प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1. अनुप्रास अलंकार की परिभाषा बताते हुए पाठ से एक उदाहरण लिखिए ? उत्तर: परिभाषा: काव्य में जहाँ एक ही वर्ण की आवृत्ति बार-बार होती है, वहाँ अनुप्रास अलंकार होता है। वर्णों की यह आवृत्ति कविता म…


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प्रश्न 1. अनुप्रास अलंकार की परिभाषा बताते हुए पाठ से एक उदाहरण लिखिए ?
उत्तर:
परिभाषा: काव्य में जहाँ एक ही वर्ण की आवृत्ति बार-बार होती है, वहाँ अनुप्रास अलंकार होता है। वर्णों की यह आवृत्ति कविता में एक विशेष संगीतात्मकता और सौंदर्य उत्पन्न करती है।
पाठ से उदाहरण:
तरनि-तनूजा तट तमाल तरुवर बहु छाए।
स्पष्टीकरण: इस पंक्ति में 'त' वर्ण की आवृत्ति बार-बार हुई है, अतः यहाँ वृत्त्यानुप्रास अलंकार है।
प्रश्न 2. श्रृंगार रस की परिभाषा बताते हुए प्रस्तुत पाठ से एक उदाहरण लिखिए ?
उत्तर:
परिभाषा: नायक और नायिका के मन में संस्कार रूप में स्थित प्रेम नामक स्थायी भाव जब विभाव, अनुभाव और संचारी भाव के संयोग से जाग्रत होकर आस्वादन के योग्य हो जाता है, तब वह श्रृंगार रस कहलाता है। इसके दो भेद होते हैं- संयोग श्रृंगार और वियोग श्रृंगार।
पाठ से उदाहरण:
पिय प्यारे तिहारे निहारे बिना अखियाँ दुखियाँ नही मानती हैं।
स्पष्टीकरण: इस पद में गोपियों का श्री कृष्ण के प्रति अनन्य प्रेम और उनके वियोग में व्याकुल आँखों की तड़प का मार्मिक वर्णन है, अतः यहाँ वियोग श्रृंगार रस का सर्वोत्कृष्ट रूप दर्शनीय है।
प्रश्न 3. निम्नलिखित पंक्तियों का काव्य-सौंदर्य लिखिए—
(i) जैहै बनि बिगरि न बारिधिता बारिधि की, बूँदता बिलैहै बूँद बिबस बिचारी की।
भाव-पक्ष
अर्थ: इन पंक्तियों में कवि ने समुद्र और पानी की बूँद के माध्यम से जीव और ईश्वर के संबंध को दर्शाया है। बूँद जब समुद्र में मिलती है, तो समुद्र का कुछ भी बनता-बिगड़ता नहीं है उसकी विशालता वैसी ही रहती है, परंतु उस बेचारी विवश बूँद का अपना स्वतंत्र अस्तित्व सदा के लिए मिट जाता है।
कला-पक्ष :
अलंकार: इस पंक्ति में 'ब' वर्ण की अत्यधिक आवृत्ति हुई है बनि, बिगरि, बारिधिता, बारिधि, बूँदता, बिलैहै, बूँद, बिबस, बिचारी, जिसके कारण यहाँ अनुप्रास अलंकार का चरमोत्कर्ष दिखाई देता है।
भाषा: शुद्ध, साहित्यिक और मधुर ब्रजभाषा।
छंद: सवैया अथवा कवित्त लयबद्ध गेय पद।
(ii) महामेघ मिलि मनहु एक संगहिं सब गरजे।
भाव-पक्ष
अर्थ: इस पंक्ति में कवि ने वर्षा काल या किसी विराट प्राकृतिक दृश्य का अद्भुत वर्णन किया है, जहाँ आकाश में घने काले बादल इस प्रकार उमड़कर गरज रहे हैं मानो संसार के सारे विशाल बादल एक साथ मिलकर हुंकार भर रहे हों।
कला-पक्ष
अलंकार:
उत्प्रेक्षा अलंकार: यहाँ 'मनहु' वाचक शब्द का प्रयोग हुआ है, जहाँ बादलों के गरजने में सभी महामेघों के एक साथ जुटने की संभावना व्यक्त की गई है, अतः यहाँ उत्प्रेक्षा अलंकार है
अनुप्रास अलंकार: 'महामेघ मिलि मनहु' में 'म' वर्ण की तथा 'संगहिं सब' में 'स' वर्ण की आवृत्ति के कारण अनुप्रास अलंकार भी है।
गुण: ओज गुण की प्रधानता है जो बादलों की गर्जना के अनुकूल है।