पाठ - 6 बिहारी के दोहे के प्रश्नोत्तर
प्रिय विद्यार्थियों, हिंदी भाषा medhashine.in के सुंदर गद्य संसार में आपका स्वागत है। यहाँ आपकी आवश्यकता के अनुसार कक्षा 8 यूपी बोर्ड की पुस्तक प्रज्ञा के पाठ 'बिहारी के दोहे' के प्रश्नोत्तर दिए जा …


प्रिय विद्यार्थियों,
हिंदी भाषा medhashine.in के सुंदर गद्य संसार में आपका स्वागत है।
यहाँ आपकी आवश्यकता के अनुसार कक्षा 8 यूपी बोर्ड की पुस्तक प्रज्ञा के पाठ 'बिहारी के दोहे' के प्रश्नोत्तर दिए जा रहे हैं। सभी उत्तरों को अत्यंत सरल, स्पष्ट और व्याकरणिक दृष्टि से शुद्ध रूप में प्रस्तुत किया गया है।
*विचार और कल्पना*
1. 'धतूरे' की अपेक्षा 'सोने' को अधिक मादक क्यों कहा गया है ?
उत्तर: धतूरा खाने से इंसान को नशा होता है और वह पागल हो जाता है, लेकिन सोना यानी धन-दौलत धतूरे से भी ज्यादा नशीला होता है। ऐसा इसलिए कहा गया है, क्योंकि धन-दौलत को तो केवल पा लेने भर से ही इंसान के अंदर घमंड का नशा आ जाता है और वह अंधा हो जाता है।
2. नीति के दोहों में कोई न कोई मूल्य छिपा होता है... निम्नलिखित मूल्यों से सम्बन्धित दोहों को ढूँढ़कर लिखिए-
(नोट: यह प्रश्न किताब के दोहों को देखकर छांटने का है, यहाँ उनके सही दोहे दिए गए हैं)
(क) दिखावा करने से बड़प्पन नहीं आता:
उत्तर : बड़े न हूजै गुनन बिनु, बिरद बड़ाई पाय।
कहत धतूरे सों कनक, गहनो गढ़ो न जाय।।
(ख), (ग), और (घ) के लिए: इन मूल्यों से जुड़े दोहे आपको अपनी पाठ्यपुस्तक के उस पाठ में से छांटकर लिखने होंगे, जहाँ कवि ने अपनी प्रशंसा स्वयं न करने और गुणों को सुंदरता से अधिक महत्व देने की बात कही है।
*पाठ से*
1. 'नाम बड़ा होने से ही कोई बड़ा नहीं हो जाता' इस कथन की पुष्टि के लिए कवि ने कौन-सा उदाहरण दिया है?
उत्तर: इस बात को साबित करने के लिए कवि ने 'धतूरे' का उदाहरण दिया है। धतूरे को भी 'कनक' (सोना) कहा जाता है, लेकिन केवल नाम कनक रख लेने से धतूरे से कोई गहना नहीं बनाया जा सकता, क्योंकि उसमें सोने वाले गुण नहीं होते।
2. कवि ने नदी, कूप, सर, बावड़ी को किस स्थिति में सागर के समान माना है ?
उत्तर: कवि कहते हैं कि जिस नदी, कुएँ, तालाब या बावड़ी से किसी प्यासे इंसान की प्यास बुझ जाए, वह उसके लिए किसी विशाल सागर के समान ही महान है। यानी जिससे हमारी जरूरत पूरी हो, वही हमारे लिए सबसे बड़ा है।
3. ओछे बड़े नहीं हो सकते, इसके लिए कौन-सा उदाहरण दिया गया है?
उत्तर: तुच्छ या छोटी सोच वाले लोग दिखावा करके कभी महान नहीं बन सकते। इसे समझाने के लिए कवि ने अलग-अलग उदाहरण दिए हैं कि जैसे कोई छोटी चीज़ खींचने या दिखावा करने से बड़ी नहीं हो जाती, वैसे ही बिना गुणों के कोई व्यक्ति महान नहीं बनता।
4. कृष्ण की मोहन मूरति क्यों अद्भुत है ?
उत्तर: भगवान श्रीकृष्ण की मनमोहक छवि इसलिए अद्भुत और निराली है, क्योंकि यह मूरत जब किसी भक्त के हृदय में बस जाती है, तो उसका मन पूरी तरह से साफ, पवित्र और प्रकाश से भर जाता है।
5. पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए -
(क) सो ताकौ सागर जहाँ, जाकी प्यास बुझाइ।
भाव: जिस चीज़ से इंसान की प्यास बुझ जाए, वह छोटी सी चीज़ भी उसके लिए किसी बड़े सागर से कम नहीं होती।
(ख) दूरि भजन जातैं कह्यौ, सौ तैं भज्यौ गँवार।
भाव: हे मूर्ख मन! मैंने तुझे जिन बुरे कामों से दूर भागने को कहा था, तू उन्हीं बुरे कामों में लग गया और जिस ईश्वर का भजन करने को कहा था, तू उससे दूर भाग गया।
(ग) तूठे तूठे फिरत हौ, झूठे विरद कहाइ।
भाव: तुम अपनी झूठी तारीफ और बड़ाई सुनकर ही घमंड में प्रसन्न होकर घूम रहे हो, जबकि वास्तविकता में तुम वैसे नहीं हो।
*भाषा की बात*
1. नीचे लिखे शब्दों के खड़ी बोली रूप लिखिए -
तऊ = तो भी या तब भी
ताते = इसलिए या उससे
जातैं = जिससे या जिसके कारण
कह्यौ = कहा
2. नीचे लिखी पंक्तियों में अलंकार स्पष्ट कीजिए-
यहाँ सभी पंक्तियों में यमक अलंकार है।
जहाँ एक शब्द एक से अधिक बार आए और हर बार उसका अर्थ अलग-अलग हो, वहाँ यमक अलंकार होता है।
(क) भजन कह्यौ, ताते भज्यौ, भज्यौ न एकौ बार...
यहाँ 'भज्यौ' शब्द के दो अलग-अलग अर्थ हैं: एक अर्थ है 'भजन करना या स्मरण करना' और दूसरा अर्थ है 'भाग जाना'। इसलिए यहाँ यमक अलंकार है।
(ख) 'इस धरा का इस धरा पर ही धरा रह जायेगा।'
यहाँ 'धरा' शब्द कई बार आया है, जिसके दो अर्थ हैं: एक 'धरा' का मतलब है धरती और दूसरे 'धरा' का मतलब है रखा हुआ। इसलिए यहाँ यमक अलंकार है।
(ग) 'काली घटा का घमण्ड घटा।'
यहाँ 'घटा' शब्द दो बार आया है: पहली 'घटा' का मतलब है काले बादल और दूसरी 'घटा' का मतलब है कम होना। अतः यहाँ भी यमक अलंकार है।