धानों के गीत के प्रश्नोत्तर
कुछ करने को: प्रश्न 1: विद्यालय जायेंगे जरूर पंक्ति को आधार बनाकर चार पंक्तियों वाली कविता की रचना कीजिए। उत्तर: ज्ञान का दीप हम सब जलाएंगे, पढ़ लिखकर हम भी आगे बढ़ेंगे, जीवन की बाधाओं से कभी नहीं डरे…


कुछ करने को:
प्रश्न 1: विद्यालय जायेंगे जरूर पंक्ति को आधार बनाकर चार पंक्तियों वाली कविता की रचना कीजिए।
उत्तर:
ज्ञान का दीप हम सब जलाएंगे,
पढ़ लिखकर हम भी आगे बढ़ेंगे,
जीवन की बाधाओं से कभी नहीं डरेंगे,
हम सब विद्यालय जायेंगे जरूर।
विचार और कल्पना:
प्रश्न: किन नक्षत्रों में वर्षा अधिक होती है?
उत्तर: भारतीय ज्योतिष और पंचांग विद्या के अनुसार वर्षा ऋतु में मुख्य रूप से आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, अश्लेषा, मघा, पूर्वा फाल्गुनी, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, चित्रा और स्वाति नक्षत्रों में सबसे अधिक वर्षा होती है। इनमें से मघा और हस्त नक्षत्र में होने वाली वर्षा धान की खेती के लिए अत्यंत लाभकारी और प्राणदायिनी मानी जाती है।
गीत से:
प्रश्न 1: बादल का स्वागत कौन कौन और कब कब कर रहे हैं?
उत्तर: बादल का स्वागत गाँव की सूनी पगडंडियां और जंगल में झुके हुए बेंत के पौधे निरंतर कर रहे हैं। समय के अनुसार शाम के वक्त किसान की उम्मीद भरी आँखें, भोर होने पर धान के हरे भरे खेत, धूप ढलने पर तुलसी के सुगंधित वन, शाम घिरने पर कनेर के पीले फूल, पूजा के समय ज्वार की बालियां और संध्या के समय घरों में दीप जलने की वेला में धान के खेत बादलों का उत्साहपूर्वक स्वागत कर रहे हैं।
प्रश्न 2: पंक्तियों के भावार्थ स्पष्ट कीजिए
क. चंदा को बाँधेंगे कच्ची कलगीयों, सूरज को सूखी रेत में।
उत्तर: यहाँ किसान अत्यंत आनंदित होकर यह सुंदर कल्पना करता है कि जब धान के पौधे थोड़े बड़े होंगे तो उनकी कोमल और कच्ची बालियों में रात के समय चंद्रमा की सफेद शीतल रोशनी उलझी हुई सी प्रतीत होगी और दिन के समय खेतों की सूखी बालू में सूरज की सुनहरी किरणें खेलती हुई अत्यंत मनोरम नजर आएंगी।
ख. संझा पुकारेंगी गीली अँखड़ियाँ, भोर हुए धन खेत।
उत्तर: इस पंक्ति का भाव यह है कि शाम के समय किसान अपनी नमी युक्त और आशा भरी आँखों से आसमान की ओर देखकर बादलों को जल बरसाने के लिए पुकारेगा और सुबह होते ही धान के खेत भी व्याकुल होकर वर्षा के लिए बादलों की प्रतीक्षा करेंगे।
ग. पूजा की बेला में ज्वार झरेंगे, धान दिये की बेर।
उत्तर: यहाँ कवि स्पष्ट करते हैं कि संध्या वंदन के पवित्र समय में ज्वार के पौधे हवा में लहराकर अपनी खुशी और ईश्वर के प्रति भक्ति प्रकट करेंगे तथा शाम को जब घरों में दीया जलाने का समय होगा तब धान के खेत भी उसी धुंधली रोशनी में बादलों की राह देखेंगे।
प्रश्न 3: धान को प्राण क्यों कहा गया है समझाकर लिखिए।
उत्तर: एक किसान के लिए उसकी फसल ही उसके जीवन का मुख्य आधार और आजीविका का एकमात्र साधन होती है। धान की उपज से ही उसके पूरे परिवार का भरण पोषण होता है और उसके जीवन की समस्त भविष्य की उम्मीदें इसी फसल पर टिकी होती हैं। यदि फसल अच्छी न हो तो किसान का जीवन गहरे संकट से घिर जाता है। इसलिए धान केवल अनाज नहीं है, बल्कि उसे किसान के स्वयं के प्राणों के समान बहुमूल्य और अभिन्न माना गया है।
प्रश्न 4: उगेंगे काँपेंगे और पकेंगे से क्या आशय है स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: इन तीनों शब्दों में किसान की जीवन यात्रा और उसकी भावनाओं का विकास छिपा है। उगेंगे शब्द का आशय बीज से नए पौधों के उत्पन्न होने से है जो किसान के मन में नवजीवन और नई आशा का संचार करता है। काँपेंगे शब्द हवा के चलने पर धान के पौधों के आनंदित होकर लहराने को दर्शाता है जो किसान के हृदय की खुशी और उमंग का प्रतीक है। पकेंगे शब्द का अर्थ फसल के पूर्ण रूप से पककर तैयार हो जाने से है जो किसान की वर्ष भर की कठोर तपस्या के सफल होने और उसे मिलने वाली अंतिम संतुष्टि व परम आनंद को व्यक्त करता है।
भाषा की बात:
प्रश्न 1: कविता में मानवीकरण के अन्य उदाहरण ढूँढ़कर लिखिए।
उत्तर: इस कविता में प्रकृति को सजीव मानव की तरह चित्रित करते हुए मानवीकरण अलंकार के कई अन्य सुंदर उदाहरण प्रस्तुत किए गए हैं। जैसे, आगे पुकारेगी सूनी डगरिया, पीछे झुके वन बेंत तथा भोर हुए धन खेत। इन सभी पंक्तियों में निर्जीव प्राकृतिक वस्तुओं जैसे सुनसान रास्तों, पेड़ पौधों और खेतों को इंसानों की तरह पुकारते हुए, झुककर वंदना करते हुए और बेताबी से इंतजार करते हुए दर्शाया गया है।
प्रश्न 2: कविता में आए अन्य तद्भव शब्दों को छाँटिए और उनका तत्सम रूप लिखिए।
उत्तर: कविता में ग्रामीण परिवेश को दर्शाने के लिए कई तद्भव शब्दों का प्रयोग किया गया है, जिनके शुद्ध तत्सम रूप इस प्रकार हैं। सूरज का तत्सम रूप सूर्य है। संझा का तत्सम रूप संध्या है। बेर का तत्सम रूप वेला है। दीया का तत्सम रूप दीप है। साँझ का तत्सम रूप संध्या है।
विशेष:
संस्कृत भाषा के वे शब्द जो, हूबहू हिन्दी मे प्रयोग किए जाते हैं, उन्हे तत्सम कहते हैं।
जहाँ काव्य में जड़ पदार्थों, प्रकृति के अंगों या निर्जीव वस्तुओं पर मानवीय भावनाओं, या क्रियाओं का आरोप किया जाता है, वहाँ मानवीकरण अलंकार होता है।