संक्षेप :
द्विवेदी युग (1900-1920) में क्या था? इस युग में कविता बहुत अनुशासित और गंभीर थी। कवि समाज को सुधरने की 'सीख' या 'उपदेश' देते थे। भाषा शुद्ध हिंदी खड़ी बोली तो बन गई थी, लेकिन कविता में थोड़ी कड़ाई थी।…


द्विवेदी युग (1900-1920) में क्या था? इस युग में कविता बहुत अनुशासित और गंभीर थी। कवि समाज को सुधरने की 'सीख' या 'उपदेश' देते थे। भाषा शुद्ध हिंदी खड़ी बोली तो बन गई थी, लेकिन कविता में थोड़ी कड़ाई थी।
छायावाद (1918-1936) में क्या हुआ? यहाँ कवि नियमों को तोड़कर आज़ाद हुए और बादलों, फूलों, प्रकृति और अपनी सुंदर कल्पनाओं की दुनिया में उड़ गए।
प्रगतिवाद (1936-1943) में क्या हुआ? यहाँ कवियों ने कहा कि बहुत हो गई कल्पना, अब ज़मीन पर आओ। उन्होंने मजदूरों, गरीबों और किसानों के दुःख-दर्द को दिखाया।
प्रयोगवाद (1943-1953) में क्या हुआ? यहाँ कवियों ने नए-नए शब्दों, नए प्रतीकों और नए विषयों के साथ 'प्रयोग' करना शुरू किया।
नई कविता सन् 1953 से अब तक लिखी जा रही है। प्रयोगवाद के बाद जब कविता में से जटिलता खत्म हुई और वह आम आदमी के और करीब आई, तो उसे 'नई कविता' नाम दिया गया।