पाठ-6 माखनलाल चतुर्वेदी कृति 'पुष्प की अभिलाषा' और 'जवानी' कविता के अभ्यास प्रश्न
I. निम्नलिखित प्रश्नों के सही विकल्प का चयन कीजिए - प्रश्न 1. माखनलाल चतुर्वेदी का जन्म किस जिले में हुआ था ? (क) झाँसी (ख) बलिया (ग) आजमगढ़ (घ) होशंगाबाद उत्तर: (घ) होशंगाबाद प्रश्न 2. हिमकिरीटिनी…



अभ्यास:
I. निम्नलिखित प्रश्नों के सही विकल्प का चयन कीजिए -
प्रश्न 1. माखनलाल चतुर्वेदी का जन्म किस जिले में हुआ था ?
(क) झाँसी
(ख) बलिया
(ग) आजमगढ़
(घ) होशंगाबाद
उत्तर: (घ) होशंगाबाद
प्रश्न 2. हिमकिरीटिनी रचना के रचनाकार हैं -
(क) जयशंकर प्रसाद
(ख) भारतेंदु हरिश्चंद्र
(ग) माखनलाल चतुर्वेदी
(घ) महादेवी वर्मा
उत्तर: (ग) माखनलाल चतुर्वेदी
प्रश्न 3. कर्मवीर साप्ताहिक पत्र के संपादक थे -
(क) जयशंकर प्रसाद
(ख) महादेवी वर्मा
(ग) मैथिलीशरण गुप्त
(घ) माखनलाल चतुर्वेदी
उत्तर: (घ) माखनलाल चतुर्वेदी
प्रश्न 4. युग चरण के रचनाकार हैं -
(क) माखनलाल चतुर्वेदी
(ख) केदारनाथ सिंह
(ग) श्यामनारायण पांडेय
(घ) मैथिलीशरण गुप्त
उत्तर: (क) माखनलाल चतुर्वेदी
प्रश्न 5. पुष्प की अभिलाषा शीर्षक कविता किस काव्य-संग्रह से ली गई है ?
(क) युगचरण
(ख) यामा
(ग) साकेत
(घ) रश्मिरथी
उत्तर: (क) युगचरण
II. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए -
प्रश्न 1. पुष्प की अभिलाषा कविता में पुष्प किसका प्रतीक है ?
उत्तर: पुष्प की अभिलाषा कविता में पुष्प एक सच्चे देशभक्त और आत्मबलिदानी सैनिक का प्रतीक है जो अपनी मातृभूमि के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने को तत्पर रहता है।
प्रश्न 2. पुष्प की अभिलाषा शीर्षक कविता का केंद्रीय भाव लिखिए।
उत्तर: इस कविता का केंद्रीय भाव देशप्रेम और मातृभूमि के प्रति आत्मबलिदान की पावन भावना है। इसमें एक पुष्प के माध्यम से यह संदेश दिया गया है कि सच्चा सम्मान किसी देवता या सम्राट के सिर पर सजने में नहीं है, बल्कि मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीरों के मार्ग पर बिछ जाने में है।
प्रश्न 3. कविता में पुष्प को किन चीजों की चाह नहीं है और क्यों ?
उत्तर: कविता में पुष्प को देवकन्या के गहनों में गूँथे जाने, प्रेमी की माला में बिंधकर प्रेमिका को रिझाने, सम्राटों के शव पर चढ़ाए जाने और देवताओं के सिर पर चढ़कर अपने भाग्य पर अभिमान करने की चाह नहीं है। इसका कारण यह है कि पुष्प इन सभी सांसारिक सम्मानों को तुच्छ मानता है और उसका एकमात्र लक्ष्य मातृभूमि के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करना है।
प्रश्न 4. जवानी कविता के माध्यम से कवि नवयुवकों को क्या संदेश देना चाहते हैं? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: जवानी कविता के माध्यम से कवि नवयुवकों को आलस्य और निराशा त्यागकर मातृभूमि की रक्षा तथा नवनिर्माण के लिए प्रेरित करना चाहते हैं। वे यह संदेश देते हैं कि जवानी का अर्थ केवल शारीरिक बल नहीं है, बल्कि असीम उत्साह, त्याग और देश के लिए प्राणों की आहुति देने का दृढ़ संकल्प ही सच्ची जवानी है।
प्रश्न 5. जीवन की जवानी को मरण का त्योहार कहने का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: मरण का त्योहार जीवन की जवानी का भाव यह है कि सच्ची जवानी वही है जो मृत्यु से न डरे, बल्कि देश और धर्म की रक्षा के लिए प्राणों के बलिदान को एक उत्सव या त्योहार के समान उल्लासपूर्वक स्वीकार करे। आत्मोत्सर्ग में ही जवानी की वास्तविक सार्थकता छिपी है।
प्रश्न 6. साहसहीन युवकों को ग्राम-सिंह कहकर संबोधित करने का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: साहसहीन युवकों को ग्राम-सिंह अर्थात गाँव के कुत्ते कहकर संबोधित करने का आशय यह है कि जिस प्रकार गाँव के श्वान केवल व्यर्थ का शोर मचाते हैं और उनमें कोई वीरता या पराक्रम नहीं होता, उसी प्रकार बिना साहस और उत्साह के युवकों का जीवन निरर्थक होता है। वे देश या समाज के किसी काम नहीं आते।
प्रश्न 7. माखनलाल चतुर्वेदी का संक्षिप्त जीवन-परिचय तथा उनकी भाषा-शैली पर प्रकाश डालिए।
उत्तर: माखनलाल चतुर्वेदी का जन्म 4 अप्रैल 1889 को मध्य प्रदेश के होशंगाबाद जिले के बाबई गाँव में हुआ था। इन्होंने प्रभा, प्रताप और कर्मवीर जैसे राष्ट्रीय पत्रों का सफलतापूर्वक संपादन किया। इन्हें एक भारतीय आत्मा के नाम से भी जाना जाता है। इनकी भाषा ओजपूर्ण खड़ी बोली है जिसमें संस्कृत के तत्सम शब्दों के साथ उर्दू-फारसी के शब्द भी प्रयुक्त हुए हैं। इनकी शैली में वीर रस का ओज, उद्बोधन और प्रतीकात्मकता का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। सन् 1968 में इनका निधन हो गया। (जीवन परिचय देखे)
प्रश्न 8. माखनलाल चतुर्वेदी के साहित्यिक अवदान पर प्रकाश डालिए तथा उनकी प्रमुख रचनाओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर: माखनलाल चतुर्वेदी ने हिंदी साहित्य में राष्ट्रीयता और देशभक्ति की काव्यधारा को अत्यंत समृद्ध किया। एक श्रेष्ठ पत्रकार और ओजस्वी कवि के रूप में उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में युवाओं को गहराई से प्रेरित किया। इनकी प्रमुख रचनाओं में हिमकिरीटिनी, हिमतरंगिणी, माता, युगचरण, समर्पण और गद्य-काव्य साहित्य देवता प्रमुख हैं।
प्रश्न 9. माखनलाल चतुर्वेदी के ओजस्वी भाषण किन ग्रंथों में संगृहीत है ?
उत्तर: माखनलाल चतुर्वेदी के ओजस्वी भाषण चिंतक की लाचारी और आत्मदीक्षा नामक ग्रंथों में संगृहीत हैं।
प्रश्न 10. माखनलाल चतुर्वेदी के काव्यों का मूल-स्वर क्या है ?
उत्तर: माखनलाल चतुर्वेदी के काव्यों का मूल-स्वर प्रखर राष्ट्रीयता, देशभक्ति, त्याग, बलिदान और मातृभूमि के प्रति संपूर्ण समर्पण है।
प्रश्न 11. माखनलाल चतुर्वेदी की किस रचना को हिंदी साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया ?
उत्तर: माखनलाल चतुर्वेदी की प्रसिद्ध रचना हिमतरंगिणी को हिंदी साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
III. दिये गए पद्यांशों पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
(क)
चाह नहीं, मैं सुरबाला के गहनों में गूँथा जाऊँ,
चाह नहीं प्रेमी-माला में बिंध प्यारी को ललचाऊँ,
चाह नहीं सम्राटों के शव पर हे हरि डाला जाऊँ,
चाह नहीं देवों के सिर पर चढ़ूँ भाग्य पर इठलाऊँ,
मुझे तोड़ लेना बनमाली,
उस पथ में देना तुम फेंक।
मातृ-भूमि पर शीश चढ़ाने,
जिस पथ जावें वीर अनेक।
प्रश्न (i) उपर्युक्त पद्यांश का संदर्भ लिखिए।
उत्तर: प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक हिंदी के काव्य-खंड में संकलित और माखनलाल चतुर्वेदी द्वारा रचित युगचरण काव्य-संग्रह की कविता पुष्प की अभिलाषा से अवतरित है।
प्रश्न (ii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: रेखांकित अंश में पुष्प उपवन के माली से विनती करता है कि हे वनमाली, तुम मुझे तोड़कर उस रास्ते पर फेंक देना, जिस रास्ते से होकर अनेक शूरवीर अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने जा रहे हों। उन देशभक्त वीरों के चरणों का स्पर्श पाना ही मेरे लिए सबसे बड़ा और सच्चा सम्मान होगा।
प्रश्न (iii) उपर्युक्त पद्यांश का काव्य-सौंदर्य लिखिए।
उत्तर: इस पद्यांश में देशप्रेम और आत्मबलिदान की पावन भावना को एक पुष्प के माध्यम से अत्यंत मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया गया है। भाषा सरल और प्रवाहपूर्ण खड़ी बोली है। इसमें वीर रस की प्रधानता है। अनुप्रास अलंकार का सुंदर प्रयोग हुआ है तथा शैली प्रतीकात्मक और भावनात्मक है।
(ख)
प्राण अंतर में लिए, पागल जवानी!
कौन कहता है कि तू
विधवा हुई, खो आज पानी ?
चल रहीं घड़ियाँ,
चले नभ के सितारे,
चल रहीं नदियाँ,
चले हिम-खण्ड प्यारे;
चल रही है साँस,
फिर तू ठहर जाए ?
दो सदी पीछे कि
तेरी लहर जाए ?
पहन ले नर-मुंड-माला,
उठ, स्वमुंड सुमेरु कर ले;
भूमि-सा तू पहन बाना आज धानी
प्राण तेरे साथ हैं, उठा री जवानी!
प्रश्न (i) उपर्युक्त पद्यांश का शीर्षक व कवि का नाम लिखिए।
उत्तर: इस पद्यांश का शीर्षक जवानी है और इसके रचयिता कवि माखनलाल चतुर्वेदी हैं।
प्रश्न (ii) उपर्युक्त पद्यांश में कवि ने युवकों को क्या संदेश दिया है ?
उत्तर: इस पद्यांश में कवि ने युवकों को अपनी जवानी का आलस्य त्यागकर, उत्साह और अपार ऊर्जा के साथ देश के नवनिर्माण तथा मातृभूमि की रक्षा के लिए सर्वस्व अर्पण करने का संदेश दिया है।
प्रश्न (iii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: कवि जवानी का आह्वान करते हुए कहते हैं कि हे युवकों की मस्तानी जवानी, तू रणचंडी की भाँति नरमुंडों की माला पहन ले और अपने ही सिर का बलिदान देकर उस माला का सुमेरु अर्थात बीच का मुख्य मनका बन जा। जिस प्रकार धरती लहलहाती फसल से धानी चुनर ओढ़ लेती है, वैसे ही तू भी उत्साह से भर जा और सर्वत्र क्रांति लाने के लिए उठ खड़ी हो।
(च)
विश्व है असि का ?
नहीं संकल्प का है;
हर प्रलय का कोण,
काया-कल्प का है,
फूल गिरते, शूल
शिर ऊँचा लिए हैं;
रसों के अभिमान
को नीरस किए हैं !
खून हो जाए न तेरा देख, पानी!
मरण का त्योहार, जीवन की जवानी।
प्रश्न (i) उपर्युक्त पद्यांश का शीर्षक एवं कवि का नाम बताइए।
उत्तर: प्रस्तुत पद्यांश का शीर्षक जवानी है और इसके रचयिता कवि माखनलाल चतुर्वेदी हैं।
प्रश्न (ii) उपर्युक्त पद्यांश का काव्य-सौंदर्य लिखिए।
उत्तर: प्रस्तुत पद्यांश में कवि ने युवाओं के दृढ़ संकल्प, असीम उत्साह और क्रांति लाने की क्षमता का ओजस्वी वर्णन किया है। भाषा प्रवाहपूर्ण खड़ी बोली है। वीर रस का परिपाक हुआ है। रूपक और अनुप्रास अलंकार का प्रयोग दर्शनीय है तथा शैली उद्बोधन और प्रेरणादायी है।
प्रश्न (iii) रेखांकित अंश की व्याख्या लिखिए।
उत्तर: कवि नवयुवकों को सचेत करते हुए कहते हैं कि हे देश के युवा, कहीं तेरा जोश ठंडा न पड़ जाए और तुम्हारी रगों में बहने वाला उष्ण रक्त पानी न बन जाए। सच्ची जवानी वही है जो मृत्यु से घबराए नहीं, बल्कि देश के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने को एक उत्सव और त्योहार के रूप में मनाए।
IV. भाषा के रंग :
प्रश्न (क). उपमा अलंकार की परिभाषा देते हुए पाठ से एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर: जहाँ किसी एक वस्तु या प्राणी की तुलना किसी अन्य प्रसिद्ध वस्तु या प्राणी से उनके रूप, रंग, गुण या धर्म के आधार पर की जाती है, वहाँ उपमा अलंकार होता है। पाठ से उदाहरण - भूमि-सा तू पहन बाना आज धानी।
प्रश्न (ख). लाल चेहरा है नहीं पर लाल किसके इस पंक्ति में प्रयुक्त रस को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: इस पंक्ति में वीर रस का प्रयोग हुआ है, क्योंकि इसमें उत्साह, ओज और पराक्रम का भाव निहित है।
प्रश्न (ग). वीर रस की परिभाषा देते हुए पाठ से एक उदाहरण लिखिए।
उत्तर: जब उत्साह नामक स्थायी भाव का संयोग विभाव, अनुभाव और संचारी भाव से होता है, तब वीर रस की निष्पत्ति होती है। पाठ से उदाहरण - मरण का त्योहार, जीवन की जवानी।
प्रश्न (घ) कविता में आए निम्नलिखित मुहावरों का अर्थ तथा वाक्य प्रयोग कीजिए-
प्रश्न: नसों में पानी होना
उत्तर: अर्थ - उत्साह या जोश का समाप्त हो जाना।
वाक्य प्रयोग - जो नवयुवक अपनी मातृभूमि के लिए कुछ नहीं कर सकता, उसकी नसों में खून नहीं बल्कि पानी है।
प्रश्न: चरण चाटना
उत्तर: अर्थ - चापलूसी या खुशामद करना।
वाक्य प्रयोग - स्वाभिमानी व्यक्ति कभी किसी स्वार्थ के लिए दूसरों के चरण नहीं चाटते।
प्रश्न: कायाकल्प होना
उत्तर: अर्थ - पूरी तरह से बदल जाना या नया रूप प्राप्त कर लेना।
वाक्य प्रयोग - नई विकास योजनाएँ लागू होते ही इस पिछड़े गाँव का पूरी तरह से कायाकल्प हो गया।
प्रश्न: खून पानी होना
उत्तर: अर्थ - वीरता, साहस या संवेदना का समाप्त हो जाना।
वाक्य प्रयोग - अपने ही लोगों को कष्ट में देखकर भी यदि तुम चुप हो, तो क्या तुम्हारा खून पानी हो गया है।
V. अनुभूति एवं अभिव्यक्ति :
प्रश्न 2. विश्व है असि का ?, नहीं संकल्प का है; कवि का यह विचार आज के परिप्रेक्ष्य में कितना औचित्यपूर्ण है? क्या आप इस विचार से सहमत हैं? विचार व्यक्त कीजिए।
उत्तर: हाँ, मैं कवि के इस विचार से पूर्णतः सहमत हूँ। आज के परिप्रेक्ष्य में भी यह विचार पूरी तरह औचित्यपूर्ण है। संसार पर केवल हथियारों या तलवार के बल पर विजय प्राप्त नहीं की जा सकती। वास्तविक और स्थायी विजय दृढ़ संकल्प और मजबूत इच्छाशक्ति से ही प्राप्त होती है। आज के युग में भी जिन युवाओं ने दृढ़ संकल्प के साथ किसी लक्ष्य को साधा है, उन्होंने समाज और विश्व में बड़े रचनात्मक बदलाव किए हैं। अतः अस्त्र-शस्त्र से अधिक महत्त्व मनुष्य के दृढ़ निश्चय का होता है।