जगह फैला है।
संस्कृत पंक्ति: मुगलयुवराजः दाराशिकोहः अत्रागत्य भारतीय-दर्शन-शास्त्राणाम् अध्ययनम् अकरोत्।
शब्दार्थ: अत्रागत्य = यहाँ आकर; अध्ययनम् अकरोत् = अध्ययन किया था या पढ़ाई की थी।
अनुवाद: मुगलों के युवराज दाराशिकोह ने यहाँ आकर भारतीय दर्शन और शास्त्रों का अध्ययन किया था।
संस्कृत पंक्ति: स तेषां ज्ञानेन तथा प्रभावितः अभवत्, यत् तेन उपनिषदाम् अनुवादः पारसीभाषायां कारितः।
शब्दार्थ: स = वह; तेषां = उनके; ज्ञानेन = ज्ञान से; तथा = इतना; प्रभावितः अभवत् = प्रभावित हुआ; यत् = कि; तेन = उसने; उपनिषदाम् = उपनिषदों का; कारितः = करवाया।
अनुवाद: वह उनके ज्ञान से इतना अधिक प्रभावित हुआ कि उसने उपनिषदों का अनुवाद फारसी भाषा में करवाया।
संस्कृत पंक्ति: इयं नगरी विविधधर्माणां संगमस्थली।
शब्दार्थ: इयं = यह; विविधधर्माणां = अनेक धर्मों की; संगमस्थली = मिलन का स्थान।
अनुवाद: यह नगरी अनेक धर्मों के मिलन का स्थान है।
संस्कृत पंक्ति: महात्मा बुद्धः, तीर्थङ्करः पार्श्वनाथः, शङ्कराचार्यः, कबीरः, गोस्वामी तुलसीदासः, अन्ये च बहवः महात्मानः अत्रागत्य स्वीयान् विचारान् प्रासारयन्।
शब्दार्थ: अन्ये च बहवः = और अन्य बहुत से; अत्रागत्य = यहाँ आकर; स्वीयान् = अपने; विचारान् = विचारों को; प्रासारयन् = फैलाया या प्रचार किया।
अनुवाद: महात्मा बुद्ध, तीर्थंकर पार्श्वनाथ, शंकराचार्य, कबीर, गोस्वामी तुलसीदास और अन्य बहुत से महात्माओं ने यहाँ आकर अपने विचारों का प्रचार किया।
संस्कृत पंक्ति: न केवलं दर्शने, साहित्ये, धर्मे, अपितु कलाक्षेत्रेऽपि इयं नगरी विविधानां कलानां, शिल्पानाञ्च कृते लोके विश्रुता।
शब्दार्थ: दर्शने = दर्शन में; साहित्ये = साहित्य में; धर्मे = धर्म में; अपितु = बल्कि; कलाक्षेत्रेऽपि = कला के क्षेत्र में भी; विविधानां = अनेक प्रकार की; कलानां = कलाओं; शिल्पानाञ्च = और शिल्पों के; कृते = लिए; लोके = संसार में; विश्रुता = प्रसिद्ध है।
अनुवाद: केवल दर्शन, साहित्य और धर्म के क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि कला के क्षेत्र में भी यह नगरी अनेक कलाओं और शिल्पों के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है।
संस्कृत पंक्ति: अत्रत्याः कौशेयशाटिकाः देशे देशे सर्वत्र स्पृह्यन्ते।
शब्दार्थ: अत्रत्याः = यहाँ की; कौशेयशाटिकाः = रेशमी साड़ियाँ; देशे देशे = हर देश में; सर्वत्र = सब जगह; स्पृह्यन्ते = पसंद की जाती हैं या चाही जाती हैं।
अनुवाद: यहाँ की रेशमी साड़ियाँ हर देश में सब जगह बहुत पसंद की जाती हैं।
संस्कृत पंक्ति: अत्रत्याः प्रस्तरमूर्तयः प्रथिताः।
शब्दार्थ: अत्रत्याः = यहाँ की; प्रस्तरमूर्तयः = पत्थर की मूर्तियाँ; प्रथिताः = प्रसिद्ध हैं।
अनुवाद: यहाँ की पत्थर की मूर्तियाँ भी बहुत प्रसिद्ध हैं।
संस्कृत पंक्ति: इयं निजां प्राचीनपरम्पराम् इदानीमपि परिपालयति-तथैव गीयते कविभिः –
शब्दार्थ: निजां = अपनी; प्राचीनपरम्पराम् = पुरानी परंपरा का; इदानीमपि = आज भी; परिपालयति = पालन करती है; तथैव = उसी प्रकार; गीयते = गाया जाता है; कविभिः = कवियों के द्वारा।
अनुवाद: यह नगरी अपनी पुरानी परंपरा का आज भी पूरी तरह पालन करती है, इसीलिए कवियों द्वारा यह गाया जाता है –
संस्कृत पंक्ति: मङ्गलं मरणं यत्र विभूतिर्यत्र भूषणम्। कौपीनं यत्र कौशेयं काशी केन मीयते।।
शब्दार्थ: मङ्गलं = शुभ या कल्याणकारी; मरणं = मरना; यत्र = जहाँ; विभूतिर्यत्र = जहाँ शरीर पर लगाई जाने वाली राख या भस्म; भूषणम् = आभूषण या गहना है; कौपीनं = लंगोट; कौशेयं = रेशमी वस्त्र; काशी = वाराणसी; केन = किसके द्वारा; मीयते = मापी जा सकती है या तुलना की जा सकती है।
अनुवाद: जहाँ मरना भी कल्याणकारी माना जाता है, जहाँ शरीर पर भस्म लगाना ही आभूषण है, और जहाँ की लंगोट भी रेशमी वस्त्र के समान कीमती है, उस काशी की तुलना भला किससे की जा सकती है अर्थात काशी अतुलनीय है।