पाठ-4 बिहारीलाल के भक्ति' और 'नीति' के दोहों के अभ्यास प्रश्न
I. निम्नलिखित प्रश्नों में सही विकल्प का चयन कीजिए। प्रश्न 1. बिहारी का जन्म-स्थान है- (क) मथुरा (ख) काशी (ग) ग्वालियर (घ) सीही उत्तर: (ग) ग्वालियर प्रश्न 2. बिहारी की रचना है- (क) श्रीकृष्ण गीतावली…



अभ्यास
I. निम्नलिखित प्रश्नों में सही विकल्प का चयन कीजिए।
प्रश्न 1. बिहारी का जन्म-स्थान है- (क) मथुरा (ख) काशी (ग) ग्वालियर (घ) सीही
उत्तर: (ग) ग्वालियर
प्रश्न 2. बिहारी की रचना है- (क) श्रीकृष्ण गीतावली (ख) अष्टयाम (ग) सतसई (घ) बरवै रामायण
उत्तर: (ग) सतसई
प्रश्न 3. गागर में सागर नामक उक्ति प्रसिद्ध है- (क) महादेवी वर्मा के लिए (ख) तुलसीदास के लिए (ग) बिहारीलाल के लिए (घ) सूरदास के लिए
उत्तर: (ग) बिहारीलाल के लिए
प्रश्न 4. कृष्ण की बाँसुरी किस रंग की हो जाती है? (क) पीले रंग की (ख) नीले रंग की (ग) इंद्रधनुष रंग की (घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर: (ग) इंद्रधनुष रंग की
प्रश्न 5. किसी राज्य की प्रजा का दुःख कब बढ़ जाता है? (क) लोकतंत्रात्मक में (ख) इकहरे शासन में (ग) द्वैधशासन में (घ) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर: (ग) द्वैधशासन में
II. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
प्रश्न 1. बिहारी ने अपने दोहे में मंगलाचरण के रूप में किसकी वंदना की है ?
उत्तर: बिहारी ने अपने दोहे में मंगलाचरण के रूप में राधारानी की वंदना की है।
प्रश्न 2. सोहत ओढ़ै पीतु पटु स्याम सलौनै गात - इस दोहे में पीला वस्त्र ओढ़े हुए श्रीकृष्ण का सौंदर्य कैसा प्रतीत हो रहा है ? वर्णन कीजिए।
उत्तर: इस दोहे में पीला वस्त्र ओढ़े हुए साँवले श्रीकृष्ण का सौंदर्य ऐसा प्रतीत हो रहा है मानो नीलमणि के पर्वत पर प्रातःकाल की पीली धूप पड़ रही हो।
प्रश्न 3. कृष्ण की हरित बाँस की बाँसुरी इंद्रधनुष के रंगों वाली क्यों हो जाती है ? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: जब श्रीकृष्ण अपनी हरे रंग की बाँस की बाँसुरी को अपने होठों पर रखते हैं, तो उनके लाल होठों, श्याम वर्ण शरीर और पीतांबर की चमक पड़ने से वह बाँसुरी इंद्रधनुष के समान सतरंगी आभा वाली हो जाती है।
प्रश्न 4. ज्यौं ज्यौं बूड़ै स्याम रंग त्यौं-त्यौं उज्जलु होइ - इस विरोधाभास को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: सामान्यतः काले रंग में डूबने पर कोई भी वस्तु काली हो जाती है, परंतु यहाँ कवि कहते हैं कि जैसे-जैसे मन श्रीकृष्ण के श्याम रंग अर्थात कृष्ण भक्ति में डूबता है, वैसे-वैसे वह सभी पापों और विकारों से मुक्त होकर उज्ज्वल और पवित्र हो जाता है।
प्रश्न 5. बिहारी ने मनुष्य की और पानी के नल की दशा को समान क्यों कहा है ? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: बिहारी ने मनुष्य और पानी के नल की दशा को समान इसलिए कहा है क्योंकि दोनों जितना नीचे होकर अर्थात विनम्र होकर चलते हैं, वे उतना ही ऊँचा उठते हैं अर्थात महान बनते हैं।
प्रश्न 6. बिहारी ने अपने दोहे में किसकी निरर्थकता बताकर भगवान की सच्ची भक्ति पर बल दिया है?
उत्तर: बिहारी ने जप, माला, छापा, तिलक आदि बाह्य आडंबरों की निरर्थकता बताकर भगवान की सच्ची भक्ति और शुद्ध मन पर बल दिया है।
प्रश्न 7. बिहारी ने अपने दोहे में दो राजाओं के शासन से उत्पन्न कष्टों का वर्णन किस प्रकार किया है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: बिहारी ने कहा है कि जिस प्रकार सूर्य और चंद्रमा के एक ही राशि में आ जाने पर अमावस्या की रात का अंधकार बहुत अधिक बढ़ जाता है, उसी प्रकार एक ही राज्य में दो राजाओं का शासन होने से प्रजा का दुःख और कष्ट असहनीय हो जाता है।
प्रश्न 8. बिहारीलाल का जीवन-परिचय देते हुए उनके प्रमुख रचना का उल्लेख कीजिए।
उत्तर: रीतिकालीन कवि बिहारीलाल का जन्म सन् 1595 ईस्वी के लगभग ग्वालियर के पास गोविंदपुर गाँव में हुआ था। इनके पिता का नाम केशवराय था। इन्होने जयपुर के राजा जयसिंह के दरबार में रहकर काव्य रचना की। इनकी मृत्यु सन् 1663 ईस्वी के आसपास हुई। इनकी एकमात्र प्रमुख रचना बिहारी सतसई है, जिसमे 719 दोहे हैं। (जीवन परिचय देखें)
प्रश्न 9. बिहारीलाल के साहित्यिक अवदान पर उल्लेख करते हुए उनकी भाषा शैली पर प्रकाश डालिए।
उत्तर: बिहारीलाल ने गागर में सागर भरने की कला का अद्भुत प्रदर्शन किया है। इन्होने अपने दोहों में शृंगार, भक्ति और नीति का सुंदर समन्वय प्रस्तुत किया है। इनकी साहित्यिक भाषा परिमार्जित ब्रजभाषा है, जिसमे शब्द चयन अत्यंत सटीक और भावपूर्ण है। इनकी शैली मुक्तक है जो चमत्कारपूर्ण और समास प्रधान है। (जीवन परिचय देखें)
प्रश्न 10. नहिं परागु नहिं मधुर मधु नहिं विकासु इहिं काल इस दोहे के माध्यम से बिहारीलाल ने किस प्रेमानुरक्त राजा को सचेत कर कर्त्तव्य-पथ पर अग्रसर किया ?
उत्तर: इस दोहे के माध्यम से बिहारीलाल ने अपनी नवविवाहिता पत्नी के प्रेम में पूर्णतः डूबे हुए और राजकाज से विमुख जयपुर के राजा जयसिंह को सचेत कर उन्हें उनके कर्त्तव्य-पथ पर अग्रसर किया।
III. दिये गए पद्यांशों पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए -
(क) मेरी भव-बाधा हरौ, राधा नागरि सोइ।
जा तन की झाँई परै, स्यामु हरित-दुति होइ।।
प्रश्न (i) उपर्युक्त पद्यांश का संदर्भ लिखिए।
उत्तर: प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक हिंदी के काव्य खंड में संकलित और बिहारीलाल द्वारा रचित बिहारी सतसई के भक्ति शीर्षक से अवतरित है।
प्रश्न (ii) उपर्युक्त पद्यांश में बिहारी ने किसकी स्तुति की है?
उत्तर: उपर्युक्त पद्यांश में कवि बिहारी ने चतुर राधारानी की स्तुति की है।
प्रश्न (iii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: कवि प्रार्थना करते हैं कि वे चतुर राधारानी मेरे सभी सांसारिक कष्टों को दूर करें, जिनके शरीर की सुनहरी परछाईं पड़ने मात्र से ही श्रीकृष्ण प्रसन्न होकर हरे रंग की आभा वाले अर्थात अत्यधिक हर्षित हो जाते हैं।
अथवा
राधा-कृष्ण के प्रेम की यह पावन छवि भक्तों के सभी संतापों और दुखों को दूर कर देती है। जिस प्रकार हरियाली देखकर मन को शीतलता मिलती है, उसी प्रकार इनके दर्शन मात्र से हृदय हरा-भरा और तृप्त हो जाता है।
(ख) मोर-मुकुट की चंद्रिकनु, यौं राजत नंदचंद।
मनु ससि सेखर की अकस, किय सेखर सत चंद।।
प्रश्न (i) उपर्युक्त पद्यांश का शीर्षक एवं रचनाकार का नाम लिखिए।
उत्तर: उपर्युक्त पद्यांश का शीर्षक भक्ति है और इसके रचनाकार बिहारीलाल हैं।
प्रश्न (ii) कृष्ण के मस्तक पर सुशोभित मयूर पंख की शोभा का तुलनात्मक वर्णन किसके साथ किया गया है ?
उत्तर: कृष्ण के मस्तक पर सुशोभित मयूर पंख की शोभा की तुलना भगवान शिव के मस्तक पर धारण किए गए चंद्रमा से की गई है।
प्रश्न (iii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: श्रीकृष्ण के सिर पर मोरपंखों का मुकुट अत्यंत सुशोभित हो रहा है, जिसमें बनी हुई चंद्राकार आकृतियाँ ऐसी लग रही हैं मानो भगवान शिव से प्रतिस्पर्धा करने के लिए श्रीकृष्ण ने अपने सिर पर सैकड़ों चंद्रमाओं को धारण कर लिया हो।
(ग) सोहत ओढ़ै पीतु पटु, स्याम सलौनै गात।
मनौ नीलमनि सैल पर, आतपु परयौ प्रभात।।
प्रश्न (i) उपर्युक्त पद्यांश का संदर्भ लिखिए।
उत्तर: प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक हिंदी के काव्य खंड में संकलित बिहारीलाल द्वारा रचित बिहारी सतसई के भक्ति शीर्षक से लिया गया है।
प्रश्न (ii) रेखांकित पद्यांश की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: श्रीकृष्ण के साँवले और अत्यंत सुंदर शरीर पर पीले रंग का वस्त्र ऐसा सुशोभित हो रहा है, मानो नीलमणि के पर्वत पर प्रातःकाल की मनमोहक पीली धूप पड़ रही हो।
प्रश्न (iii) उपर्युक्त पद्यांश में प्रयुक्त रस, छंद एवं अलंकार को पहचानकर उनके नाम लिखिए।
उत्तर: इस पद्यांश में शृंगार रस, दोहा छंद और उत्प्रेक्षा अलंकार का सुंदर प्रयोग हुआ है।
भाषा के रंग :
प्रश्न 1. (i) जा तन की झाँई परै, स्यामु हरित-दुति होइ।
(ii) मनौ नीलमनि-सैल पर, आतपु परयौ प्रभात
उपर्युक्त पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार को पहचानकर स्पष्टीकरण सहित नाम लिखिए।
उत्तर: (i) पहली पंक्ति में श्लेष अलंकार है क्योंकि यहाँ हरित और स्यामु शब्दों के एक से अधिक अर्थ निकलते हैं।
(ii) दूसरी पंक्ति में उत्प्रेक्षा अलंकार है क्योंकि यहाँ मनौ वाचक शब्द का प्रयोग करके यह संभावना व्यक्त की गई है कि श्रीकृष्ण का शरीर नीलमणि पर्वत है और पीतांबर प्रातःकालीन धूप है।
प्रश्न 2. निम्नलिखित पंक्तियों में कौन-सा छंद है ? समझाइए -
तो लगु या मन-सदन मैं, हरि आवै किहिं बाट।
बिकट जटे जौं लगु निपट, खुटै न कपट-कपाट।।
उत्तर: इन पंक्तियों में दोहा छंद है। यह एक अर्धसम मात्रिक छंद है। इसके पहले और तीसरे चरण में तेरह-तेरह मात्राएँ तथा दूसरे और चौथे चरण में ग्यारह-ग्यारह मात्राएँ होती हैं।
प्रश्न 3. निम्नलिखित पदों में समास-विग्रह कीजिए तथा उनका नाम लिखिए -
पीतु पटु, नीलमनि, मनसदन, दुराज, रवि-चंद, समूल
उत्तर:
पीतु पटु - पीला है जो वस्त्र, कर्मधारय समास।
नीलमनि - नीली है जो मणि, कर्मधारय समास।
मनसदन - मन रूपी सदन, कर्मधारय समास।
दुराज - दो राजाओं का राज्य, द्विगु समास।
रवि-चंद - रवि और चंद्रमा, द्वंद्व समास।
समूल - मूल के साथ, अव्ययीभाव समास।
V. अनुभूति और अभिव्यक्ति :
प्रश्न 1. बिहारीलाल के नीति के दोहों का निहितार्थ वर्तमान सामाजिक, राजनीतिक व आर्थिक परिप्रेक्ष्य में कहाँ तक प्रासंगिक है ? विचार व्यक्त कीजिए।
उत्तर: बिहारीलाल के नीति के दोहे वर्तमान परिप्रेक्ष्य में भी पूर्णतः प्रासंगिक हैं। राजनीतिक दृष्टि से उनका दो राजाओं के शासन में प्रजा के दुःख का वर्णन वर्तमान गठबंधनों और शक्ति के टकराव में देखा जा सकता है जहाँ आम जनता परेशान होती है। सामाजिक व आर्थिक दृष्टि से विनम्रता से महानता प्राप्त करने का संदेश आज भी सत्य है कि व्यक्ति जितना अहंकार छोड़कर विनम्र होता है, समाज में उसे उतना ही उच्च स्थान और सम्मान मिलता है। अतः उनके संदेश शाश्वत हैं।
प्रश्न 2. बिहारीलाल के भक्ति व नीतिपरक दोहों के अनुशीलनोपरांत सतसैया के दोहरे ज्यों नावक के तीर देखन में छोटे लगैं घाव करैं गंभीर की उक्ति से आप कहाँ तक सहमत हैं? आपस में विमर्श कीजिए।
उत्तर: मैं इस उक्ति से पूर्णतः सहमत हूँ। बिहारीलाल के दोहे आकार में बहुत छोटे होते हैं, जिनमें मात्र दो पंक्तियाँ होती हैं। परंतु इन दो पंक्तियों में शृंगार, भक्ति, नीति और लोकव्यवहार का इतना गहरा अर्थ छिपा होता है कि वह सीधे पाठक के मन और हृदय पर अमिट प्रभाव डालता है। उन्होंने कम से कम शब्दों में अधिक से अधिक भाव व्यक्त करके गागर में सागर भर दिया है, इसीलिए उनके दोहों को नावक के तीर के समान गहरा प्रभाव छोड़ने वाला कहा गया है।