पाठ -5 अपराजिता के प्रश्नोत्तर
प्रिय विद्यार्थियों, हिंदी भाषा medhashine.in के इस सुंदर गद्य संसार में आपका स्वागत है। हिन्दी प्रज्ञा के पाठ -5 अपराजिता की लेखिका गौरा शिवानी पंत हैं। इसके प्रश्नोत्तर दिए जा रहे हैं। सभी उत्तरो…


प्रिय विद्यार्थियों,
हिंदी भाषा medhashine.in के इस सुंदर गद्य संसार में आपका स्वागत है। हिन्दी प्रज्ञा के पाठ -5 अपराजिता की लेखिका गौरा शिवानी पंत हैं। इसके प्रश्नोत्तर दिए जा रहे हैं। सभी उत्तरों की भाषा को अत्यंत सरल और शुद्ध रखा गया है I
पाठ से :
प्रश्न 1: कौन-कौन से कथन सही हैं ? हमें अपने जीवन की रिक्तता बहुत छोटी लगने लगती है, जब-
उत्तर : कथन ख सही है।
हमें अपने जीवन की रिक्तता बहुत छोटी लगने लगती है, जब हमारे कष्टों से बड़े कष्ट को कोई हँसकर झेलता दिखाई देता है।
प्रश्न 2: लेखिका क्यों चाहती थीं कि लखनऊ का युवक उनकी पंक्तियाँ पढ़े ?
उत्तर : लखनऊ का एक युवक अपना एक हाथ कट जाने के कारण बहुत निराश हो गया था। लेखिका चाहती थीं कि वह डॉ चन्द्रा के संघर्ष और सफलता की कहानी पढ़े ताकि उसकी निराशा दूर हो और उसे जीवन में आगे बढ़ने की सच्ची प्रेरणा मिल सके।
प्रश्न 3: डॉ चन्द्रा की कविताएँ देखकर लेखिका की आँखें क्यों भर आयीं ?
उत्तर : डॉ चन्द्रा की कविताओं में उनकी गहरी उदासी और मन में छिपी हुई पीड़ा व्यक्त हुई थी। उनकी इस पीड़ा और जीवन के कठिन संघर्ष को महसूस करके लेखिका की आँखें भर आईं।
प्रश्न 4: डॉ चन्द्रा ने विज्ञान के अतिरिक्त किन-किन क्षेत्रों में उपलब्धियाँ प्राप्त कीं ?
उत्तर : विज्ञान के अतिरिक्त डॉ चन्द्रा ने कविता लेखन, संगीत, कढ़ाई बुनाई और अन्य कलाओं में भी सफलता प्राप्त की। इसके साथ ही उन्होंने जर्मन भाषा में भी विशेष योग्यता हासिल की थी।
प्रश्न 5: निम्नलिखित कथनों का भाव स्पष्ट कीजिए -
क. वह बित्ते-भर की लड़की मुझे किसी देवांगना से कम नहीं लगी।
उत्तर : इसका भाव यह है कि डॉ चन्द्रा शारीरिक रूप से बहुत छोटी और दिव्यांग थीं, लेकिन उनका साहस और आत्मविश्वास किसी देवी के समान महान और पवित्र था।
ख. पूरा निचला धड़ सुन्न है, फिर भी बोटी-बोटी फड़क रही है।
उत्तर : इसका भाव यह है कि डॉ चन्द्रा का शरीर कमर के नीचे से बिल्कुल काम नहीं करता था, लेकिन फिर भी उनके अंदर कुछ कर गुजरने की असीम ऊर्जा और भारी उत्साह भरा हुआ था I
ग. मैं चाहती हूँ कि कोई मुझे सामान्य-सा सहारा भी न दे।
उत्तर : इसका भाव यह है कि डॉ चन्द्रा पूरी तरह से आत्मनिर्भर और स्वतंत्र बनना चाहती थीं। वह अपने किसी भी काम के लिए दूसरों की दया या मदद पर निर्भर नहीं रहना चाहती थीं।
घ. चिकित्सा ने जो खोया है, वह विज्ञान ने पाया।
उत्तर : इसका भाव यह है कि डॉ चन्द्रा डॉक्टर बनना चाहती थीं लेकिन शारीरिक अक्षमता के कारण उन्हें मेडिकल में प्रवेश नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने विज्ञान के क्षेत्र में शोध किया और एक महान वैज्ञानिक बनीं। इस प्रकार चिकित्सा क्षेत्र को एक होनहार डॉक्टर नहीं मिल सका, लेकिन विज्ञान को एक महान वैज्ञानिक अवश्य मिल गया।
ङ. ईश्वर सब द्वार एक साथ बन्द नहीं करता। यदि एक द्वार बन्द करता है तो दूसरा द्वार खोल भी देता है।
उत्तर : इसका भाव यह है कि भगवान अगर इंसान से उसकी कोई एक क्षमता या अवसर छीन लेता है, तो वह उसे सफलता का कोई अन्य रास्ता जरूर दिखा देता है। इसलिए इंसान को कठिन समय में कभी निराश नहीं होना चाहिए।
प्रश्न 6: शारदा सुब्रह्मण्यम् को वीर जननी का पुरस्कार क्यों मिला ?
उत्तर : शारदा सुब्रह्मण्यम् ने अपनी दिव्यांग बेटी डॉ चन्द्रा को एक सफल इंसान बनाने के लिए अपना पूरा जीवन और सुख चैन समर्पित कर दिया। एक माँ के रूप में उनके इसी कठोर त्याग, तपस्या और असीम धैर्य के कारण उन्हें वीर जननी का पुरस्कार दिया गया।
प्रश्न 7: इस पाठ की किस पात्र ने आपको सबसे ज्यादा प्रभावित किया ? क्यों ?
उत्तर : इस पाठ में हमें डॉ चन्द्रा ने सबसे ज्यादा प्रभावित किया है। इसका कारण यह है कि उन्होंने अपनी इतनी बड़ी शारीरिक कमी को कभी अपनी सफलता के रास्ते की रुकावट नहीं बनने दिया। उनका अदम्य साहस, लगन और आत्मनिर्भरता हम सभी के लिए एक बहुत बड़ी प्रेरणा है।
भाषा की बात :
प्रश्न 1: उच्चारण भेद पर ध्यान रखते हुए निम्नलिखित शब्दों को ब और व के शुद्ध रूप में बोलकर पढ़िए -
सुब्रह्मण्यम्, बुद्धिदीप्त, जिजीविषा, विलक्षण, क्षत विक्षत, विच्छिन्न।
उत्तर : यह प्रश्न केवल शुद्ध उच्चारण के अभ्यास के लिए है। छात्र स्वयं इन कठिन शब्दों को स्पष्ट रूप से बोलने का अभ्यास करें।
प्रश्न 2: यातना शब्द संज्ञा है। उसमें प्रद प्रत्यय जोड़ देने से यातनाप्रद शब्द विशेषण बन जाता है, जिसका अर्थ है कष्ट देने वाला। नीचे लिखे शब्दों में प्रद जोड़कर नये शब्द बनाइए और उनके अर्थ लिखिए कष्ट, आनन्द, लाभ, हानि, ज्ञान।
उत्तर:
कष्टप्रद अर्थात कष्ट देने वाला
आनन्दप्रद अर्थात आनन्द देने वाला
लाभप्रद अर्थात लाभ देने वाला
हानिप्रद अर्थात हानि या नुकसान देने वाला
ज्ञानप्रद अर्थात ज्ञान देने वाला
प्रश्न 3: निम्नलिखित वाक्य पढ़िए क. इसके इस जीवन से तो मौत भली है। ख. मैंने जब वे कविताएँ देखीं तो आँखें भर आयीं। वाक्य क में तो निपात के रूप में प्रयुक्त है। निपात उस शब्द को कहते हैं, जो वाक्य में कहीं भी रखा जा सकता है, जैसे पर, भर, ही, तो। किन्तु वाक्य ख में तो, जब के साथ तब के अर्थ में प्रयुक्त हुआ है। क और ख की भाँति दो दो वाक्य बनाकर लिखिए।
उत्तर :
क की भाँति तो निपात वाले दो वाक्य
पहला वाक्य - तुमने तो मुझे पूरी तरह चौंका ही दिया।
दूसरा वाक्य - राम ने तो अपना सारा काम खत्म कर लिया है।
ख की भाँति जब के साथ तब के अर्थ में तो वाले दो वाक्य
पहला वाक्य - जब तुम मेरे घर आओगे तो हम साथ मिलकर खेलेंगे।
दूसरा वाक्य - जब तेज बारिश होने लगी तो सब लोग छिपने लगे।
प्रश्न 4: वह बैसाखियों से ही ह्वील चेयर तक पहुँच उसमें बैठ गयी और बड़ी तटस्थता से उसे स्वयं चलाती कोठी के भीतर चली गयी। इस वाक्य में दो वाक्य हैं, दोनों वाक्य स्वतंत्र अर्थ दे रहे हैं, किन्तु ये वाक्य और से जुड़े हुए हैं। ऐसे वाक्य को संयुक्त वाक्य कहते हैं। संयुक्त वाक्य में दो या दो से अधिक सरल वाक्य होते हैं, जो और, किन्तु या इसलिए से जुड़े रहते हैं। संयुक्त वाक्य के कोई दो उदाहरण पाठ से चुनकर लिखिए।
उत्तर:
पाठ पर आधारित संयुक्त वाक्य के दो उदाहरण
पहला वाक्य - डॉ चन्द्रा का निचला शरीर निर्जीव था किन्तु उनके चेहरे पर गज़ब का आत्मविश्वास था।
दूसरा वाक्य - उन्हें मेडिकल में प्रवेश नहीं मिला इसलिए उन्होंने विज्ञान के क्षेत्र में शोध किया।
प्रश्न 5: पाठ में आये हुए अंग्रेजी भाषा के शब्दों को छाँटिए और लिखिए।
उत्तर:
पाठ में आए अंग्रेजी भाषा के शब्द इस प्रकार हैं - ह्वील चेयर, डॉक्टर, प्रोफेसर, फेलोशिप, अवार्ड, माइक्रोबायोलॉजी, थीसिस और साइंस।