सूरदास के पदो के प्रश्नोत्तर
प्रिय छात्र-छात्राओं यहाँ सभी प्रश्नों के उत्तर अत्यंत सरल भाषा में प्रस्तुत किए गए हैं। मुझे पूरी उम्मीद है कि आपको आसानी से समझ में आ जाएँगे। तो आइए, हम सब मिलकर भक्तशिरोमणि सूरदास जी के पदों के प्र…


प्रिय छात्र-छात्राओं यहाँ सभी प्रश्नों के उत्तर अत्यंत सरल भाषा में प्रस्तुत किए गए हैं। मुझे पूरी उम्मीद है कि आपको आसानी से समझ में आ जाएँगे। तो आइए, हम सब मिलकर भक्तशिरोमणि सूरदास जी के पदों के प्रश्नोत्तर का अभ्यास करें ...
I. निम्नलिखित प्रश्नों के सही विकल्प का चयन कीजिए
1. भक्तिकाल में सूरदास किस धारा के कवि हैं ?
उत्तर: (ग) कृष्णाश्रयी काव्यधारा
2. सूरदास ने कृष्ण की आराधना की है -
उत्तर: (ख) सख्य-भाव से
3. सूरदास के गुरु का नाम है -
उत्तर: (ख) वल्लभाचार्य
4. गोपियाँ सकल जोग के ईस किसे कहती हैं ?
उत्तर: (ग) उद्धव
5. सूरदास की रचना नहीं है -
उत्तर: (ख) श्रीकृष्ण गीतावली
6. सूरदास सिद्धहस्त थे -
उत्तर: (ख) वात्सल्य रस के प्रयोग में
II. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए
1. चरन-कमल बंदौ हरि राइ में हरि-राइ शब्द किसके लिए प्रयोग किया गया है ?
उत्तर: इस पंक्ति में हरि-राइ शब्द भगवान श्रीकृष्ण के लिए प्रयोग किया गया है।
2. उद्धव गोकुल किस लिए आए थे और उसका क्या प्रभाव हुआ ?
उत्तर: उद्धव गोकुल में गोपियों को योग साधना और निर्गुण निराकार ब्रह्म का उपदेश देने के लिए आए थे। इसका प्रभाव यह हुआ कि गोपियों ने उनके ज्ञान और योग के संदेश को सिरे से नकार दिया और श्रीकृष्ण के प्रति अपने अनन्य और अटूट प्रेम को और अधिक दृढ़ता के साथ प्रस्तुत किया।
3. निरगुन कौन देस को बासी में निरगुन शब्द किसके लिए आया है ?
उत्तर: यहाँ निरगुन शब्द उस रूप और आकार रहित निराकार परब्रह्म परमात्मा के लिए आया है जिसका उपदेश उद्धव गोपियों को दे रहे थे।
4. गोपियों ने उद्धव को क्या उत्तर दिया ?
उत्तर: गोपियों ने उद्धव को उत्तर दिया कि उनके पास कोई दस बीस मन नहीं हैं, उनका एक ही मन था जो श्रीकृष्ण के साथ मथुरा चला गया है। इसलिए वे योग साधना करने और निर्गुण ब्रह्म को अपनाने में पूरी तरह से असमर्थ हैं।
5. सूरदास ने किनकी बाल-लीलाओं का वर्णन किया है ?
उत्तर: सूरदास जी ने भगवान श्रीकृष्ण की विविध बाल-लीलाओं का अत्यंत सजीव, मनोहारी और स्वाभाविक वर्णन किया है।
6. कृष्ण को ब्रज की क्या-क्या बात याद आती है ?
उत्तर: श्रीकृष्ण को ब्रज की गोपियाँ, ग्वालबाल, गाएं, माता यशोदा, नंद बाबा, वृंदावन के बाग बगीचे, कुंज और वहां बिताए गए सभी सुखद पल बहुत याद आते हैं।
7. गोपियों ने उद्धव की किन बातों का खंडन किया है ?
उत्तर: गोपियों ने उद्धव के योग साधना, वैराग्य और निर्गुण निराकार ब्रह्म की उपासना संबंधी उपदेशों का अपने तीखे तर्कों और अनन्य प्रेम के माध्यम से खंडन किया है।
8. गोपियाँ क्या चुराने की योजना बनाती हैं और वे ऐसा क्यों करना चाहती हैं ?
उत्तर: गोपियाँ श्रीकृष्ण की मुरली चुराने की योजना बनाती हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि इस मुरली ने श्रीकृष्ण को अपने पूर्ण वश में कर लिया है और इसी कारण श्रीकृष्ण अब गोपियों की उपेक्षा करने लगे हैं।
9. श्रीकृष्ण गाय चराए जाने संबंधी किन समस्याओं का उल्लेख माँ यशोदा से करते हैं ?
उत्तर: श्रीकृष्ण माँ यशोदा से शिकायत करते हैं कि वन में सभी ग्वालबाल केवल उन्हीं से गायें घेरने के लिए कहते हैं, जिसके कारण दिन भर दौड़ते दौड़ते उनके पैरों में बहुत दर्द होने लगता है।
10. सूरदास के जीवन-वृत्त का उल्लेख करते हुए उनके साहित्यिक योगदान पर प्रकाश डालिए।
उत्तर: जीवन परिचय लिखा गया है। उसमे देखें...
11. सूरदास की प्रमुख रचनाओं का उल्लेख करते हुए उनके काव्यगत सौंदर्य पर प्रकाश डालिए।
उत्तर: सूरदास जी की तीन प्रामाणिक रचनाएं मानी जाती हैं जो सूरसागर, सूरसारावली और साहित्यलहरी हैं। उनके काव्य में ब्रजभाषा की असीम मधुरता, वात्सल्य रस की सूक्ष्म मनोवैज्ञानिक परख और शृंगार रस का उत्कृष्ट समन्वय देखने को मिलता है। उपमा, रूपक और उत्प्रेक्षा आदि अलंकारों का उन्होंने बहुत ही सहज और स्वाभाविक प्रयोग किया है।
(जीवन परिचय लिखा गया है। उसमे देखें...)
12. सूरदास का साहित्यिक परिचय देते हुए उनकी भाषा-शैली पर प्रकाश डालिए।
उत्तर: सूरदास जी को हिंदी साहित्य गगन का सूर्य माना जाता है। उन्होंने श्रीकृष्ण की विविध लीलाओं का अमर गान किया है। उनकी भाषा परिमार्जित, कोमल और साहित्यिक ब्रजभाषा है, जिसमें माधुर्य गुण की प्रधानता है। उन्होंने गेय मुक्तक काव्य शैली का प्रयोग किया है, जिसके कारण उनके पद शास्त्रीय संगीत के राग रागनियों पर आधारित होकर अत्यधिक कर्णप्रिय बन गए हैं।(जीवन परिचय लिखा गया है। उसमे देखें...)
पद्यांश:
III. दिये गए पद्यांशों पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए
(क) चरन-कमल बंदौ हरि राइ।
जाकी कृपा पंगु गिरि लंघै, अंधे को अब कछु दरसाई।
............बार-बार बंदौ तिहि पाई।
(i) उपर्युक्त पद्यांश के शीर्षक एवं रचयिता का नाम लिखिए।
उत्तर: प्रस्तुत पद्यांश का शीर्षक पद है और इसके रचयिता भक्तकवि सूरदास जी हैं।
(ii) रेखांकित अंश में कौन सा अलंकार है ? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: चरन कमल अंश में रूपक अलंकार है क्योंकि यहाँ भगवान के चरणों में कमल का अभेद आरोप किया गया है, अर्थात चरणों को ही कमल मान लिया गया है।
(iii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: कवि सूरदास जी भगवान श्रीकृष्ण के कमल रूपी चरणों की वंदना करते हुए कहते हैं कि इन चरणों का प्रभाव इतना अद्भुत है कि इनकी कृपा से लंगड़ा व्यक्ति पर्वत लांघ सकता है, अंधे को सब कुछ दिखाई देने लगता है।
(ख) अबिगत-गति कछु कहत न आवै।
... ... .. सूर सगुन-पद गावै।
(i) उपर्युक्त पद्यांश का संदर्भ लिखिए।
उत्तर: यह पद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक हिंदी के काव्य खंड में संकलित पद शीर्षक पाठ से अवतरित है, जिसके रचयिता महाकवि सूरदास जी हैं।
(ii) अगम-अगोचर से क्या तात्पर्य है ? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: अगम अगोचर से तात्पर्य उस निराकार परब्रह्म से है जहाँ तक मनुष्य के मन और वाणी की पहुँच नहीं है, और जिसे सामान्य इंद्रियों के माध्यम से जाना या देखा नहीं जा सकता है।
(iii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: सूरदास जी कहते हैं कि निराकार (निर्गुण) ब्रह्म की दशा या स्वरूप का वर्णन शब्दों में नहीं किया जा सकता। जिस ईश्वर का कोई निश्चित रूप, रंग या आकार नहीं है, उसकी महिमा को वाणी द्वारा प्रकट करना पूरी तरह से असंभव है। वह बुद्धि और शब्दों की पहुँच से परे है।
(ङ) निरगुन कौन देस कौ बासी ?
मधुकर कहि समुझाइ सौंह दै, बूझतिं साँच न हाँसी।।
... ... .. सूर सबै मति नासी।।
(i) उपर्युक्त पद्यांश का संदर्भ लिखिए।
उत्तर: प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक हिंदी के काव्य खंड के 'पद' नामक पाठ से अवतरित है, जिसके रचयिता भक्त शिरोमणि महाकवि सूरदास जी हैं।
(ii) पद्यांश में मधुकर शब्द किसके लिए प्रयुक्त हुआ है ?
उत्तर: पद्यांश में मधुकर शब्द उद्धव के लिए प्रयुक्त हुआ है जो गोपियों को योग संदेश देने आए थे।
(iii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: गोपियाँ उद्धव से व्यंग्य के साथ पूछती हैं- हे उद्धव! तुम जिस निर्गुण ब्रह्म की उपासना करने का उपदेश हमें दे रहे हो, ज़रा यह तो बताओ कि वह निर्गुण ब्रह्म किस देश का रहने वाला है? अर्थात उसका निवास स्थान कहाँ है, वह कहाँ रहता है?
गोपियाँ आगे कहती हैं-
हे मधुकर! हम तुम्हें अपनी सौगंध देकर कहती हैं कि हमें यह बात भली-भांति समझाकर बताओ। हम तुमसे यह बात बिल्कुल सच-सच पूछ रही हैं, हम तुम्हारे साथ कोई हँसी-मज़ाक नहीं कर रही हैं।
भाषा व्याकरण:
(iii) पद्यांश का काव्यगत सौंदर्य लिखिए।
उत्तर: इस पद्यांश में माता यशोदा का कृष्ण के प्रति वात्सल्य प्रेम, चिंता और एक माँ का स्वाभाविक हृदय प्रकट हुआ है। यहाँ शुद्ध साहित्यिक ब्रजभाषा का प्रयोग हुआ है तथा वात्सल्य रस की पूर्ण और सहज अभिव्यक्ति हुई है।
IV. भाषा के रंग:
1. निम्नलिखित शब्दों में प्रयुक्त उपसर्गों की पहचान कीजिए।
उत्तर:
निरगुन में निर उपसर्ग है।
निरालंब में निर उपसर्ग है।
प्रतिमनि में प्रति उपसर्ग है।
अगोचर में अ उपसर्ग है।
अबला में अ उपसर्ग है।
अगम में अ उपसर्ग है।
प्रतिपद में प्रति उपसर्ग है।
अबिगत में अ उपसर्ग है।
2. जगदीस एवं निरालंब का संधि-विच्छेद करते हुए संधि के नाम लिखिए तथा इसी संधि के अन्य पाँच शब्दों को पाठ से चुनकर लिखिए।
उत्तर:
जगदीस = जगत् + ईस - यहाँ व्यंजन संधि है।
निरालंब = निः + आलंब - यहाँ विसर्ग संधि है।
पाठ के आधार पर इसी प्रकार की संधियों के अन्य पाँच शब्द इस प्रकार हो सकते हैं:
निरगुन =निः + गुन - विसर्ग संधि
मनोरथ =मनः + रथ - विसर्ग संधि
सज्जन =सत् + जन - व्यंजन संधि
दिगंबर =दिक् + अंबर - व्यंजन संधि
निठुर =निः + ठुर - विसर्ग संधि
3. निम्नलिखित पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार को स्पष्ट कीजिए।
(क) चरन-कमल बंदौ हरि-राई।
उत्तर: यहाँ चरन और कमल में अभेद आरोप होने के कारण रूपक अलंकार का सुंदर प्रयोग हुआ है।
(ख) करि-करि प्रतिपद प्रतिमनि बसुधा, कमल बैठकी साजति।
उत्तर: यहाँ करि करि शब्द की आवृत्ति के कारण पुनरुक्तिप्रकाश अलंकार है। इसके साथ ही प और क वर्ण की आवृत्ति होने से अनुप्रास अलंकार का भी प्रयोग हुआ है।
4. तत्सम व तद्भव शब्दों को तालिकाबद्ध कीजिए।
उत्तर:
तत्सम शब्द: जननी, गृह, पंगु, बिंब, विधु, मति।
तद्भव शब्द: धाई, जोग, चरन, इंद्री, साँच।
V. अनुभूति और अभिव्यक्ति:
1. सूरदास ने कृष्ण की विविध बाल-लीलाओं का जितना सजीव व सचित्र वर्णन किया है, उस आधार पर आपको क्या लगता है कि सूरदास जन्म से दृष्टिहीन थे ? विमर्श कीजिए।
उत्तर: सूरदास जी ने भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं जैसे घुटनों के बल चलना, माखन चुराना, माता से जिद करना और बाल हठ का अत्यंत सूक्ष्म और मनोवैज्ञानिक वर्णन किया है। एक बच्चे की हर छोटी से छोटी चेष्टा का ऐसा सजीव और स्वाभाविक वर्णन देखकर यह सहज ही विश्वास नहीं होता कि वे जन्मांध थे। यह माना जा सकता है कि यह वर्णन उनके अंतर्मन की दिव्य दृष्टि और ईश्वर के प्रति उनकी अनन्य भक्ति का ही परिणाम था जिसने उन्हें भौतिक दृष्टि न होते हुए भी सब कुछ देखने की क्षमता प्रदान कर दी थी।
2. संदेसौ देवकी सौं कहियौ..... इन काव्य पंक्तियों से ध्वनित भावों के आधार पर कल्पना कीजिए कि माँ अपनी संतानों के पालन-पोषण के प्रति कितना संवेदनशील व समर्पित होती है; ऐसे में बड़े होने पर आपका माता-पिता के प्रति क्या कर्त्तव्य होना चाहिए ? चिंतन कीजिए।
उत्तर: इन पंक्तियों से स्पष्ट ध्वनित होता है कि एक माँ अपनी संतान के प्रति अत्यंत संवेदनशील और पूर्ण रूप से समर्पित होती है। वह अपने बच्चे की छोटी से छोटी सुविधा, आदत और पसंद का ध्यान रखती है तथा हमेशा उसकी भलाई के विषय में सोचती है। ऐसे में बच्चों के बड़े होने पर उनका यह परम कर्तव्य बन जाता है कि वे अपने माता पिता की भावनाओं का पूरा सम्मान करें। उन्हें बुढ़ापे में भावनात्मक और शारीरिक सहारा दें, उनकी हर आवश्यकता को बिना कहे समझें और उन्हें हर प्रकार का सुख, शांति तथा आदर प्रदान करने का निरंतर प्रयास करें।