लोकोक्ति
''लोक या संसार में प्रचलित उक्ति को लोकोक्ति ही कहते हैं।''



''लोक या संसार में प्रचलित उक्ति को लोकोक्ति ही कहते हैं।''
अर्थ और परिभाषा :
लोक + उक्ति = लोकोक्ति
लोक: जनमानस, समाज या आम जनता।
उक्ति: कथन, बात या कही गई उक्ति।
अर्थात समाज में प्रचलित वह बात या कथन, जिसे लोगों ने अपने जीवन के अनुभवों से गढ़ा हो। इसे आम बोलचाल में कहावत भी कहा जाता है।
"समाज के दीर्घकालीन अनुभवों पर आधारित वह स्वतंत्र और पूर्ण वाक्य, जो किसी प्रसंग को पुष्ट करने, उपदेश देने या व्यंग्य करने के लिए जनमानस में रूढ़ हो गया हो, उसे लोकोक्ति कहते हैं।"
''लोक या संसार में प्रचलित उक्ति को लोकोक्ति ही कहते हैं।''
विशेष : मुहावरा एक वाक्य का हिस्सा होता है और वाक्य के अनुसार बदल जाता है, जबकि लोकोक्ति अपने आप में एक पूर्ण वाक्य होती है और इसका स्वरूप कभी नहीं बदलता। इसे ज्यों का त्यों प्रयोग किया जाता है।
उदाहरण :
अधजल गगरी छलकत जाय
शाब्दिक अर्थ: आधी भरी हुई पानी की गगरी ले जाते समय बहुत छलकती है, जबकि पूरी भरी मटकी शांत रहती है।
छिपा हुआ अर्थ: जिस व्यक्ति में ज्ञान या गुण कम होता है, वह दिखावा और अहंकार बहुत अधिक करता है।
वाक्य प्रयोग: जगदीश ने अभी कुछ दिन ही संगीत सीखा है और खुद को तानसेन समझने लगा है, यह तो वही बात हुई, अधजल गगरी छलकत जाय।
संक्षिप्त शब्दों में कहें तो, लोकोक्तियाँ भाषा का वह आभूषण हैं, जो कम से कम शब्दों में जीवन के सबसे गहरे सत्य को उजागर कर देती हैं।
प्रमुख लोकोक्तियाँ :
लोकोक्तियों का वास्तविक सौंदर्य उनके प्रयोग में है। यहाँ कुछ प्रसिद्ध लोकोक्तियाँ और उनके अर्थ दिए गए हैं-
1. लोकोक्ति– अपना हाथ जगन्नाथ
अर्थ– स्वयं का किया हुआ कार्य फलदायी होता है।
प्रयोग– व्यापार में सफलता के लिए दूसरों पर निर्भर रहने के बजाय स्वयं मेहनत करनी चाहिए, क्योंकि अपना हाथ जगन्नाथ होता है।
2. लोकोक्ति– अंत भला तो सब भला
अर्थ– परिणाम अच्छा होने पर सब अच्छा मान लिया जाता है।
प्रयोग– पूरी यात्रा में हमें बहुत सी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, परंतु गंतव्य पर सुरक्षित पहुँचने के बाद लगा कि अंत भला तो सब भला।
3. लोकोक्ति– आसमान से गिरा खजूर में अटका
अर्थ– किसी कार्य के पूरा होते होते बाधा उत्पन्न हो जाना।
प्रयोग– विदेश जाने के लिए वीज़ा तो मिल गया, परंतु अब हवाई टिकट नहीं मिल रहा है, यह तो वही बात हुई कि आसमान से गिरा खजूर में अटका।
4. लोकोक्ति– का वर्षा जब कृषि सुखाने
अर्थ– काम बिगड़ने पर सहायता व्यर्थ है।
प्रयोग– परीक्षा समाप्त होने के बाद यदि कोई तुम्हें नोट्स लाकर दे, तो उस सहायता का क्या लाभ, का वर्षा जब कृषि सुखाने।
5. लोकोक्ति– घी का लड्डू टेढ़ा भला
अर्थ– काम की वस्तु कम अच्छी रहने पर भी ठीक रहती है।
प्रयोग– यह पुरानी मशीन देखने में भद्दी अवश्य है, परंतु उत्पादन बहुत अच्छा करती है, सच है, घी का लड्डू टेढ़ा भला।
6. लोकोक्ति– चौबे गये छब्बे बनने दुब्बे बनकर आये
अर्थ– लाभ के चक्कर में हानि हो जाना।
प्रयोग– शेयर बाजार में रातों-रात अमीर बनने के लालच में उसने अपनी सारी जमा-पूँजी गँवा दी, उसकी तो वही दशा हुई कि चौबे गये छब्बे बनने दुब्बे बनकर आये।
7. लोकोक्ति– जंगल में मोर नाचा किसने देखा
अर्थ– गुणों का प्रदर्शन अनुपयुक्त स्थान पर करना।
प्रयोग– कला की समझ न रखने वालों के सामने अपनी शानदार चित्रकारी दिखाना वैसा ही है, जैसे जंगल में मोर नाचा किसने देखा।
8. लोकोक्ति– भई गति साँप छछूंदर केरी
अर्थ– असमंजस की स्थिति में होना।
प्रयोग– सच्चाई बताने पर नौकरी जाने का डर है और न बताने पर आत्मग्लानि हो रही है, मेरी तो भई गति साँप छछूंदर केरी वाली हो गई है।
9. लोकोक्ति– समरथ को नहि दोष गोसाईं
अर्थ– सबल का कोई दोष नहीं देखता है।
प्रयोग– जब बड़े नेताओं ने भ्रष्टाचार किया, तो किसी ने कुछ नहीं कहा, पर एक गरीब क्लर्क को तुरंत जेल भेज दिया गया, सच में समरथ को नहि दोष गोसाईं।
10. लोकोक्ति– अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ता
अर्थ– बड़ा काम एक आदमी से नहीं हो सकता।
प्रयोग– गाँव की सफाई का जिम्मा केवल एक व्यक्ति के सिर पर छोड़ना उचित नहीं है, सभी को मिलकर आगे आना होगा, क्योंकि अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ता।
11. लोकोक्ति– अधजल गगरी छलकत जाय
अर्थ– छोटे आदमी दिखावा बहुत करते हैं।
प्रयोग– उसे ज्ञान तो बहुत सामान्य सा है, परंतु सभा में वह सबसे अधिक बोल रहा था, इसे ही कहते हैं अधजल गगरी छलकत जाय।
12. लोकोक्ति– अपनी अपनी डफली अपना अपना राग
अर्थ– एक मत न होना।
प्रयोग– समिति में विकास पर चर्चा हो रही थी, परंतु कोई किसी की सुनने को तैयार नहीं था, बस अपनी अपनी डफली अपना अपना राग चल रहा था।
13. लोकोक्ति– आँख के अंधे नाम नयनसुख
अर्थ– गुण के विपरीत होना।
प्रयोग– उस बेईमान और भ्रष्ट व्यक्ति का नाम धर्मदास सुनकर मुझे यही लगा कि आँख के अंधे नाम नयनसुख।
14. लोकोक्ति– आगे नाथ न पाछे पगहा
अर्थ– कोई नाते रिश्तेदार न होना।
प्रयोग– सुरेश का इस दुनिया में न कोई सगा है न संबंधी, वह जहाँ चाहे, वहाँ जा सकता है, क्योंकि उसके आगे नाथ न पाछे पगहा है।