पाठ-5 मैथिलीशरण गुप्त की कविता 'भारत माता का मंदिर यह' के अभ्यास प्रश्न
I. निम्नलिखित प्रश्नों में सही विकल्प का चयन कीजिए- प्रश्न 1. मैथिलीशरण गुप्त का जन्म किस जिले में हुआ था ? (क) झांसी (ख) बलिया (ग) ग्वालियर (घ) आजमगढ़ उत्तर: (क) झाँसी प्रश्न 2. भारत-भारती के रचना…



अभ्यास:
I. निम्नलिखित प्रश्नों में सही विकल्प का चयन कीजिए-
प्रश्न 1. मैथिलीशरण गुप्त का जन्म किस जिले में हुआ था ?
(क) झांसी (ख) बलिया (ग) ग्वालियर (घ) आजमगढ़
उत्तर: (क) झाँसी
प्रश्न 2. भारत-भारती के रचनाकार हैं -
(क) महादेवी वर्मा (ख) भारतेन्दु हरिशचंद्र
(ग) मैथिलीशरण गुप्त (घ) रामनरेश त्रिपाठी
उत्तर: (ग) मैथिलीशरण गुप्त
प्रश्न 3. साहित्य में किस कवि को राष्ट्रकवि का सम्मान प्राप्त हुआ है ?
(क) केदारनाथ सिंह (ख) मैथिलीशरण गुप्त
(ग) महादेवी वर्मा (घ) सुमित्रानंदन पंत
उत्तर: (ख) मैथिलीशरण गुप्त
प्रश्न 4. मैथिलीशरण गुप्त की रचना है -
(क) यामा (ख) साकेत
(ग) जमीन पक रही है (घ) हल्दी-घाटी
उत्तर: (ख) साकेत
प्रश्न 5. सबका स्वागत, सबका आदर सबका सम सम्मान यहाँ इस काव्य-पंक्ति में अलंकार है -
(क) यमक (ख) अनुप्रास (ग) श्लेष (घ) रूपक
उत्तर: (ख) अनुप्रास
II. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए -
प्रश्न 1. कवि ने किसे भारत माता का मंदिर कहकर संबोधित किया है ?
उत्तर: कवि ने संपूर्ण भारत देश को भारत माता का पवित्र मंदिर कहकर संबोधित किया है।
प्रश्न 2. भारत देश को सब तीर्थों का एक तीर्थ कहने का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: भारत देश को सब तीर्थों का एक तीर्थ कहने का आशय यह है कि भारत की पावन भूमि पर सभी धर्मों, संप्रदायों और तीर्थों का समान महत्त्व है। यहाँ आकर जो पुण्य और शांति मिलती है, वह विश्व के सभी तीर्थों के दर्शन के समान है।
प्रश्न 3. भारत माता का यह मंदिर इस शीर्षक में उल्लिखित भारत देश की पाँच विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
1. यहाँ सभी धर्मों और जातियों के लोगों में समानता का भाव है।
2. यहाँ बिना किसी भेदभाव के सभी का स्वागत और सम्मान होता है।
3. यहाँ सभी का कल्याण और मंगल होता है।
4. इस देश में राम, रहीम, बुद्ध और ईसा मसीह सभी का समान रूप से ध्यान किया जाता है।
5. यहाँ के निवासी एक-दूसरे के सुख और दुख को मिल-बाँटकर अपनाते हैं।
प्रश्न 4. सकल काम उस न्यायी का इस पंक्ति में कवि ने किस सत्ता की ओर संकेत किया है?
उत्तर: इस पंक्ति में कवि ने ईश्वर रूपी परम सत्ता की ओर संकेत किया है, जो अत्यंत न्यायकारी है और जिसके विधान से ही इस संसार के सभी कार्य संचालित होते हैं।
प्रश्न 5. मैथिलीशरण गुप्त के साहित्यिक योगदान का उल्लेख करते हुए उनकी भाषा-शैली पर प्रकाश डालिए।
उत्तर: मैथिलीशरण गुप्त जी ने खड़ी बोली को काव्य भाषा के रूप में प्रतिष्ठित करने में अभूतपूर्व योगदान दिया। उन्होंने अपने काव्य में राष्ट्रीयता, भारतीय संस्कृति, गौरवशाली अतीत और उपेक्षित नारी पात्रों को प्रमुखता दी। इनकी भाषा अत्यंत सरल, सुबोध, प्रांजल और ओजपूर्ण खड़ी बोली है। इन्होंने अपनी रचनाओं में मुख्य रूप से प्रबंध और मुक्तक दोनों ही शैलियों का अत्यंत सुंदर और सफल प्रयोग किया है।
प्रश्न 6. मैथिलीशरण गुप्त का संक्षिप्त जीवन-परिचय तथा इनकी रचनाओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर: राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त का जन्म सन 1886 ईस्वी में उत्तर प्रदेश के झाँसी जिले के चिरगाँव नामक स्थान पर हुआ था। इनके पिता का नाम सेठ रामचरण था, जो स्वयं एक अच्छे कवि थे। गुप्त जी ने घर पर ही हिंदी, संस्कृत और बांग्ला साहित्य का गहन अध्ययन किया। आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी जी की प्रेरणा से इन्होंने काव्य रचना की। इनका निधन सन 1964 ईस्वी में हुआ। इनकी प्रमुख रचनाएँ साकेत, भारत-भारती, यशोधरा, पंचवटी, जयद्रथ वध और द्वापर आदि हैं। (जीवन परिचय देखें)
प्रश्न 7. मैथिलीशरण गुप्त की कविता भारत माता का मंदिर यह का केंद्रीय भाव लिखिए।
उत्तर: इस कविता का केंद्रीय भाव भारत देश की महिमा, सर्वधर्म समभाव, विश्व बंधुत्व और एकता का गान करना है। कवि ने भारत को एक ऐसा पवित्र मंदिर माना है जहाँ जाति, धर्म और संप्रदाय का कोई भेद नहीं है और सभी को समान आदर तथा स्नेह प्राप्त होता है।
प्रश्न 8. मैथिलीशरण गुप्त इस कविता के माध्यम से पाठकों को क्या संदेश देना चाहते हैं ?
उत्तर: कवि इस कविता के माध्यम से पाठकों को यह संदेश देना चाहते हैं कि हमें जाति, धर्म और संप्रदाय के सभी भेदभावों को भुलाकर आपसी प्रेम, भाईचारे और समानता के साथ रहना चाहिए तथा अपने हृदय को पवित्र बनाकर सभी को मित्र बना लेना चाहिए।
प्रश्न 9. हमें अपने चरित्र का निर्माण किस आधार पर करना चाहिए ? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: हमें अपने चरित्र का निर्माण उच्च आदर्शों, पवित्रता, समानता और परोपकार के आधार पर करना चाहिए। कवि के अनुसार हमें अपने मन में श्रेष्ठ संकल्प लेने चाहिए और सौ-सौ अच्छे आदर्शों को अपनाकर एक श्रेष्ठ और मजबूत चरित्र का निर्माण करना चाहिए।
प्रश्न 10. हर्ष-विषाद से क्या तात्पर्य है ? कवि इस शब्द के माध्यम से क्या कहना चाहता है ?
उत्तर: हर्ष का अर्थ है प्रसन्नता या सुख और विषाद का अर्थ है दुख। कवि इन शब्दों के माध्यम से यह कहना चाहता है कि हम सभी भारतवासियों को आपस में मिलकर एक-दूसरे के सुख और दुख में समान रूप से सहभागी होना चाहिए और जीवन की हर परिस्थिति को साथ मिलकर स्वीकार करना चाहिए।
प्रश्न 11. प्रस्तुत कविता से आपको क्या शिक्षा मिलती है ?
उत्तर: प्रस्तुत कविता से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमारा देश भारत एक पवित्र मंदिर के समान है। हमें यहाँ किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं करना चाहिए, सबके साथ प्रेम तथा समानता का व्यवहार करना चाहिए और राष्ट्रीय एकता व अखंडता को बनाए रखने के लिए अजातशत्रु बनकर रहना चाहिए।
पद्यांश:
III. दिये गए पद्यांशों पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए -
(क) भारत माता का मंदिर यह
समता का संवाद जहाँ,
सबका शिव कल्याण यहाँ है
पावें सभी प्रसाद यहाँ।
जाति-धर्म या संप्रदाय का,
नहीं भेद-व्यवधान यहाँ,
सबका स्वागत, सबका आदर
सबका सम सम्मान यहाँ।
प्रश्न (i) उपर्युक्त पद्यांश का संदर्भ लिखिए।
उत्तर: प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक हिंदी के काव्य खंड में संकलित एवं राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त द्वारा रचित कविता भारत माता का मंदिर यह से अवतरित है।
प्रश्न (ii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: कवि कहते हैं कि इस भारत रूपी पवित्र मंदिर में जाति, धर्म या संप्रदाय के आधार पर कोई भेदभाव या रुकावट नहीं है। यहाँ सभी लोगों का बिना किसी पक्षपात के स्वागत किया जाता है और सभी को एक समान आदर और सम्मान प्राप्त होता है।
प्रश्न (iii) कवि ने किसे भारत माता के मंदिर का प्रतीक माना है ?
उत्तर: कवि ने संपूर्ण भारत देश को ही भारत माता के मंदिर का प्रतीक माना है।
ख
नहीं चाहिए बुद्धि बैर की
भला प्रेम का उन्माद यहाँ,
सबका शिव कल्याण यहाँ है,
पावें सभी प्रसाद यहाँ।
सब तीर्थों का एक तीर्थ यह
हृदय पवित्र बना लें हम।
आओ यहाँ अजातशत्रु बन,
सबको मित्र बना लें हम।
प्रश्न (i) उपर्युक्त पद्यांश का संदर्भ लिखिए।
उत्तर: प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक हिंदी के काव्य खंड में संकलित तथा मैथिलीशरण गुप्त जी द्वारा रचित कविता भारत माता का मंदिर यह से लिया गया है।
प्रश्न (ii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: कवि देशवासियों का आह्वान करते हुए कहते हैं कि हमें अपने हृदय से शत्रुता और द्वेष का भाव निकालकर अजातशत्रु बन जाना चाहिए, अर्थात ऐसा व्यक्ति जिसका कोई शत्रु न हो। हमें प्रेम भाव से सभी लोगों को अपना मित्र बना लेना चाहिए।
प्रश्न (iii) अजातशत्रु से कवि का क्या अभिप्राय है ?
उत्तर: अजातशत्रु से कवि का अभिप्राय ऐसे व्यक्ति से है जिसका संसार में कोई भी शत्रु पैदा न हुआ हो, अर्थात जो सभी से निःस्वार्थ प्रेम करता हो और जिससे सब प्रेम करते हों।
IV. भाषा के रंग:
प्रश्न 1. निम्नलिखित पदों का समास-विग्रह कीजिए तथा समास का नाम लिखिए -
उत्तर:
अजातशत्रु - जिसका कोई शत्रु पैदा न हुआ हो (बहुव्रीहि समास)
हर्ष-विषाद - हर्ष और विषाद (द्वंद्व समास)
जयनाद - जय का नाद (तत्पुरुष समास)
भाई-बहन - भाई और बहन (द्वंद्व समास)
प्रश्न 2. निम्नलिखित शब्दों में उपसर्ग और मूल-शब्द पृथक करके लिखिए -
उत्तर:
संवाद: सम् (उपसर्ग) + वाद (मूल शब्द)
संप्रदाय: सम् (उपसर्ग) + प्रदाय (मूल शब्द)
सुलभ: सु (उपसर्ग) + लभ (मूल शब्द)
सम्मान: सम् (उपसर्ग) + मान (मूल शब्द)
अजात: अ (उपसर्ग) + जात (मूल शब्द)
प्रश्न 3. निम्नलिखित पंक्तियों में स्पष्टीकरण सहित अलंकार का नाम लिखिए।
(i) सबका स्वागत, सबका आदर सबका सम सम्मान यहाँ।
उत्तर: इस पंक्ति में स वर्ण की बार-बार आवृत्ति हुई है, इसलिए यहाँ अनुप्रास अलंकार है।
(ii) भिन्न-भिन्न भव संस्कृतियों के गुण गौरव का ज्ञान यहाँ।
उत्तर: इस पंक्ति में भिन्न-भिन्न में पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार है तथा ग और भ वर्ण की आवृत्ति के कारण यहाँ अनुप्रास अलंकार भी है।
प्रश्न 4. निम्नलिखित पंक्तियों में रस पहचानिए एवं उनके स्थायीभाव का उल्लेख कीजिए।
(i) राम, रहीम, बुद्ध, ईसा का, सुलभ एक सा ध्यान यहाँ, भिन्न-भिन्न भव संस्कृतियों के, गुण गौरव का ज्ञान यहाँ।
उत्तर: इन पंक्तियों में शांत रस है। शांत रस का स्थायी भाव निर्वेद है।
(ii) मिला सेव्य का हमें पुजारी, सकल काम उस न्यायी का, मुक्ति लाभ कर्तव्य यहाँ है, एक एक अनुयायी का।
उत्तर: इन पंक्तियों में शांत रस और भक्ति रस है। शांत रस का स्थायी भाव निर्वेद और भक्ति रस का स्थायी भाव भगवद्विषयक रति या अनुराग है।
प्रश्न 5. निम्नलिखित शब्दों के विलोम लिखिए -
उत्तर:
सम्मान: अपमान
सुलभ: दुर्लभ
मित्र: शत्रु
विषाद: हर्ष
V. अनुभूति और अभिव्यक्ति :
प्रश्न 1. भारत माता का यह मंदिर शीर्षक में वर्णित विशेषताओं वाले अनुपम भारत देश में जन्म पाकर आप कैसा महसूस करते हैं ? कारण सहित स्पष्ट कीजिए तथा अपने देश की विलक्षणताओं से संदर्भित अन्य कविताओं का संग्रह कर उन्हें कंठस्थ कीजिए।
उत्तर: ऐसे अनुपम भारत देश में जन्म पाकर हम अत्यंत गौरवान्वित और सौभाग्यशाली महसूस करते हैं। इसका कारण यह है कि हमारा देश संपूर्ण विश्व में अपनी अनेकता में एकता, सर्वधर्म समभाव और वसुधैव कुटुंबकम की महान भावना के लिए जाना जाता है। यहाँ सभी धर्मों और संस्कृतियों का समान आदर होता है, जो इसे विश्व का सबसे विलक्षण देश बनाता है।
प्रश्न 2. भारत माता का यह मंदिर इस कविता में कवि ने भेदभाव व वैमनस्यता से रहित जिस सौहार्दपूर्ण तथा समतामूलक समाज की कल्पना की है- क्या वह आज के परिवेश में संभव है ? आपस में विचार कीजिए।
उत्तर: हाँ, आज के परिवेश में भी ऐसा समतामूलक और सौहार्दपूर्ण समाज बिल्कुल संभव है। यदि सभी नागरिक शिक्षा के माध्यम से जागरूक हों, अपने संकीर्ण स्वार्थों को त्याग दें और संवैधानिक मूल्यों तथा बंधुत्व की भावना का पूर्ण निष्ठा से पालन करें, तो कवि की यह सुंदर कल्पना आज भी पूरी तरह से साकार हो सकती है।