पाठ- 3 रसखान के 'सवैये' और 'कवित्त' के अभ्यास प्रश्न
प्रथम भाग निम्नलिखित प्रश्नों में सही विकल्प का चयन कीजिए प्रश्न 1. रसखान का जन्म स्थान है (क) ग्वालियर (ख) पिहानी हरदोई (ग) बसुआ गोविंदपुर (घ) मथुरा उत्तर- (ख) पिहानी हरदोई प्रश्न 2. रसखान की प्र…



अभ्यास:
प्रथम भाग निम्नलिखित प्रश्नों में सही विकल्प का चयन कीजिए
प्रश्न 1. रसखान का जन्म स्थान है
(क) ग्वालियर
(ख) पिहानी हरदोई
(ग) बसुआ गोविंदपुर
(घ) मथुरा
उत्तर- (ख) पिहानी हरदोई
प्रश्न 2. रसखान की प्रसिद्ध रचना है
(क) प्रेमवाटिका
(ख) सतसई
(ग) प्रेमसरोवर
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर- (क) प्रेमवाटिका
प्रश्न 3. जो खग हौं तो बसेरो करौं मिलि कालिंदी कूल कदंब की डारन में प्रयुक्त अलंकार है
(क) उपमा
(ख) अतिशयोक्ति
(ग) उत्प्रेक्षा
(घ) अनुप्रास
उत्तर- (घ) अनुप्रास
प्रश्न 4. गोपियाँ कृष्ण की मुरली को क्या समझती हैं
(क) सौत
(ख) सखी
(ग) प्रेमिका
(घ) पत्नी
उत्तर- (क) सौत
प्रश्न 5. करोर शब्द का खड़ीबोली रूप है
(क) हजार
(ख) करोड़
(ग) लाख
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर- (ख) करोड़
प्रश्न 6. धूरि भरे अति सोभित स्यामजू तैसी बनी सिर सुंदर चोटी में प्रयुक्त रस है
(क) शृंगार
(ख) वीर
(ग) हास्य
(घ) करुण
उत्तर- (क) शृंगार
द्वितीय भाग:
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए
प्रश्न 1. रसखान ने श्रीकृष्ण की निकटता प्राप्त करने के लिए किन किन रूपों में जन्म प्राप्त करने की तीव्र इच्छा प्रकट की है ?
उत्तर- रसखान ने श्रीकृष्ण की निकटता प्राप्त करने के लिए अगले जन्म में मनुष्य रूप में गोकुल के ग्वाले पशु रूप में नंद की गायों के बीच चरने वाले पशु पत्थर रूप में गोवर्धन पर्वत का अंग और पक्षी रूप में यमुना तट पर कदंब की डालियों पर बसेरा करने वाले पक्षी के रूप में जन्म लेने की तीव्र इच्छा प्रकट की है।
प्रश्न 2. यशोदा के किस सुख का वर्णन गोपियाँ नहीं कर पा रही हैं ?
उत्तर- माता यशोदा अपने पुत्र श्रीकृष्ण का शृंगार करते हुए उन्हें जो लाड़ प्यार करती हैं तेल उबटन लगाकर नहलाती हैं माथे पर डिठौना लगाती हैं और गले में आभूषण पहनाकर उन पर न्यौछावर होती हैं इस असीम वात्सल्य सुख का वर्णन गोपियों के लिए अवर्णनीय है।
प्रश्न 3. गोपियाँ ब्रज में क्यों नहीं रहना चाहती हैं कविता के आधार पर उत्तर दीजिए ?
उत्तर- गोपियाँ ब्रज में इसलिए नहीं रहना चाहती हैं क्योंकि श्रीकृष्ण अब पूरी तरह से अपनी बांसुरी के वशीभूत हो गए हैं। गोपियों को लगता है कि जब कृष्ण हमेशा बांसुरी को ही अपने साथ रखते हैं तो अब उन्हें पूछने वाला कोई नहीं है। वे बांसुरी को अपनी सौत मानती हैं और उसके कारण होने वाले कष्ट को न सह पाने के कारण ब्रज छोड़कर जाना चाहती हैं।
प्रश्न 4. कृष्ण की किस छवि पर कवि करोड़ों कामदेव न्यौछावर करते हैं ?
उत्तर- बालकृष्ण धूल से सने हुए हैं उनके सिर पर सुंदर चोटी गुंथी हुई है वे आंगन में खेलते और खाते हुए घूम रहे हैं तथा उनके पैरों में पैंजनी बज रही है। कृष्ण की इस अत्यंत मनमोहक और बाल सुलभ छवि पर कवि करोड़ों कामदेवों को न्यौछावर करते हैं।
प्रश्न 5. गोपियाँ कृष्ण की मुरली को अपनी सौत क्यों समझती हैं स्पष्ट कीजिए ?
उत्तर- गोपियाँ कृष्ण की मुरली को अपनी सौत इसलिए समझती हैं क्योंकि श्रीकृष्ण हमेशा मुरली को अपने होठों से लगाए रखते हैं और उसी में मग्न रहते हैं। मुरली के कारण कृष्ण गोपियों की ओर ध्यान नहीं देते। गोपियों को लगता है कि मुरली ने कृष्ण को अपने वश में कर लिया है और उन्हें कृष्ण के प्रेम से वंचित कर दिया है।
प्रश्न 6. वियोग में गोपियाँ कृष्ण के किन किन रूपों को धारण करती हैं ?
उत्तर- वियोग में व्याकुल गोपियाँ कृष्ण का सामीप्य महसूस करने के लिए उनके जैसा वेश धारण करना चाहती हैं। वे सिर पर मोर मुकुट गले में गुंजा की माला शरीर पर पीतांबर और हाथ में लाठी लेकर ग्वालों के साथ वन में घूमने का अभिनय करती हैं।
प्रश्न 7. वन से लौटते हुए कृष्ण के सुंदर रूप का संक्षिप्त वर्णन कीजिए ?
उत्तर- वन से गाय चराकर लौटते हुए श्रीकृष्ण के माथे पर गायों के खुरों से उड़ी धूल सुशोभित हो रही है। उनके गले में वनमाला है। वे आगे आगे गायों और पीछे पीछे ग्वाल बालों के साथ मधुर स्वर में गाते हुए आ रहे हैं। उनकी तिरछी चितवन और मंद मुस्कान अत्यंत आकर्षक लग रही है।
प्रश्न 8. पठित कविता के आधार पर रसखान के काव्यगत सौंदर्य का उल्लेख कीजिए ?
उत्तर- रसखान के काव्य में सगुण कृष्ण भक्ति का अत्यंत सरस और मार्मिक चित्रण हुआ है। उन्होंने ब्रजभाषा का अत्यंत मधुर और स्वाभाविक प्रयोग किया है। उनके सवैये लयात्मक और गेय हैं। रसखान के काव्य में शृंगार और वात्सल्य रस की प्रधानता है। अनुप्रास रूपक और यमक जैसे अलंकारों का सहज प्रयोग उनके काव्य सौंदर्य को और भी बढ़ा देता है।
प्रश्न 9. रसखान का जीवन परिचय देते हुए उनके प्रमुख रचनाओं का उल्लेख कीजिए ?
उत्तर- रसखान का वास्तविक नाम सैयद इब्राहिम था। इनका जन्म सन 1548 ईसवी के लगभग माना जाता है। ये दिल्ली के एक पठान सरदार थे। कृष्ण भक्ति से प्रभावित होकर ये गोकुल आ गए और गोस्वामी विट्ठलनाथ से दीक्षा ली। इनका निधन सन 1628 ईसवी के आसपास हुआ। इनकी प्रमुख रचनाएं सुजान रसखान और प्रेमवाटिका हैं। (जीवन परिचय देखें...)
प्रश्न 10. रसखान के साहित्यिक अवदान पर प्रकाश डालिए ?
उत्तर- रसखान ने हिंदी साहित्य में कृष्ण भक्ति काव्य परंपरा को एक नई दिशा दी। मुसलमान होते हुए भी कृष्ण के प्रति उनका अगाध प्रेम सांप्रदायिक सौहार्द का अनूठा उदाहरण है। उन्होंने सवैया छंद को कृष्ण लीला गान के लिए इतना लोकप्रिय बना दिया कि सवैया और रसखान एक दूसरे के पर्याय बन गए। ब्रजभाषा के माधुर्य को निखारने में उनका बहुत बड़ा योगदान है। (जीवन परिचय देखें...)
पद्यांश:
दिये गए पद्यांशों पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
पद्यांश (क)
मानुष हौं तो वही रसखानि बसौं ब्रज गोकुल गाँव के ग्वारन।
जो पसु हौं तो कहा बस मेरो चरौं नित नंद की धेनु मँझारन।।
पाहन हौं तो वही गिरि को जो धर्यौ कर छत्र पुरंदर धारन।
जो खग हौं तो बसेरो करौं मिलि कालिंदी कूल कदंब की डारन।।
प्रश्न 1. उपर्युक्त पद्यांश का संदर्भ लिखिए।
उत्तर- प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक हिंदी के काव्य खंड में संकलित सवैये शीर्षक से अवतरित है, जिसके रचयिता कृष्ण भक्त रसखान हैं।
प्रश्न 2. रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
उत्तर- कवि रसखान श्रीकृष्ण के प्रति अपनी अनन्य भक्ति प्रकट करते हुए कहते हैं कि यदि मुझे अगले जन्म में मनुष्य योनि मिले तो मैं गोकुल गांव के ग्वालों के बीच निवास करूं। यदि मैं पशु बनूं तो मेरा नंद बाबा की गायों के बीच चरने का सौभाग्य हो।
प्रश्न 3. पद्यांश का काव्यगत सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर- इस पद्यांश में रसखान का कृष्ण और ब्रजभूमि के प्रति अनन्य प्रेम व्यक्त हुआ है। भाषा सरल और सरस ब्रजभाषा है। छंद सवैया है। रस शांत और भक्ति है। कालिंदी कूल कदंब की डारन में क वर्ण की आवृत्ति होने से अनुप्रास अलंकार की छटा दर्शनीय है।
पद्यांश (ख)
आजु गई हुती भोर ही हौं रसखानि रई वहि नंद के भौंनहिं।
वाको जियौ जुग लाख करोर जसोमति को सुख जात कह्यौ नहिं।
तेल लगाइ लगाइ कै अंजन भौहें बनाइ बनाइ डिठौनहिं।
डारि हमेलनि हार निहारत वारत ज्यौं चुचकारत छौनहिं।।
प्रश्न 1. उपर्युक्त पद्यांश का संदर्भ लिखिए।
उत्तर- प्रस्तुत सवैया हमारी पाठ्यपुस्तक हिंदी के काव्य खंड में संकलित रसखान जी द्वारा रचित सवैये शीर्षक से लिया गया है।
प्रश्न 2. रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
उत्तर- गोपी कहती है कि हे सखी! आज मैं सुबह-सुबह ही नंद जी के भवन में गई थी। वहाँ जाते ही मैं पूरी तरह लीन हो गई। वह कहती है कि यशोदा का वह लाल लाखों-करोड़ों युगों तक जीवित रहे। उस समय बालक कृष्ण को अपनी गोद में पाकर माता यशोदा को जो ब्रह्मानंद या आत्मिक सुख मिल रहा है, वह संसार की किसी भी भाषा, शब्द या लिपि की सीमा से परे है। वह सुख पूरी तरह से अनिर्वचनीय है।
प्रश्न 3. पद्यांश में प्रयुक्त डिठौनहिं शब्द का अर्थ लिखिए। यह बच्चों को क्यों लगाया जाता है ?
उत्तर- डिठौनहिं शब्द का अर्थ काजल का काला टीका है। यह बच्चों को इसलिए लगाया जाता है ताकि उन्हें किसी की बुरी नजर न लगे।
पद्यांश (ङ)
गोरज बिराजै भाल लहलही.........
...रस बरसावै तन तपनि बुझावै नैन
प्राननि रिझावै वह आवै रसखानि री।।
प्रश्न 1. उपर्युक्त पद्यांश का संदर्भ लिखिए।
उत्तर- प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक हिंदी के काव्य खंड में रसखान द्वारा रचित कवित्त शीर्षक से लिया गया है।
प्रश्न 2. गोरज के बीच कृष्ण के सुंदर रूप का सजीव चित्रण रसखान ने किस प्रकार से किया है ?
उत्तर- रसखान ने चित्रण किया है कि वन से लौटते हुए कृष्ण के माथे पर गायों के खुरों से उड़ी धूल विराजमान है गले में वनमाला सुशोभित हो रही है। उनकी तिरछी दृष्टि मंद मंद मुस्कान और बांसुरी की मधुर ध्वनि अत्यंत मनमोहक लग रही है।
प्रश्न 3. रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
उत्तर- एक गोपी अपनी सखी से कहती है कि- हे सखी! जब वे आनंद की खान श्रीकृष्ण आते हैं, तो ऐसा प्रतीत होता है मानो चारों ओर प्रेम और आनंद की वर्षा हो रही हो। उनके दर्शन मात्र से शरीर की सारी तपन बुझ जाती है और हृदय को असीम शीतलता प्राप्त होती है। उनका वह मनमोहक रूप हमारी आँखों को अत्यंत प्रिय लगता है और हमारे प्राणों को रिझा लेता है।
भाषा के रंग:
प्रश्न 1. निम्नलिखित काव्य पंक्तियों में कौन सा रस है उसके स्थायी भाव का उल्लेख कीजिए।
i. तेल लगाइ लगाइ कै अंजन भौहें बनाइ बनाइ डिठौनहिं।
उत्तर इस पंक्ति में वात्सल्य रस है। इसका स्थायी भाव वत्सल है।
ii. कान्ह भए बस बाँसुरी के अब कौन सखी हमको चहिहै।
उत्तर इस पंक्ति में शृंगार रस वियोग शृंगार है। इसका स्थायी भाव रति है।
प्रश्न 2. पुरंदर कालिंदी धेनु शब्द का अर्थ लिखिए।
उत्तर-
पुरंदर -का अर्थ इंद्र है।
कालिंदी -का अर्थ यमुना नदी है।
धेनु -का अर्थ गाय है।
प्रश्न 3. निम्नलिखित शब्दों के खड़ी बोली रूप लिखिए
करोर सिगरो लकुटी काग अँगुरी माखन जुग बानि बिटप।
उत्तर-
करोर का खड़ी बोली रूप करोड़ है।
सिगरो का खड़ी बोली रूप संपूर्ण या सारा है।
लकुटी का खड़ी बोली रूप लाठी है।
काग का खड़ी बोली रूप कौआ है।
अँगुरी का खड़ी बोली रूप उंगली है।
माखन का खड़ी बोली रूप मक्खन है।
जुग का खड़ी बोली रूप युग है।
बानि का खड़ी बोली रूप आदत है।
बिटप का खड़ी बोली रूप वृक्ष या पेड़ है।
प्रश्न 4. निम्नलिखित शब्दों के दो दो पर्यायवाची शब्द लिखिए
पुरंदर पाहन कालिंदी पट विटप खग।
उत्तर-
पुरंदर के पर्यायवाची- देवराज और सुरपति हैं।
पाहन के पर्यायवाची- प्रस्तर और पत्थर हैं।
कालिंदी के पर्यायवाची- यमुना और सूर्यसुता हैं।
पट के पर्यायवाची- वस्त्र और चीर हैं।
विटप के पर्यायवाची- पेड़ और तरु हैं।
खग के पर्यायवाची- पक्षी और विहंग हैं।
पंचम भाग अनुभूति और अभिव्यक्ति:
प्रश्न 1. श्रीकृष्ण के सान्निध्य हेतु रसखान ने जिस प्रकार के भावी जन्मों एवं स्थितियों की कामना की है उसी तरह आप अपने संदर्भ में किस प्रकार के सुखद व आनंदमय जीवन की कल्पना करते हैं विचार प्रकट कीजिए।
उत्तर- रसखान की भांति मैं भी अपने संदर्भ में एक ऐसे जीवन की कल्पना करता हूं जो प्रकृति के निकट हो और जहां शांति व सद्भाव हो। मैं चाहता हूं कि मेरा निवास ऐसे स्थान पर हो जहां प्रदूषण न हो हरे भरे वृक्ष हों और नदियों का निर्मल जल हो। समाज में सभी लोग प्रेम और भाईचारे से रहें तथा मुझे अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए आत्मिक संतुष्टि प्राप्त हो।
प्रश्न 2. कृष्ण के हाथ से रोटी छीन कर उड़ जाने वाले कौवे को कवि ने भाग्यशाली क्यों कहा है विचार कीजिए।
उत्तर- कवि रसखान ने कृष्ण के हाथ से माखन रोटी छीनकर ले जाने वाले कौवे को इसलिए भाग्यशाली कहा है क्योंकि उस कौवे को साक्षात परब्रह्म श्रीकृष्ण के हाथों का स्पर्श प्राप्त हो गया और उनके द्वारा खाया जाने वाला जूठा भोजन प्रसाद रूप में प्राप्त हुआ। जो सौभाग्य बड़े बड़े मुनियों को भी आसानी से नहीं मिलता वह उस सामान्य कौवे को मिल गया।