नई कविता
सरल शब्दों में कहें तो 'नई कविता' आज़ादी के बाद सन् 1953 से अब तक लिखी गई कविता है। जब हमारा देश आज़ाद हुआ, तो लोगों ने सोचा था कि अब सब कुछ अच्छा हो जाएगा, गरीबी दूर हो जाएगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। आम इं…


सरल शब्दों में कहें तो 'नई कविता' आज़ादी के बाद सन् 1953 से अब तक लिखी गई कविता है। जब हमारा देश आज़ाद हुआ, तो लोगों ने सोचा था कि अब सब कुछ अच्छा हो जाएगा, गरीबी दूर हो जाएगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। आम इंसान की जिंदगी में संघर्ष, महँगाई और मुश्किलें वैसी ही रहीं। जब कवियों ने आम आदमी के इस दर्द और उसके अकेलेपन को देखा, तो उन्होंने बिल्कुल सीधे और नए तरीके से कविताएँ लिखना शुरू किया। इसी को 'नई कविता' कहा गया। यह कविता किसी राजा, भगवान या अमीर की नहीं, बल्कि हम और आप जैसे आम आदमी की कहानी है।
यह कविता न तो छायावाद की तरह हवा में उड़ती है और न ही द्विवेदी युग की तरह उपदेश देती और न ही प्रयोगवाद की तरह नये –नये शब्दों , नये प्रतीक व नए प्रयोगों की तरह कठिन है। यह तो आज के आम इंसान के सुख-दुख, उसकी नौकरी, उसके अकेलेपन और उसके सीधे-साधे जीवन का सच्चा आइना है।
नई कविता की मुख्य विशेषताएँ :
लघु मानव की प्रतिष्ठा या आम आदमी को सबसे ज्यादा महत्व :
पुरानी कविताओं में राजा-महाराजा, राम या कृष्ण जैसे महान चरित्र हीरो होते थे। लेकिन नई कविता ने कहा कि सुबह उठकर दफ्तर जाने वाला, फटे जूते पहनकर सड़क पर चलने वाला आम आदमी ही हमारी कविता का असली हीरो है। इसी आम इंसान को साहित्य में 'लघु मानव' कहा गया।
कविता का उदाहरण सर्वेश्वर दयाल सक्सेना :
"गर्म हवाएँ चल रही हैं,
और एक बूढ़ा आदमी
फटे हुए जूतों से सड़क नाप रहा है।"
अर्थ: कवि कहता है कि भयंकर गर्मी में तेज धूप और लू चल रही है, और एक गरीब बुजुर्ग इंसान फटे हुए जूते पहनकर लाचारी में सड़क पर पैदल चला जा रहा है। नई कविता ऐसे ही आम लोगों के जीवन को पूरी सच्चाई से दिखाती है।
भ्रष्ट व्यवस्था और राजनीति पर करारी चोट:
आज़ादी के बाद नेताओं ने जो बड़े-बड़े वादे किए थे, वे केवल कागजों पर रह गए। इसलिए नई कविता के कवियों ने देश की राजनीतिक व्यवस्था पर बहुत तीखे और सीधे व्यंग्य किए।
कविता का उदाहरण दुष्यंत कुमार:
"कहाँ तो तय था चराग़ाँ हर एक घर के लिए,
कहाँ चराग़ मयस्सर नहीं शहर के लिए।"
अर्थ: कवि नेताओं पर तंज कसते हुए कहता है कि चुनाव के समय तो वादा किया गया था कि आज़ादी के बाद देश के हर एक घर में खुशियों के दीये जलेंगे। लेकिन अफ़सोस! आज हकीकत यह है कि पूरे शहर को रोशन करने के लिए एक छोटा सा दीया भी नसीब नहीं हो रहा है।
आधुनिक जीवन का अकेलापन और तनाव :
आज के समय में बड़े-बड़े शहरों में भीड़ तो बहुत है, लेकिन इंसान अंदर से अकेला हो गया है। दफ्तर का तनाव, पैसों की चिंता और अपनों से दूरी के कारण उपजे अकेलेपन को नई कविता बहुत गहराई से बयां करती है।
कविता का उदाहरण अज्ञेय :
"मौन भी अभिव्यंजना है,
जितना तुम्हारा सच है, उतना ही कहो।"
अर्थ: कवि कहता है कि आज की मतलबी और भागदौड़ भरी दुनिया में झूठा दिखावा करने की कोई ज़रूरत नहीं है। तुम्हारी जिंदगी का जो सच है, उसे उतनी ही सादगी से स्वीकार करो। कभी-कभी चुप रहना भी अपने आप में बहुत कुछ कह जाता है।
सरल और सहज भाषा:
नई कविता की सबसे अच्छी बात यह है कि इसे पढ़ने के लिए किसी भारी-भरकम शब्दकोश की ज़रूरत नहीं होती। इसमें वही शब्द इस्तेमाल किए जाते हैं जो हम और आप रोज़ आपस में बातचीत करते समय बोलते हैं।
नई कविता के प्रमुख कवि और उनकी रचनाएँ:
कवि का नाम प्रमुख रचनाएँ
दुष्यंत कुमार - साये में धूप -यह प्रसिद्ध गज़ल संग्रह है
भवानी प्रसाद मिश्र - गीत फरोश, बुनी हुई रस्सी
कुँवर नारायण - चक्रव्यूह, आत्मजयी
सर्वेश्वर दयाल सक्सेना - काठ की घंटियाँ, खूँटियों पर टँगे लोग
दुष्यंत कुमार
साये में धूप (गज़ल संग्रह), सूर्य का स्वागत, आवाज़ों के घेरे
भवानी प्रसाद मिश्र
गीत फरोश, बुनी हुई रस्सी, खुशबू के शिलालेख, अनाम तुम आते हो
कुँवर नारायण
चक्रव्यूह, आत्मजयी -प्रसिद्ध प्रबंध काव्य,, इन दिनों, कोई दूसरा नहीं
सर्वेश्वर दयाल सक्सेना
काठ की घंटियाँ, खूँटियों पर टँगे लोग, बांस का पुल, एक सूनी नाव
रघुवीर सहाय
सीढ़ियों पर धूप में, लोग भूल गए हैं, आत्महत्या के विरुद्ध, हँसो हँसो जल्दी हँसो
श्रीकांत वर्मा
मगध, मायादर्पण, जलसाघर
जगदीश गुप्त
नाव के पाँव, शब्द दंश, हिम विद्ध
निष्कर्ष:
संक्षेप में कहें तो नई कविता हिंदी साहित्य की वह खिड़की है जिससे हमें आज के समाज का बिल्कुल असली चेहरा दिखाई देता है। यह किसी बंधन में नहीं बँधती। इसका सबसे बड़ा उद्देश्य समाज और इंसान के हालात को बेहतर बनाना है, जैसा कि दुष्यंत कुमार ने लिखा है:
"सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मक़सद नहीं,
मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए।"
अर्थ: कवि कहता है कि मेरा उद्देश्य कविता लिखकर केवल शोर मचाना या वाहवाही लूटना नहीं है, बल्कि मेरी सच्ची कोशिश यह है कि हमारे समाज और गरीब इंसान की यह बुरी हालत हर हाल में बदलनी चाहिए।